खतरे में थी उद्धव ठाकरे की कुर्सी, लेकिन इस तरकीब से अपनी कुर्सी बचा लेंगे उद्धव

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आज पूरा देश कोरोना जैसी महामारी से जूझ रहा है. जिसमे भारत भी है. लेकिन भारत में नरेन्द्र मोदी कि समझदारी और उनके द्वारा लिए गए फैसलों ने भारत के अंदर एक हद तक कोरोना को रोक लिया था. लेकिन कुछ जाहिल जमात के लोगों कोरोना को बहुत ज्यादा ही फैला दिया था. जिसकी वजह से आज देश के अंदर कोरोना के मरीज बढ़ गए हैं. वो जमाती के लोग अभी भी कुछ सुनने को तैयार नहीं है. महाराष्ट्र की स्तिथि ज्यादा खरब होती जा रही है कोरोना कि वजह से वह पर सबसे ज्यादा मरीज पाए गएँ है.

महाराष्ट्र में कोरोना के साथ साथ राजनीति भी गरमा रही है. उसका कारण है कि उद्धव ठाकरे जो मुख्यमंत्री बने है वो एनसीपी औज कांग्रेस कि मदद से सत्ता पर काबिज हुए है. उन्होंने विधायकी का चुनाव नहीं लड़ा था.तो अब उनको अब एमएलसी का चुनाव लड़ना था उसके बाद वो जीत के MLA बनते. क्योकि अगर कोई विधायक नहीं है और वो मंत्री या मुख्यमंत्री बनता है तो उसको 6 महीने के अंदर चुनाव जीत के विधयक बनना होता है.

कोरोना कि वजह से महाराष्ट्र के एमएलसी के चुनाव को टालना ही पड़ेगा क्योकि इस वक़्त कोरोना अपने चरम पर चल रहा है. चुनाव टलने के बाद अब मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को महाराष्ट्र के राज्यपाल कोटे से एमएलसी बनाया जाएगा. महाराष्ट्र कैबिनेट में इसको लेकर प्रस्ताव पास हो गया है. राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से अनुरोध किया गया है. बता दें उद्धव की सीएम पद की कुर्सी पर संकट के बादल मंडरा रहे थे. हालांकि अब बादल छंटते नजर आ रहे हैं.जब उनको राज्यपाल कोटे से भेजा जायेगा.

आपको बता दें कि महाराष्ट्र में राज्यपाल द्वारा मनोनीत होने वाली विधान परिषद की दो सीटें अभी  खाली हैं. जिसको देखते हुए एक सीट पर उद्धव ठाकरे को नामित करने के लिए सिफारिश भेजी गई है. अगर राज्यपाल सहमत हो जाते हैं तो उद्धव ठाकरे अपनी कुर्सी बचाए रखने में सफल हो सकते हैं.

अगर ऐसा नहीं हुआ तो फिर उद्धव ठाकरे के लिए भी मुश्किल कि घडी है क्योकि चुनाव हो नहीं सकते और फिर उद्धव ठाकरे सदन में विधायक बनकर कैसे जायेंगे. देखने वाली बात ये है कि एक तो कोरोना जैसी महामारी से भी उद्धव को अपने प्रदेश के लोगों कि रक्षा करनी है और उसी के साथ अपनी मुख्यमंत्री कि कुर्सी को भी बचाना है.