एयर स्ट्राइक के बाद यूपी में बदल रहे हैं राजनीतिक समीकरण

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कांग्रेस को गठबंधन ने 9 सीटें ऑफर की हैं. इनमें से 2 सीटें अमेठी और रायबरेली हैं. यूपी में कांग्रेस के धीमे हुए प्रचार अभियान के पीछे एक वजह यह भी है.

भारत की फिजाओं में चुनावी बयार बह रहा है . जिसकी गिरफ्त में पूरा देश आ गया है . चुनाव हर लोकतान्त्रिक देश के लिए बहुत अहम होता है और उतना ही जरूरी राजनीतिक पार्टियों के लिए भी. देश की आवाम को हमेशा, एक अच्छे नेता की खोज होती है वहीं राजनीतिक पार्टियों को जीत की लालसा. इसलिए तो चुनाव से पहले गठबंधन-महागठबंधन बनाए जाते और मनमोहक घोषणा पत्र भी .

एयर स्ट्राइक बाद जहाँ  एक तरफ पुरे देश में संतोष और खुशी है वहीं दुसरी ओर  प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को एक कुशल शासक की तरह देखा जा रहा है .मसलन विपक्ष के दलों में खलबलाहट सी मच गई है . वह सारे हथकंडे अपना रहे 2019 के लोकसभा चुनाव को जीतने के लिए . विपक्ष की गतिविधियों से यह साफ़ झलक रहा है कि उनको 2019 के चुनाव में एक बार फिर सत्ता ना पाने का डर सता रहा है . इसलिए तो हम देख रहे है कि कैसे विपक्ष की पार्टियाँ गठबंधन और महागठबंधन का खेल, खेल रहीं है . दिल्ली में जहाँ “आप” और “कांग्रेस” की सरकार के गठबंधन की बात हो रही थी लेकिन ऐसा कुछ हो नहीं पाया  . वहीं उत्तर प्रदेश के महागठबंधन जिसमे “समयवादी पार्टी , बहुजन समज्वादी पार्टी और रास्ट्रीय लोक दल “ की खबरे पिछले दिनों से काफी चर्चे में है . कभी बुआ बबुआ का खेल देखने को मिलता तो कभी चाचा भतीजावाद चर्चे में रहता . तो कभी यह महागठबंधन सपा अध्यक्ष “मुलायम सिंह यादव को खलती है”.

उत्तर प्रदेश में सीटों के बटवारे तो हो गए थे जहाँ  38 सीटें बसपा के खेमे में आई थी वहीं 37 सीटों के लिए सपा लड़ने के लिए तैयार था . साथ ही 5 सीटों में से 3 सीटें रालोद को दी गई थीं . रायबरेली और अमेठी की सीटें कांग्रेस के लिए  राखी गई थी .

अब माहौल कुछ अलग सा लग रहा है . कांग्रेस और सपा-बसपा गठबंधन के बीच यूपी में गुप्तरूप से  बात हुई है. कांग्रेस को गठबंधन ने 9 सीटें ऑफर की हैं. इनमें से 2 सीटें अमेठी और रायबरेली हैं. यूपी में कांग्रेस के धीमे हुए प्रचार अभियान के पीछे एक वजह यह भी है.

प्रियंका गांधी 20 दिनों पहले लखनऊ गई थीं उसके बाद चुनाव प्रचार नहीं किया बस शहीद के परिवार से मिलने पश्चिमी उत्तर प्रदेश गई थीं. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी फिलहाल यूपी से दूर हैं.

एयर स्ट्राइक के बाद बदली परिस्थितियों में विपक्ष को एकजुट रखने की कोशिश के तहत नई प्रक्रिया शुरू की गई है. राष्ट्रीय स्तर के 2 बड़े नेताओं ने यूपी में विपक्ष को एकजुट रखने के लिए कांग्रेस और सपा-बसपा से बात की है .

बहरहाल यह देखना काफी रोचक होगा कि यह सभी उपाय क्या विपक्ष के लिए  मददगार होंगे 2019 लोकसभा चुनाव में जीतने के खातिर या फिर एक बार फिर उन्हें हार का सामना करना पड़ेगा.