चीन के खिलाफ इन चार देशों ने बनाया गठबंधन, ब्रिटेन ने चीन को दे दी धमकी, कहा ‘अगर चीन ने…’

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चीन पूरी दुनिया में अलग थलग पड़ गया है. अंतरराष्ट्रीय मोर्चे से लेकर घरेलू मोर्चे तक परेशानियों से जूझ रहा चीन खुद अपनी हरकतों से अपने चारों तरफ खाई खोद रहा है. चीन ने हर देश को इतना परेशान कर दिया है कि पाकिस्तान के अलावा शायद ही कोई देश मौजूदा दौर में चीन के साथ खड़े होना पसंद करेगा. पाकिस्तान की तो मजबूरी है क्योंकि उसकी तो साँसे भी चीन की उधार दी हुई है. इधर लद्दाख में चीन भारत LAC पर सैनिक जमा कर युद्ध के लिए बेताब है. उधर चार देशों ने चीन के खिलाफ एक गठबंधन बना लिया है. इसकी वजह से हांगकांग की स्वायत्ता से छेड़छाड़ करने की चीन की मंशा.

गुरुवार को ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया ने संयुक्त रूप से बयान जारी करते हुए कहा, हांगकांग में चीन द्वारा लाया गया नया सुरक्षा क़ानून ब्रिटेन और चीन के बीच 1984 में हुए समझौते का उल्लंघन है और इससे उसकी आज़ादी को खतरा पैदा हो गया है. दरअसल 1997 में ‘एक देश, दो व्यवस्था’ के तहत ब्रिटेन ने चीन को हांगकांग सौंपा था तो हांगकांग को खुद के भी कुछ अधिकार मिले हैं. इसमें अलग न्यायपालिका और नागरिकों के लिए आजादी के अधिकार शामिल हैं. यह व्यवस्था 2047 तक के लिए है. लेकिन चीन ने हांगकांग को मिले विशेष अधिकारों को ख़त्म करने की कई बार कोशिश की. चीन ने कई बार हांगकांग पर अपने बनाए नियम और क़ानून थोपने की कोशिश की है और हर बार चीन की साजिशों के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन हुए हैं. इस बार फिर एक नए क़ानून के खिलाफ प्रदर्शनों का सिलसिला शुरू हो गया है.

चारों देशों ने संयुक्त बयान जारी कर चीन की आलोचना करते हुए कहा कि हांगकांग अपने स्वतंत अस्तित्व के साथ हमेशा से फलता फूलता रहा है. नए सुरक्षा क़ानून से हांगकांग के लोगों की स्वतंत्रता खतरे में पड़ जायेगी और हांगकांग की पूरी व्यवस्था तहस नहस हो जायेगी. इसी व्यवस्था ने हांगकांग को समृद्ध बनाया है. इसी समृद्धि को चीन हड़पना चाहता है. इस वक़्त हांगकांग की पहचान दुनिया के आर्थिक राजधानी के तौर पर है. ब्रिटेन ने तो चीन को धमकी देते हुए कहा कि अगर उसने हांगकांग को लेकर अपने कदम पीछे नहीं खींचे तो ब्रिटेन ब्रिटिश ओवरसीज पासपोर्ट होल्डर का दर्जा बदल देगा. इसके बाद हांगकांग में रह रहे ब्रिटिश पासपोर्ट होल्डर 6 महीने से ज्यादा वक़्त के लिए ब्रिटेन में रह सकेंगे और बाद में उन्हें नागरिकता भी दी जा सकेगी.