जस्टिस अभय थिप्से के बारे में ये बातें जानते हैं आप?

सिटी जज और सेशन कोर्ट के जज रहने के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट से रिटायर्ड जज अभय थिप्से, कांग्रेस ज्वाइन कर चुके हैं. हर तरफ इस बात का शोर है. आपको लग रहा होगा कि इसमें इसमें बताने जैसा क्या है, और इतना शोर मचने जैसा क्या है? 2019 है, चुनाव का माहौल है, कोई उस पार्टी से इस पार्टी में आएगा, तो कोई इस पार्टी से उसमें. लेकिन जब शोर हुआ तो वज़ह भी जरूर ही होगी. हमने वज़ह जानने के लिए खुदाई शुरू की. इस खुदाई में हमें जो मिला वो हम आपके सामने लाए हैं.

source- mumbai live

1. हिट एंड रन मामले में सलमान को दी थी ज़मानत-

हिट & रन केस में सलमान खान को ज़मानत देने वाले जज थे अभय थिप्से. निचली अदालत ने सलमान ख़ान को 7 मई 2015 को सज़ा सुनाई. एक आम आदमी को जहाँ ज़मानत लेने में महीनों और सालों का वक्त लगता है, वहीं अजय थिप्से का बॉम्बे हाई कोर्ट से सलमान ख़ान को कुछ घंटों के भीतर आनन-फानन में बेल देना और जेल जाने से बचा लेना चौंकाने वाला मामला नहीं था क्या?

2. सोहराबुद्दीन मामले में न्यायपालिका पर उठाया था सवाल-

सोहराबुद्दीन मामले में कोर्ट के फैसले पर थिप्से ने न्यायपालिका पर ही सवाल उठाते हुए कहा था कि यह न्यायपालिका की विफलता है. जस्टिस सिस्टम फेल हुआ है… उन्होने आरोप लगाया था कि हाई-प्रोफाइल आरोपियों को बरी किया गया है, उन्होने गवाहों पर दबाव डाले जाने की बात भी कही थी, और कहा था कानून का पालन ठीक से नहीं किया गया है.

3. जस्टिस लोया की मौत पर जताया था संदेह-

अभय थिप्से ने मामले से जुड़े जस्टिस लोया कि मृत्यु पर भी सवाल उठाया था. जस्टिस लोया की मौत के बाद अभय थिप्से ने कहा था कि उनकी कॉल रिकार्ड्स की जाँच होनी चाहिए. इसके अलावा उन्होने मामले की सुनवाई कर रहे सीबीआई कोर्ट के जजों के तबादले पर भी सवाल उठाया था.

4. बैंड कम्युनिस्ट पार्टी मामले में दी थी ज़मानत-

आतंकवाद निरोधक दस्ते ने अप्रैल 2011 में सीपीआई का सदस्य होने के आरोप में, बैन्ड कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के चार कथित सदस्यों को गिरफ्तार किया था. ये सदस्य थे धवल धेंगेल, अनुराधा सोनुले, मयूरी भगत और सिद्धार्थ भोंसले. अभय थिप्से ने साल 2013 में उन्हें ज़मानत देते हुए कहा था कि नज़रिये की अभिव्यक्ति किसी व्यक्ति को माओवादी जैसे किसी आतंकी संगठन का सदस्य नहीं बनाती.

5. बेस्ट बेकरी मामले में बताया न्यायपालिका को विफल-

गुजरात का एक मामला था, बेस्ट बेकरी मामला. यह मामला गुजरात से मुंबई ट्रांसफर किया गया था. साल 2016 में इस मामले पर फैसला देने वाले जज थे अभय थिप्से. उन्होने 9 आरोपियों को दोषी बताया और 8 लोगों को बरी किया. इससे पहले अदालत मामले के सभी आरोपियों को बरी कर चुकी थी. बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस मामले को दुबारा खोला गया. उन्होने इस मामले पर न्यायपालिका को विफल बताया.

Source- Janta ka reporter

कुल मिलाकर अगर इनके फैसलों और आरोपों को ध्यान से देखा जाए, और अभय थिप्से के कांग्रेस से जुड़ जाने की बात पर सोचा जाए, तो देश की जनता को इन सारी बातों से राजनीति और न्यायपालिका के बीच पुराने रिश्तों के पतले तार जुड़े दिखाई दे रहे हैं शायद. अब इतने आरोप और विवाद लेकर जज साहब कांग्रेस से जुड़े हैं, भगवान जाने क्या होगा.

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