‘मिशन शक्ति’ को लेकर सबसे ज्यादा गूगल किये हैं ये सवाल, यहां जानिए उनके जवाब

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भारत ने अंतरिक्ष की दुनिया में एक बहुत बड़ी उपलब्धि हासिल की है..प्रधानमंत्री मोदी ने दोपहर बुधवार करीब साढ़े बारह बजे देश को संबोधित करते हुए कहा था, कि भारत ने कुछ ही देर पहले अंतरिक्ष में एक सैटेलाइट को मार गिराया है. भारत ऐसा करने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया है..इस परीक्षण के बाद भारत ने एक बार फिर दुनिया में अपना लोहा मनवाया है.. इस मिशन के दौरान भारत ने अर्थ ऑरबिट यानी LEO में मौजूद एक सैटेलाइट को मार गिराया है. क्या होता है लो अर्थ ऑर्बिट (LEO)लो अर्थ ऑर्बिट धरती के सबसे पास वाली कक्षा होती है। यह धरती से 2000 किमी ऊपर होती है। धरती की इस कक्षा में ज्यादातर टेलीकम्युनिकेशन सेटेलाइट्स को रखा जाता है। PM मोदी के संबोधन के बाद लोगों के मन में काफी सवाल उठ रहे होंगे इस मिशन को लेकर सभी के मन में कुछ सवाल उठ रहे होंगे. इसे में इस मिशन को लेकर हमने गूगल पर सबसे ज्यादा सर्च किये गए सवालों की एक लिस्ट बनाई है, जिनके जवाब हम आपके लिए लेकर आए हैं.


सबसे पहले सवाल क्या है मिशन शक्ति ?

भारत का मिशन शक्ति अंतरिक्ष में देश की संपदा और कीर्तिमान को सुरक्षित रखना है। भारत ने इस शक्ति को पाने के लिए खूब मेहनत की। कई विशेषज्ञों ने पहले भी यह संभावना जताई थी कि भारत के पास अंतरिक्ष में मार करने की क्षमता है। लेकिन, उस समय आधिकारिक रूप से इसकी पुष्टि नहीं की गई थी। यह डीआरडीओ का एक तकनीकी मिशन था. परीक्षण के दौरान जिस मिसाइल को निशाना बनाया गया, वे भारत के उन सैटेलाइट में से है, जो पृथ्‍वी की निचली कक्षा में मौजूद है. यह परीक्षण पूरी तरह से सफल रहा और डीआरडीओ ने अपने सभी तय गोल्स को हासिल किया


अब दूसरा सवाल कौन सा सैटलाइट किया गया इस्तेमाल?
इस मिशन में पूरी तरह से भारत में तैयार की गयी ऐंटी-सैटलाइट मिसाइल का इस्तेमाल किया गया था । इसमें डीआरडीओ के बलिस्टिक मिसाइल डिफेंस इंटरसेप्टर का इस्तेमाल किया गया था।


तीसरा सवाल है क्या पूरी तरह से देसी यानि अपने देश में बनी टेकनिक्स को ही इस्तेमाल किया गया है
भारत ने इस मिशन को पूरी तरह अपने देश में बनी टेकनिक्स के जरिए अंजाम दिया। ऐंटी सैटलाइट मिसाइल भी देश में ही बनाई गये थी।

4 सवाल क्या इस परीक्षण से स्पेस से कोई मलबा धरती पे गिरेगा?इस परीक्षण से पैदा हुआ मलबा आने वाले कुछ सप्ताह में धरती पर गिरेगा, यह आसमान में नहीं फैलेगा। ना तो इससे इनवॉरमेंट को कोई नुकसान नहीं होगा। यहाँ तक अरुण जेटली ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ कर दिया था,तीन हफ्ते में यह मलबा खुद साफ हो जाएगा।


यह परीक्षण अब क्‍यों किया गया?
भारत को इस परीक्षण की सफलता पर पूरा भरोसा था. इसलिए इसे अंजाम दिया गया.वैसे भारत लंबे समय से स्पेस में सफलताएं हासिल कर रहा है। बीते 5 सालों में यह रफ्तार और तेज हुई है। मंगलयान मिशन की सफल लॉन्चिंग हुई है। इसके बाद सरकार ने गगनयान मिशन को भी मंजूरी दी है। भारत ने इस मिशन को 2014 में शुरू किया था.

क्या यह परीक्षण किसी देश के खिलाफ है?
DRDO के वैज्ञानिकों का यह परीक्षण किसी देश के खिलाफ नहीं है, भारत बस अंतरिक्ष में अपनी क्षमताओं का विस्‍तार कर रहा है

पोखरण में हुए परमाणु परीक्षण के मिशन का नाम ‘ऑपरेशन शक्ति’ था..दोनों ऑपरेशन में क्या है समानता?

इस ऑपरेशन का नाम ‘मिशन शक्ति’ है, जबकि पोखरण में हुए परमाणु परीक्षण के मिशन का नाम ‘ऑपरेशन शक्ति’ था.

तब भी ये मिशन पूरी तरह चुपचाप किया गया था और तब तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इसकी घोषणा की थी. और आज pm मोदी ने खुद देश को संबोधित करते हुए इसकी घोषणा की.

भारत इंदिरा गांधी के जमाने में ही परमाणु शक्ति के तौर पर उभरा था, लेकिन उसके बाद किसी सरकार ने दोबारा परमाणु परीक्षण नहीं किया था. लेकिन तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने दुनिया के विरोध को पीछे छोड़ ये देश हित में अहम फैसला किया था .

-अंतरिक्ष में हुए मिशन शक्ति में भी ऐसा ही हुआ है, इसे पूरा करने में भारत 2012 में ही सक्षम था, लेकिन तब से अब तक कोई निर्णय नहीं हुआ था, लेकिन अब जाकर मिशन पूरा हुआ है…ये हमारे देश के लिए एक बहुत बड़े गर्व ली बात है.
तो ये थे सबसे चर्चित सवाल मिशन शक्ति से जुड़े जिनके जवाव अब आपको मिल गये है..