उत्तर प्रदेश में किसानों को मिला सौगात, गन्ने के दाम के साथ-साथ ब्याज भी मिलेगा

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उत्तर प्रदेश में गन्ने की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है. कई किसानों का गुजारा ही गन्ने की खेती से चलता है..लेकिन किसानों की बकाया मूल्य उत्तर प्रदेश के किसानों की एक बड़ी समस्या बनी हुई हैं. लेकिन लोकसभा चुनाव से पहले अब गन्ना किसानों से जुडी जो खबर सामने आ रही हैं किसानों के लिए किसी सौगात से कम नही है .. सालों से उनके गन्ने का दाम बकाया पड़ा हुआ है. उत्तर प्रदेश की पिछली सरकार में किसान बकाया मूल्य को लेकर काफी परेशान थे..लेकिन अब सरकार द्वारा हाईकोर्ट में दाखिल किये गये हलफनामें से ये जानकारी सामने आई है कि सरकार अब जिन किसानों का भुगतान नही किया गया है उन्हें ब्याज सहित सरकार भुगतान करेगी…
शुक्रवार को गन्ना आयुक्त की ओर से दाखिल हलफनामे में बताया गया कि सरकार घाटे वाली चीनी मिलों से सात प्रतिशत और फायदे वाली मिलों से 12 प्रतिशत की दर से ब्याज का भुगतान कराएगी। राज्य के किसानों के बकाए पर ब्याज करीब 2000 करोड़ रुपये है, जिसे सपा की अखिलेश सरकार ने माफ कर दिया था.

आपको बता दें कि बकाया राशि 2011 से चार वर्षों का है. सपा सरकार द्वारा माफ़ किये गये ब्याज माफी के खिलाफ राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के संयोजक वीएम सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी.. जिसमें कहा गया था कि किसान गन्ना बुआई को लेकर कर्ज लेता है.. लेकिन जब उन्हें समय पर भुगतान नही मिल पाता तो बैंक उन पर ब्याज लगा देते हैं. ऐसे में जब किसानों को गन्ने के भुगतान में देरी हो रही है तो किसानों को भी ब्याज जोड़कर भुगतान के समय दिया जाए… हालाँकि कोर्ट ने इस दलील को मंजूर करते हुए 2017 में सरकार को ब्याज देने का आदेश दिया लेकिन किसी कारणवश ये मामला अटका रहा.. इसके बाद एक बाद फिर वीएम सिंह ने हाईकोर्ट का रुख किया.. राज्य के गन्ना आयुक्त संजय आर भूसरेड्डी ने हलफ नामा देकर बकाया पर ब्याज देना स्वीकार कर लिया है. हलफनामे के अनुसार राज्य की जो चीनी मिलें फायदे में हैं, वे किसानों को बकाए पर 12 फीसदी का ब्याज तथा जो चीनी मिलें घाटे में चल रही है वे सात फीसदी ब्याज देंगी.


राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के संयोजक वीएम सिंह ने बताया कि इससे 42 लाख किसानों को फायदा मिलेगा… हालाँकि सरकार ने इसे स्वीकार करने में काफी समय लगा दिया इससे गन्ना किसानों को सबसे ज्यादा फायदा मिलने जा रहा है.. अगर गन्ना किसानों को मीलें समय पर भुगतान नही करेंगी तो उन्हें ब्याज देना पड़ेगा… इससे वे किसानों का भुगतान समय पर करेंगे..वीएम सिंह के मुताबिक राज्य के करीब 40 से 42 लाख किसान परिवारों का गन्ने का ब्याज बकाया है। अदालत ने साल 2011-12, 2012-13 और 2013-14 तथा 2014-15 के जिस बकाए पर ब्याज देने को कहा है वह रकम 2000 करोड़ रुपये से अधिक है।


हाईकोर्ट के इस फैसले से और उत्तर प्रदेश सरकार की स्वीकृति के बाद अब गन्ना किसानों के अच्छी खबर आई हैं. यहाँ आपको यह समझना चाहिए कि गन्ना किसान राजनीतिक तौर पर पार्टियों के लिए इतने महत्वपूर्ण होते हैं कि सरकारें किसानों के लिए अच्छा काम करने का वादा हर चुनाव में करती हैं.. कुछ ही सरकारें इन किसानों की भलाई काम कर पाती हैं. यहाँ एक बात और हम आपको बताना चाहते हैं कि उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ सालों में कई चीनी मिलें बंद हो गयी थी लेकिन प्रदेश में नई सरकार ने इन चीनी मीलों को खोलने का आदेश दे दिया है और इस पर काम बड़ी तेजी से चल रही हैं और कुछ मीलें चालु हो चुकी है.