चलती ट्रेन में सेना की दो महिला अफसरों ने करवाई डिलीवरी, जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ

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भारतीय सेना की हम अक्सर अपने समाज के और देश के प्रति उनके द्वारा निभाए गए दायित्वों के लिए खूब प्रशंशा करते हैं, और हो भी क्यों ना भारतीय सेना हमेशा देश की सीमाओं को सुरक्षित रखने के साथ साथ समाज में अपनी मजबूत मौजूदगी भी दर्शाती है हमारी सेना के जवानों के लिए भारत और भारतीयों की सेवा सदैव सर्वोपरि है और वो अपने कर्त्तव्यों को लेकर सदैव बेहद सजग दिखते हैं.

हम यहाँ भारतीय सेना की तारीफ इसलिए भी कर रहे हैं क्यूंकि हाल ही में ऐसा ही एक उदाहरण अमृतसर से हावड़ा तक जाने वाली हावड़ा एक्सप्रेस में उस वक्त सभी को देखने को मिला, दरअसल पंजाब स्थित सेना की 15 डिवीजन में तैनात गुरदासपुर के सैन्य अस्पताल टिबरी कैंट में आर्मी डॉक्टर के तौर पर पदस्थ की दो महिला कैप्टन ललिता हंस और कैप्टन अमनदीप कौर ने चलती ट्रेन में ही एक आपात स्थिति के समय एक बेहद बड़ा खतरा उठाया और एक 21 वर्षीय महिला (कोमल) की डिलीवरी करवाई. स्थिति किस कदर गंभीर थी, इसका अंदाजा वहां मौजूद यात्रियों को हो रहा था क्योंकि उस समय ट्रेन को चैन पुलिंग के जरिये बीच में कहीं रोकना और उस प्रसव पीडिता महिला को तुरंत अस्पताल पहुंचाना संभव दिखाई नहीं दे रहा था.


ट्रेन में सवार यात्रियों और दोनों आर्मी महिला अफसरों की मानें तो महिला और उसके गर्भ में बच्चे दोनों की ही जान आफत में फंसी हुई थी. जब हालात बिगड़ने लगे तो ऐसे में सेना की दोनों नर्सिंग अफसर कैप्टन ललिता और अमनदीप ने बड़ा कदम उठाते हुए रिस्क लेने के फैसला किया और अपनी सूझबूझ से चलती ट्रेन में ही उसकी (कोमल ) की डिलीवरी करवाने का बड़ा निर्णय किया, उनकी हिम्मत और जानकारी की बदौलत उन दोनों ने सामान्य डिलीवरी करवाने में कामयाबी हासिल की और मां कोमल और उसकी नवजात बेटी की जान को भी बचा लिया.

जब उस महिला की सफल और सामान्य डिलीवरी हो गई तो ये देखकर वहां मौजूद सभी यात्री भी दोनों महिला कैप्टन अफसरों की इस मदद से बेहद उत्साहित हो गये और उन लोगों ने तालियों की गूंज के बीच ‘इंडियन आर्मी जिंदाबाद’ के नारे भी जमकर लगाये.. वहीँ दूसरी तरफ प्रसव पीड़िता इन हालात में बेटी के जन्म के बाद भावुक हो गयी और उसने दोनों अफसरों को धन्यवाद दिया.


डिलीवरी के लिए जरुरी कोई समान नहीं था मौजूद
दरअसल दोनों महिला अफसर हावड़ा एक्सप्रेस से लखनऊ आर्मी के बेसिक नर्सिंग आफिसर्स कोर्स में शामिल होने जा रही थीं, बुकिंग में उनको ट्रेन की बोगी नंबर बी-वन मिली जिसमें वो सवार थीं और इसी बोगी में सवार थी 21 वर्षीय गर्भवती कोमल, जो कि अपने परिवार के संग में थी. 27 दिसंबर की रात जब उस महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हुई उस वक्त ट्रेन नजीबाबाद और मुरादाबाद के बीच में चल रही थी और समय था सुबह 3 बजकर 50 मिनट.. एक बार उसको डिलीवरी पेन शुरू हुआ तो फिर उसकी हालात ख़राब होने लगी और उसकी लगातार हो रहे दर्द की वजह से स्थिति काफी बिगड़ती ही जा रही थी जिस पर तुरंत डिलीवरी कराया जाना बेहद जरुरी हो गया था.

इस दौरान दोनों महिला अफसरों ये जिम्मेदारी अपने ऊपर ली और इस मोर्चे पर भी डटकर कमान संभाली, दोनों ने चलती ट्रेन में ही यात्रियों से फौरन ही शेविंग ब्लेड, धागे, और हॉट वॉटर बोटल से गरम पानी का इंतजाम करने का अनुरोध किया. यात्रियों को उन दोनों की काबिलियत पर भरोसा था जिसकी वजह से यात्रियों ने भी अपना दायित्व सही ढंग से समझा और हड़कंप न मचाकर दोनों महिला अधिकारीयों की जरूरत के हिसाब से काम करना शुरू कर दिया और अंत में सही ढंग से डिलीवरी को पूरा किया गया.