इल्हान ओमर, कश्मीर की चिंता छोडो और उस देश की चिंता करो जहाँ से तुम भाग आई

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एजेंडावादी लोग हर देश में होते हैं, चाहे भारत हो या अमेरिका, चाहे विकसित देश हो या विकासशील देश. ऐसे लोग हर देश में होते हैं जिन्हें हर हाल में अपना एजेंडा चलाना है. ऐसी ही एक एजेंडावादी महिला है अमेरिकी संसद में. नाम है इल्हान ओमर.

इल्हान ने कश्मीर पर एक ट्वीट किया है, “हमें कश्मीर में तुरंत संचार बहाली, मानवाधिकारों की सुरक्षा, लोकतान्त्रिक मानदंडो, धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान और युद्ध के हालात से बाहर निकालने के लिए कहना होगा. अंतरराष्ट्रीय संगठनों को दस्तावेज तैयार करने की अनुमति दी जानी चाहिए कि वहां के जमीनी हालात क्या है?”  

दुनिया भर के देश इस्लामिक अतिवाद और आतंकवाद से त्रस्त है. दुनिया भर के इस्लामिक देश अराजकता की स्थिति से गुजर रहे हैं. वहां के लोगों का कोई मानवाधिकार नहीं है. लेकिन इल्हान को कश्मीर के बारे में ज्ञान देना है, जो दुनिया के सबसे बड़े लोकतान्त्रिक देश का हिस्सा है.

अमेरिका की राजनीति में इल्हान काफी विवादस्पद सख्सियत हैं. राष्ट्रपति ट्रम्प तो इन्हें अमेरिका छोड़ कर जाने की सलाह भी दे चुके हैं. इसके पीछे है इल्हान का अतीत और उनके वर्तमान का एजेंडा. इल्हान अमेरिका की डेमोक्रेटिक पार्टी की पहली अश्वेत और मुस्लिम महिला सांसद हैं. नवम्बर 2018 में हुए चुनावों में मिनेसोटा से जीतकर हाइस ऑफ़ रिप्रेज़ेन्टेटिव्स में आई थीं.  

अब आते हैं इल्हान के एजेंडे पर. इल्हान को दिक्कत है इजरायल से, इलहान को दिक्कत है यहूदियों से, इल्हान न्यूजीलैंड में मस्जिदों पर हुए हमलों पर चिंता व्यक्त करती है, इल्हान मुस्लिमों के खिलाफ इस्लामोफोबिया की बात करती है, इलहान कहती है कि 9/11 के हमलों के बाद अमेरिका में मुस्लिमों के अधिकार ख़त्म होने लगे, इल्हान बात करती है कश्मीर पर, इल्हान आरोप लगाती है कश्मीर में मानवाधिकार खतरे में है, इल्हान आरोप लगाती है कश्मीर में धार्मिक स्वतंत्रता खतरे में है.

लेकिन इल्हान कभी बात नहीं करती इस्लामिक आतंकवाद पर, इल्हान कभी बात नहीं करती ISIS के आतंक पर, इल्हान बात नहीं करती सीरिया, ईराक,सोमालिया, सूडान जैसे मुस्लिम देशों में फैले अराजकता पर, इल्हान कभी बात नहीं करती बलूचिस्तान पर, इल्हान कभी बात नहीं करती पुलवामा अटैक पर, इल्हान कभी बात नहीं करती श्रीलंका अटैक पर. दरअसल इल्हान कभी उन मुद्दों पर बात नहीं करती जिन मुद्दों में इस्लाम खलनायक है. लेकिन जब इन खलनायकों के खिलाफ दुनिया कारवाई करती है तो इल्हान इस्लामोफोबिया की बात करती है.

