अब उत्तर प्रदेश की यूनिवर्सिटी में नही लगेंगे देश विरोधी नारे

275

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ अपने फैसलों से कई बार सुर्ख़ियों में रह चुके हैं..अभी हाल ही में योगी सरकार ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है..वैसे देश में कई यूनिवर्सिटी हैं जहाँ पर लोग पढ़ने के नाम पर, आजादी के नाम पर ना जाने कैसी कैसी गतिविधियों को अंजाम देते हैं..कई यूनिवर्सिटी में तो देश विरोधी नारे तक लगाए गए हैं..लेकिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अब इन सब को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया है और इस तरह के activities पर रोक लगाने के लिए उन्होंने बड़ा कदम उठाया है..
उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कैबिनेट बैठक में प्राइवेट यूनिवर्सिटी ऑर्डिनेंस 2019 यानि की अम्ब्रेला एक्ट को मंजूरी दी है..इस कानून के लागू होने से प्राइवेट यूनिवर्सिटी में सरकार का दखल बढ़ेगा..वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताएं मिलने पर सरकार के पास प्रशासक नियुक्त करने से लेकर यूनिवर्सिटी को बंद करने का भी अधिकार होगा..साथ ही सरकार नियंत्रण के लिए नियम भी बना सकेगी. इसके साथ ही यूनिवर्सिटी को इस बात का आश्वासन भी देना होगा कि यूनिवर्सिटी में किसी तरह की देश विरोधी गतिविधियाँ नही होंगी..


अब इस क़ानून को 18 जुलाई को शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा..जो कानून तैयार किया गया है , उसमें सभी यूनिवर्सिटी ‘UMBRELLA ACT’ के तहत आती है. राज्य सरकार के द्वारा जारी की गई प्रेस रिलीज के अनुसार, अगर किसी भी यूनिवर्सिटी में एंटी नेशनल एक्टिविटी पाई जाती है तो राज्य सरकार उनके खिलाफ एक्शन ले सकती है. गौरतलब है कि इससे पहले दिल्ली की जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में देशविरोधी नारे लगाने का मामला सामने आया था, जिसपर काफी विवाद हुआ था. साथ ही अगर विश्वविद्यालय के खिलाफ जालसाजी का आरोप लगता है तो भी सरकार उनके खिलाफ एक्शन लेगी. इस कानून के तहत प्रदेश की 27 यूनिवर्सिटी आएगी… इसके बाद जब भी कोई भी नियम सरकार बनाएगी उसे सभी विश्वविद्यालयों को अपने यहां लागू करने होंगे, यानी इसमें फीस स्ट्रक्चर में बदलाव करना भी होंगा..इसके अलावा सरकार की तरफ से 5 करोड़ रुपये की राशि भी यूनिवर्सिटी को दी जा रही है. ये उन बच्चों के लिए मददगार होगी जो किसी वजह से अपना कोर्स बीच में ही छोड़ देते हैं..साथ ही कमजोर वर्ग के छात्रों को 10 प्रतिशत सीटों पर 50 प्रतिशत शुल्क के साथ दाखिला देना होगा..राज्य उच्च शिक्षा परिषद साल में कम से कम एक बार यूनिवर्सिटी का निरीक्षण करेगी..जांच रिपोर्ट के आधार पर मान्यता वापस लेकर यूनिवर्सिटी को बंद किया जा सकेगा.


दरअसल अभी तक ये विश्वविद्यालयों अलग अलग कानून और नियम के हिसाब से चलती रही है लेकिन अब योगी सरकार द्वारा लागू किये जा रहे इस कानून के बाद सभी यूनिवर्सिटी के लिए एक ही कानून होगा और एक ही नियम रहेगा..योगी सरकार द्वारा लागू किये जाने वाले इस एक्ट में खास बात यह है कि इस एक्ट में न्यूनतम 75 फीसद शिक्षकों की नियुक्ति परमानेंट किए जाने का प्रावधान किया गया है.. लाइब्रेरी में पुस्तकों की उपलब्धता के साथ आईटी का उपयोग बढ़ाने के लिए ऑन लाइन रिसोर्सेज का प्रावधान भी किया गया है..एक्ट के दायरे में आने वाले सभी विश्वविद्यालयों पर कॉमन एकेडमिक कैलेंडर लागू किया जाएगा ताकि एडमिशन और एग्जाम एक ही समय पर हों और रिजल्ट भी एक ही समय पर घोषित किया जा सके….


यूनिवर्सिटी में देश विरोधी या राष्ट्रविरोधी गतिविधियाँ पिछले कई सालों से सुर्ख़ियों में रही हैं और अब एक बार फिर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बनाये जा रहे कानून की वजह से सुर्ख़ियों में है. वैसे योगी सरकार के इस फैसले पर विवाद भी हो सकता है लेकिन ये कोई पहला फैसला नही है जब विवाद खड़ा हो..इससे पहले भी योगी सरकार के कई फैसले विवादों में रह चुके हैं..बदमाशों के खिलाफ एनकाउंटर हो या फिर महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाये गये रोमियों स्कॉयड हो.. या फिर गायों के लिए गौशाला ही क्यूं ना हो..ऐसे कई फैसले है जो विवादों में रहे हैं..
खैर योगी सरकार का यह फैसला कितना कारगर साबित होता है ये तो आने वाले दिनों में पता चलेगा..