पाकिस्तान में दो हिन्दू नाबालिग बहनों के अपहरण के बाद उनकी शादी और जबरन इस्लाम कबूलने का मामला आया सामने

पाकिस्तान के सिंध प्रांत में दो नाबालिग हिन्दू बहनों का अपहरण कर जबरन उन्हें इस्लाम स्वीकार करवाने और फिर उनकी शादी कराने का मामला सामने आया है. लड़कियों का नाम रवीना और रीना है. इस मामले में लड़कियों के पिता का एक वीडियो भी सामने आया है. वीडियो में रवीना और रीना के पिता को रोते हुए देखा जा सकता है. वीडियो में लड़कियों का पिता पुलिस के आगे विरोध कर रहा है. वे कह रहा है कि मुझे गोली मार दो मुझे गोली मार दो लेकिन में विरोध करता रहूँगा. इसके साथ लड़कियों के भाई चमन लाल ने भी इस बात कि पुष्टि की है कि लड़कियों का होली के दिन ही अपहरण कर लिया गया था.

सामने आया वीडियो बहुत ही दर्दनाक है. बच्चियों का पिता रो रहा है मदद की भीख मांग रहा है लेकिन पाकिस्तान प्रशासन पर उसका कोई असर नहीं हो रहा है. इतना ही नहीं इस घटना से लड़कियों कि माँ को बहुत दुःख और धक्का लगा जिसकी वजह से उनकी माँ मौत हो गयी. होली के पहले इस हिन्दू परिवार ने सोचा नहीं होगा कि सिर्फ हिन्दू होने कि वजह से इनकी ज़िन्दगी में इतना बड़ा भूचाल आने वाला है.

एक वीडियो में मौलवी कह रहा है कि लड़कियों ने खुद इस्लाम कबूल किया है और अब हमारा ये कर्त्तव्य है कि हम इनके साथ खड़े रहे. साथ ही मौलवी कहता है कि इन लड़कियों का बाप झूठा प्रोपगंडा कर रहा है. एक और सामने आई वीडियो में मौलवी इन बच्चियों का निकाह करता दिख रहा है. सबसे पहले लड़कियों का अपहरण कर लिया गया उसके बाद दबाव में उनको इस मौलवी के साथ बिठा दिया गया. मौलवी इतना बेशरम है कि वो चाइल्ड मैरिज को प्रेस के आगे ही सही ठहरा रहा है. पाकिस्तान में ऐसा होना बहुत आम है. लगता है पाकिस्तान दुनिया के लोगों कि समझ को भी अपने जैसा ही समझ रहा है. ऐसा इसीलिए क्योंकि लड़कियां अभी नाबालिग है और हर देश में नाबालिग बच्चे माँ और बाप कि ही ज़िम्मेदारी होते हैं.

इस घटना की वजह से हिंदू समुदाय ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई किए जाने की मांग की. उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को उनका अल्पसंख्यकों के प्रति आश्वासन याद दिलाया. कराची से हिन्दू सेवा वेलफेयर ट्रस्ट के अध्यक्ष संजय धंजा ने बताया कि इन दो बहनों का अपहरण करके इनकी शादी करा दी गयी और जिसके बाद इन्हें ज़बरदस्ती इस्लाम कबूल करवा दिया गया. हिन्दू समुदाय के सड़क पर उतरने के बाद भी इस मामले में सिर्फ एक FIR ही हो सकी है.

आपको बता दें हाल ही में इमरान खान ने ट्वीट कर कहा था, ‘जैसा कि भारत में हो रहा है उससे उलट नया पाकिस्तान है और हम यह सुनिश्चित करेंगे कि हमारे अल्पसंख्यकों को समान नागरिक माना जाए.’

लेकिन इस घटना के बाद पाकिस्तान के बुद्धिजीवियों ने इमरान खान के ऊपर सीधा निशाना साधा है. गवर्नमेंट पोस्ट ग्रैजुएट कॉलेज में राजनीति विज्ञान कि सहायक प्रोफेसर अंजुम जेम्स पॉल ने इमरान खान से फेसबुक पोस्ट के ज़रिये पूछा कि अब कौन रीना, रवीना, सदफ खान और ईसाई नाबालिग लड़कियों के लिए खड़ा होगा? जिनका अपहरण करके उनके माता-पिता से छीनकर फरवरी और मार्च में धर्मांतरण करवा दिया गया’. आगे सहायक प्रोफेसर ने भी कहा कि , ‘नए पाकिस्तान में भी परिस्थितियां वैसी ही हैं और धार्मिक अल्पसंख्यक भेदभाव और उत्पीड़न से पीड़ित हैं.

इस मामले के सामने आते ही विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इंडियन हाई कमिश्नर से इस मामले से जुड़ी एक रिपोर्ट भी मांगी है. 1947 में पाकिस्तान में हिन्दू जनसँख्या 24% थी लेकिन आज ये घट के 1% से भी कम रह गयी है. इन हिन्दुओं कि गलती बस इतनी थी कि ये 1947 में पार्टीशन के वक्त पाकिस्तान क्रॉस करके Hindustan नहीं आ सके.

यही वजह है जिसके लिए वर्तमान केंद्र सरकार सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल लेकर आई है. इस बिल के अंदर पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आये हिन्दू, सिख, जैन, ईसाई धर्म के लोग जिन्हें पाकिस्तान में प्रताड़ित किया जा रहा है उन्हें भारत कि नागरिकता हासिल करने में आसानी होगी.  लेकिन विपक्ष इस बिल का पूरी ताकत से विरोध कर रहा है. अब समय आ चुका है कि भारत कि तमाम पार्टी के नेता पाकिस्तान में रह रहे इन अल्पसंख्यकों के दर्द को समझे और माँ भारती के इन बच्चों को अपनाएं.

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