इल्हान मूल रूप से सोमालिया की रहने वाली है. सोमालिया, अफ्रीका का एक विफल और अराजक देश है, जो भुखमरी और बदहाली के दौर से लम्बे समय से गुजर रहा है. दो दशक पहले इल्हान का परिवार सोमालिया से आकर अमेरिका में बस गया. जब इल्हान को अमेरिका की नागरिकता मिली तो उनकी उम्र 17 साल थी. नवंबर 2018 में हुए चुनावों में ही उनकी अमेरिकी कांग्रेस और राजनीति में उनका प्रवेश हुआ. उसपर आरोप लगा है कि अपने सगे भाई को अमेरिकी नागरिकता दिलाने के लिए उससे शादी कर ली.

एजेंडावादी लोगों का एजेंडा ज्यादा दिनों तक छुपा नहीं रह सकता. कई मौकों पर एल्हान का एजेंडा सामने आ गया. अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प इनके बारे में लिखते हैं, “बड़ा दिलचस्प है ये देखना कि ‘प्रग्रेसिव’ डेमोक्रेट कांग्रेसविमिन, जो कि ऐसे मुल्कों से यहां आईं जहां की सरकारें बिल्कुल बर्बाद हैं, बदतर हैं, सबसे भ्रष्ट हैं और जिनमें कुछ अच्छा नहीं है (अगर वहां कोई काम करने वाली सरकार है भी तो).”

“ये महिलाएं यहां आकर दुनिया के सबसे महान, सबसे ताकतवर देश अमेरिका से कहती हैं कि हमारी सरकार को कैसे काम करना चाहिए. वो वापस क्यों नहीं लौट जातीं? जिन बिल्कुल बर्बाद और अपराध से भरी जगहों से वो आई हैं, वहां जाकर चीजें ठीक करने में मदद करें. फिर अमेरिका लौटकर आएं और हमें दिखाएं कि देश कैसे ठीक किया जाता है.”

क्या गलत कहा ट्रम्प ने? वाकई में जिन देशों की अराजकता को ये पीछे छोड़ कर भाग आई वहां की स्थिति को सुधारने की बजाये उन्हें ज्ञान दे रही हैं जहाँ सैकड़ों सालों से लोकतंत्र है. जहाँ सबसे बड़ा लोकतंत्र है. वापस आते हैं इल्हान के कश्मीर वाले ट्वीट पर. इल्हान ने कश्मीर पर ट्वीट किया तो उन्हें जवाब भी मिला. इल्हान को जवाब दिया इंग्लिश जर्नलिस्ट केटी होपकिंस ने. केटी होपकिंस खुल कर राष्ट्रवाद की बात करती है. इसलिए द गार्जियन ने उन्हें राईट विंग की कमेंटेटर की उपाधि दी थी.

केटी ने इल्हान के कश्मीर वाले ट्वीट पर जवाब देते हुए लिखा, “सुनो इल्हान, कश्मीर में मोदी का बदलाव महिलाओं को समान अधिकार देता है, बाल विवाह पर रोक लगाता है, गैर मुस्लिमों के साथ भेदभाव ख़त्म करता है. इस्लामिक अतिवादियों ने 3 लाख हिन्दुओं का क़त्ल किया या उन्हें घर से भगा दिया। इसके बावजूद तुम परिवर्तन का विरोध करती हो और इन राक्षसों का पक्ष लेती हो.”

दरअसल इल्हान, मलाल युसुफजई की कैटेगरी की है. पाकिस्तान की मलाला, जिसे इस्लामिक कट्टरपंथियों की गोली खाने के बदले में नोबल प्राइज दिया गया था, वो कभी इस्लामिक कट्टरपंथ के बारे में मुंह नहीं खोल पाती, कभी ISIS के खिलाफ नहीं बोल पाती, कभी तालिबान के खिलाफ नहीं बोल पाती, उन्हें कभी बलूचिस्तान में मानवाधिकार का हनन नहीं दिखाई देता, कश्मीर में आतंक नहीं दिखाई देता लेकिन कश्मीर में उसे मानवाधिकार का हनन दिखाई दे जाता है.

मलाला और इल्हान जैसे ढोंगी प्रोग्रेसिव महिलाओं के मुंह से मानवाधिकार की बातें सिर्फ ढोंग और दिखावा है. दरअसल इनके लिए सबसे पहले इस्लाम है..