सीसीडी मालिक के 5 लाख से 1 अरब तक और फिर कं’गाल होने तक का सफर

भारत के सबसे बडे कैफे चैन ‘कैफे कॉफी डे’ के फाउंडर वीजी सिद्धार्थ सोमवार से लापता हैं. पुलिस के अनुसार सिद्धार्थ कर्नाटक के मंगलुरु के पास से गायब हुए है. पुलिस की टीम उनकी तलाश में लगी हुई है.बताया जा रहा है कि वो कारोबार को लेकर काफी दिन से तनाव में थे. उनकी कंपनी सीसीडी पर 7000 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज था. और आशंका जताई जा रहा है कि शायद इस परेशानी के चलते ही उन्होंने नदी में कूदकर आत्महत्या कर ली है. सिद्धार्थ की कंपनी ”कॉफी डे एंटरप्राइजेज” के शेयर में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. मंगलवार को कारोबार के दौरान कॉफी डे एंटरप्राइजेज के शेयर 20 फीसदी से अधिक टूटकर 154 रुपये प्रति शेयर के भाव पर आ गए थे. उन्होंने मुंबई में जे.एम. फाइनेंशियल लिमिटेड में पोर्टफोलियो मैनेजमेंट में इंटर्न के रूप में अपने क्ररियर की शुरुवात की थी. आइए आपको बताते हैं कैसे सिद्धार्थ ने शुरू की थी ये कंपनी.

एक अरब डॉलर से अधिक की प्रॉपर्टी के मालिक सिद्धार्थ का कारोबारी सफर बेहद रोचक रहा है. सिद्धार्थ ने मंगलौर यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में पोस्ट ग्रेजुएशन किया था. सिद्धार्थ कर्नाटक के पूर्व मुख्‍यमुंत्री एसएम कृष्‍णा के दामाद हैं. सिद्धार्थ के पिता ने उन्हें कॉफ़ी का बिजनेस करने के लिए 5 लाख रुपए दिए थे. और कहा था कि अगर उनका ये बिज़नेस सफल नही रहा तो उन्हें अपने घर के कारोबार को संभालना पडेगा. 1993 में उन्होंने कॉफी ट्रेडिंग के लिए अमलगमेटेड बीन कंपनी की स्थापना की थी . वह हर साल करीब 28,000 टन कॉफी एक्सपोर्ट करने लगे. उनकी कॉफी कारोबार में लगी कंपनी का सालाना कारोबार 2500 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. वह ग्रीन कॉफी एक्सपोर्ट करने वाली भारत की सबसे बड़ी कंपनी है. उनके पास करीब 12,000 एकड़ का कॉफी प्लांटेशन है. सीसीडी का आउटलेट भारत में कई जगह है. कई मैट्रो स्टेशन में भी सीसीडी आउटलेट बने हुए है. 1996 में कर्नाटक में उन्होंने युवाओं के लिए कैफे कॉफी डे की शुरुआत की. पहली कॉफी शॉप इंटरनेट कैफे के साथ खोली गई . सीसीडी ने अपने बेसिक बिजनस कॉफी के साथ रहने का फैसला किया और पूरे देश में कॉफी कैफे का बिजनेस करने का फैसला किया.भारत के अलावा सीसीडी के ऑस्ट्रिया, कराची, दुबई और चेक रिपब्लिक में भी आउटलेट हैं. और लगभग 5 हजार लोगों को रोजगार भी मिला. इस समय देश के 247 शहरों में सीसीडी के लगभग 1,758 कैफे हैं.

कंपनी की मार्केट वैल्यू करीब 3254 करोड़ रुपये है. उसके बाद साल 2000 में सिद्धार्थ ने ग्लोबल टेक्नोलॉजी वेंचर्स लिमिटेड की स्थापना की जो टेक्नोलॉजी को भारतीय कंपनियों में एक्सपोर्ट करती है. इसके अलावा उनकी वे2वेल्थ ब्रोकर्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी लोगों को इनवेस्टमेंट करने की सलाह देती है. साल 2011 में वी जी सिद्धार्थ को फोर्ब्स इंडिया द्वारा ‘नेक्स्टजन आंत्रप्रेन्योर’ अवॉर्ड मिला.

सीसीडी का सीधा मुकाबला टाटा ग्रुप की स्टारबक्स के अलावा कुछ छोटी कैफे चेंस बरिस्ता और कोस्टा कॉफी से भी है. स्टारबक्स के भारत में 146 आउटलेट हैं। पिछले दो साल में सीसीडी के एक्स्पेंड की रफ्तार कम हुई है. सीसीडी ने वित्त वर्ष 2018 में 90 स्मॉल फॉरमेट स्टोर बंद किए थे.

बेवरेज कंपनी कोका-कोला की भारत की सबसे बड़ी कॉफी चेन कैफे कॉफी डे पे नजर थी और एक बड़ा हिस्सा खरीदने के लिए बातचीत भी कर रही थी. सीसीडी के अलावा कोका-कोला कंपनी ने माइंड्री, डार्क फॉरेस्ट फर्नीचर जैसी कंपनी में भी अच्छा इन्वेस्टमेंट किया था. उन्होंने 3000 एकड़ जमीन पर केले के पेड़ लगाए और केले को एक्सपोर्ट भी करने लगे.

सीसीडी चलाने वाली कंपनी कॉफी डे एंटरप्राइजेज लिमिटेड को पिछले कई साल से घाटा हो रहा है. 2018 में सीसीडी कंपनी के इनकम और प्रॉफिट में गिरावट आई है. 2018 में इसकी इनकम 142 करोड़ से घटकर 124.06 करोड़ रुपये रह गई. आशंका ये जताई जा रही है कि इन्ही फाइनेंसियल नुक्सान की वजह से वो तनाव में थे और उनके लापता होने के पीछे भी ये ही वजह बताई जा रही है.

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