सरकार की इस योजना ने मनवाया पूरी दुनिया मे लोहा,दूसरे नंबर पर आ गया देश

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चूल्हे से निकलते धुँए से घिरी महिलाएं बेबस थी, यूँ तो उनका इरादा खाना बनाकर अपने परिवार का पेट भरने का होता था लेकिन पलको से लगातार टपकते आँसू बार बार उसके पल्लू को आंखों की तरफ ले जाते थे।। उसकी वो अश्रुधारा किसी दुख सर की नही थी ये तो उसकी वो बेबसी थी जो अक्सर चूल्हे के धुँए के चलते बाहर निकलती रहती थी। ऐसा नही था कि वो इस ज़हरीले थम्बधुँए से निजात नही पाना चाहती थी,वो भी सकूं से खाना बनाना चाहती थी,अपने सेहत की फिक्र करना चाहती थी लेकिन हर बार पैसे की तंगी उसके रास्ते को रोक देती थी। आख़िर कर भी क्या सकती थी। कई तो ऐसी महिलाएं भी रही जो उम्र के ढलान पर आने से पहले ही बीमारी के चलते काल के गाल में समा गई।


सरकारों से ज़्यादा उम्मीद थी नही क्योकि उनके लिए तो सरकार का मतलब भी बस रोड बनवाने,खंबे लगवाने और कुछ नौकरी देने ही सीमित था। पर वो कहते है ना बुरे के बाद अच्छा वक्त भी आता है। साल  2014 में समय ने करवट ली और देश मे हुक्मरान बदल गया। पिछली सरकारों के ढीले रवैये के चलते उम्मीद इस सरकार भी ख़ास नही थी लेकिन शायद नई सरकार इस मुद्दे को लेकर काफी गम्भीर थी। शायद यही वजह थी कि उसने 1 मई 2016 को प्रधानमंत्री उज्ववला योजना नाम से एक स्कीम चलाकर गरीब महिलाओ को मुफ्त गैस कनेक्शन देने की शुरुआत कर दी। किसी और के आये या ना आये लेकिन लकड़ी और गोबर के उपलों से निकलने वाले धुँए से परेशान महिलाओ के वाकई अच्छे दिन आ चुके थे।
योजना शुरू करने के मौके पर केंद्र सरकार की तरफ से बयान जारी करते हुए कहा गया की महिलाओं को चूल्हे के धुँए से मुक्ति दिलाने के लिए इस योजना की शुरुआत की गई है।

मोदी सरकार की तरफ से मार्च 2019 तक 5 करोड़ परिवारों को इस योजना का लाभ देने की बात कही गई लेकिन तेज़ी का आलम देखिए कि तय समय से काफी पहले ही सरकार ने एक कदम आगे बढ़ाकर 6 करोड़ लोगों को इसका लाभ दे दिया यानी 1 करोड़ अतिरिक्त लोगों को भी लाभ मिल गया वो भी तय अवधि से भी कम समय मे।
सरकार की मेहनत का नतीजा ये रहा कि प्रत्येक परिवार को स्वच्छ रसोई गैस मुहैया कराने के मामले में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी उपभोक्ता बन गया है। भारत ने जापान जैसे विकसित देश को पछाड़कर ये उपलब्धि हासिल की। अब भारत से ऊपर सिर्फ चीन है। 

सरकार अब 2021 तक 8 करोड़ लोगों को इस योजना से जोड़ने की बात कह रही है। सरकारी आंकड़ों पर गौर करे तो 2014-15 में एलपीजी उपभोगताओं की कुल संख्या 14 करोड़ 8 लाख थी जो 2017-18 के सीजन में 22 करोड़ 4 लाख तक पहुँच गई। 
इसके कारण पर थोड़ा गौर करे तो इसकी दो वजह बड़ी साफ है।  एक तो देश की जनसँख्या लगातार बढ़ती गई, दूसरा गांवों में भी एलपीजी की पहुँच बढ़ गई जिसका रिजल्ट ये रहा कि कुछ ही सालो के भीतर इसमें औसतन 8.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और 2.25 करोड़ टन के साथ भारत दुनिया का सबसे बड़ा एलपीजी उपभोगता बन गया है।

कोई कुछ भी कहे लेकिन सब इस बात को बखूबी जानते है की उज्ज्वला योजना ने ना जाने कितने ही गरीब परिवारों के आंसुओं को पौछा है। आज गरीब महिलाएं धुँए से बीमार नही पड़ती, उनके पास टाइम की भी कोई कमी नही है। देर से ही सही लेकिन लोगो के घरों तक अब विकास पहुँच रहा है,गरीब लोगो के चेहरे खिले हुए है। आख़िर, देश की तरक्की में और चहिए भी क्या।