26 जनवरी से पहले हुई इन दोनों घटनाएँ वाकई आपको परेशान कर देंगी! पढ़िए पूरी रिपोर्ट

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जहाँ पूरा देश रिपब्लिक डे की तैयारी में जुटा हुआ है, चारो तरफ देशभक्ति के गाने सुनाई दे रहे हैं. स्कूलों में बच्चे देशभक्ति कार्यक्रम के लिए जोर शोर से तैयारी कर चुके हैं इसी बीच इसी देश में एक फरमान जारी होता है कि मदरसे में कोई भी ना तो वन्दे मातरम् होगी और ना ही भारत माता की जय का नारा लगेगा. इसी के साथ के तिरंगा यात्रा निकालने और वन्दे मातरम् गाने पर यूनिवर्सिटी की तरफ छात्रों की नोटिस जारी आकर दिया जाता है. आये हम आपको विस्तार से समझाते हैं.. पहला मामला देवबंद के उलेमा से जुड़ा हुआ है जो अक्सर विवादों में रहते हैं. इन्होंने फरमान जारी करते हुए कहा है कि इस्लाम में केवल अल्लाह की इबादत होती है ,क्यों कि जब भारत माता की जय बोलते है, तो भारत माता का चित्र आँखों के सामने आता है.. इसलिए भारत माता की जय इस्लाम के खिलाफ है… मुस्लिम लोगो को ये नारे नहीं लगाना चाहिए. ….ये फरमान जारी किया है मदरसा जामिया हुसैनिया के मुफ्ती तारिक कासमी ने….

दूसरा मामला तिरंगा यात्रा और वन्दे मातरम् को लेकर AMU से सामने आ रहा है. दरअसल कुछ छात्रों ने amu में तिरंगा यात्रा निकाली थी और वन्दे मातरम का गायन किया था जिसके बाद अब यूनिवर्सिटी की तरफ से नोटिस जारी दी गयी है जिसके बाद यह मामला सुर्ख़ियों में आ गया है.
यहाँ आपको यह भी जानना जरुरी है कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के प्रॉक्टर ने छह छात्रों को कारण बताओं नोटिस जारी किया है इन्ही छात्रों में ठाकुर अजय सिंह और सोनवीर शामिल हैं तिरंगा यात्रा का नेतृत्व अजय सिंह बीजेपी विधायक ठाकुर दलवीर सिंह के पोते हैं. जिनपर AMU द्वारा आरोप लगाए गये हैं कि उन्होंने बिना अनुमति के तिरंगा यात्रा निकाली… यूनिवर्सिटी इसके साथ ही कैंपस में शैक्षणिक माहौल को ख़राब करना, क्लास में पढ़ रहे छात्रों को बहका कर रैली में ले जाना, यात्रा में असामाजिक तत्वों का शामिल होना, AMU को बदनाम करना, और छात्रों के बीच भय का माहौल पैदा करना शामिल है.

इसी बीच छात्रों ने कहा कि देश के किसी भी हिस्से में तिरगा यात्रा निकालने और वन्दे मातरम् का नारा बोलने के लिए किसी से भी अनुमति लेने की जरुरत नही है. छात्रों ने यह भी कहा कि जब आतंकी बशीर वानी के भारतीय सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारे जाने के बाद छात्रों ने उसके समर्थन में आज़ादी वाले नारे लगाए, जब कैंपस में सामान्य वर्ग को आरक्षण देने सम्बन्धी बिल की कॉपी को जलाया गया। और जब जातिगत संघर्ष को बढ़ावा देने वाले सेमिनार आयोजित किए गए। तो कहाँ थे [प्रबंधक] प्रॉक्टर …..तब उन्होंने कोई एक्शन क्यों नही लिया. हालाँकि अजय ने पहले ही साफ़ कर दिया था कि ये कोई राजनीतिक रैली नही है. वही सोचने वाली बात तो यह वन्दे मातरम् गाने और तिरंगा यात्रा निकलना क्या अपराध हैं मदरसों में बच्चो के लिए इस तरह के फरमान जारी करना क्या सही है आखिर ये कौन सी मानसिकता है