आखिरकार मोदी सरकार ने राज्यसभा में ऐतिहासिक तीन तलाक बिल पास कराया

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मुस्लिम महिलाओं को तीन तलक से मुक्ति दिलाने वाल ऐतिहासिक बिल आज राज्यसभा में भी पास हो गया . लोकसभा में ये बिल पहले ही पास हो चूका था . जेडीयू, पीडीपी, बसपा, जेडीयू, AIADMK, टीआरएस जैसी बड़ी पार्टियों ने वोटिंग का बहिष्कार करते हुए सदन से वाकआउट किया जिसके कारण सरकार को बिल पास कराने में आसानी हुई . बिल पर वोटिंग से पहले इसे स्टैंडिंग कमिटी में भेजने के लिए वोटिंग हुई लेकिन वो 100 के मुकाबले 84 वोटों से गिर गई .

सरकार इससे पहले भी कई बार तीन तलाक बिल पास करवाने की कोशिश कर चुकी है लेकिन हर बार लोकसभा में पास हो जाने के बाद ये बिल राज्यसभा में गिर जाता था .लेकिन दोबारा सत्ता में वापस आने के बाद मोदी सरकार ने इस बिल को पास करवाने के लिए पूरा जोर लगा दिया था . सरकार की कोशिशें रंग लाइ और आखिरकार बिल पास हो गया .

इससे पहले आज राज्यसभा में काफी गरमा गरम बहस हुई. जब सरकार की तरफ से ये तर्क रखा गया कि कई मुस्लिम देशों में भी मौखिक रूप से तीन तलक देने पर प्रतिबन्ध है तो इस बिल के खिलाफ में तर्क रखते हुए कांग्रेस नेता गुलाम नबी आज़ाद ने कहा कि कई मुस्लिम देशों में तो गला काटने की भी सजा है, क्या सरकार ऐसा बिल भी लाएगी? गुलाम नबी आज़ाद ने कहा कि हमारा मुल्क किसी मुस्लिम मुल्क का मोहताज नहीं है और न ही किसी मुस्लिम के कहने से चलता है. देश के मुस्लिमों को देश पर गौरव है और हजारों सालों के साथ मिलकर रहते हैं. न हम मुस्लिम देशों की नकल करते हैं और न उनकी सोच रखते हैं. नहीं . आजाद ने कहा कि क्या सुप्रीम कोर्ट के कहने पर जब तीन तलाक खत्म हो गया तो आप किसी बात की सजा दे रहे हैं. तीन तलाक कहने पर कुछ हुआ ही नहीं तो सजा किस बात की. 

एनसीपी सांसद माजिद मेमन ने बिल का विरोध करते हुए कहा कि आप किसी को बगैर अपराध के 3 साल की सजा देने जा रहे हैं, तलाक कहना कोई अपराध नहीं है. जेल में जाने के बाद भी शादी खत्म नहीं होगा और महिला को गुजारा भत्ता के लिए मजिस्ट्रेट के पास जाना होगा. जेल में रह रहा पति कैसे पत्नी को भत्ता दे पाएगा . ये घरों को तोड़ने वाला बिल है .