निर्भया के आरोपियों को कभी भी हो सकती है फां’सी मगर तिहाड़ जे’ल के पास जल्ला’द ही नहीं

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हाल ही में हैदराबाद में एक महिला डॉक्टर के साथ जिस तरह से ब’र्बरता की गयी उसकी कहानी हर किसी की जुबान पर है. और हो भी क्यूँ न, अपराधियों ने अपनी मानसिक कुंठाओं की तृप्ति के लिए जिस अमानवीय ढंग से रे’प और ह’त्या की घटना को अंजाम दिया वो दिल द’हला देने वाली है.

ऐसा ही कुछ दिल्ली में कुछ साल पहले निर्भया के साथ हुआ था.वो निर्भया जिसके साथ मानवता को शर्मशार करने वाले हर घिनोने तरीके से रे’प किया गया, हैदराबाद वाले इस केस और निर्भया वाले केस में बहुत सी चीजें मिलती हैं जैसे कि रात, नाबालिग रेपि’स्ट्स और राष्ट्रीय स्तर पर मीडिया कवरेज. हम निर्भया वाले केस की यहाँ तुलना यूँही नहीं कर रहे हैं बल्कि उस केस की बात हम इसलिए कर रहे हैं क्यूंकि निर्भया मामले में एक बड़ा अपडेट आया है. दरअसल निर्भया के आरोपियों को फाँ’सी दी जानी है जो कि तिहाड़ जेल में बंद हैं.लेकिन इन आरोपियों को फां’सी दिए जाने से पहले जेल प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती आ खड़ी हुई है. जेल प्रशासन की मानें तो अभी फां’सी देने के लिए उनके पास कोई जल्लाद मौजूद नहीं है. ऐसे में उनको डर है कहीं तय समय तक इन्तजाम न होने पर समस्या पैदा न हो जाये.

तिहाड़ जेल के मुताबिक जेल प्रशासन द्वारा फां’सी देने के लिए जरुरी कुछ दस्तावेजों को तैयार करने पर काम किया जा रहा है, हो सकता है अगले महीले में फां’सी की तारीख भी मुकर्रर हो जाये. दोषियों के कोर्ट से ब्लैक वारेंट जारी होने का इन्तजार किया जा रहा है जिसके बाद उनको फां’सी पर चढाने के आखिरी चरण की तैयारी को पूरा किया जायेगा. इस बात की सम्भावना कम है कि राष्ट्रपति के पास जो आरोपियों की दया याचिका पड़ी है वो स्वीकार की जाएगी. दया याचिका ख़ारिज होते ही वारेंट जारी करके फां’सी दे दी जाएगी..

गौरतलब है कि हमारे देश में फां’सी की सजा बहुत ही जघन्य अपराधों के लिए दी जाती है इसलिए जल्लाद को स्थाई तौर पर नौकरी नहीं दी जा सकती है क्यूंकि ऐसे केस बहुत कम आते हैं जिनमें फां’सी दी जाये. इससे पहले तिहाड़ में आखिरी बार संसद में बम ब्ला’स्ट के दोषी आतंकी अफजल गुरु को फां’सी दी गयी थी, उस वक्त भी जल्लाद की कमी से जेल प्रशाशन को दो चार होना पड़ा था. लेकिन उस समय जेल के ही एक कर्मचारी ने फंदे को खींचने के लिए हामी भरी थी जिसके पश्चात अफजल को फां’सी पर लटकाया गया था. जेल प्रशासन की मानें तो इस बार भी वो किसी जल्लाद को स्थाई तौर पर लाने के बारे में नहीं सोच रहे हैं, बल्कि कॉन्ट्रैक्ट पर जल्लाद को बुलाकर ये काम कराया जायेगा. इसके लिए प्रशासन आस पास के गाँव में जल्लादों की तलाश कर रहा है जहाँ से पहले भी जल्लाद को कॉन्ट्रैक्ट पर बुलाया जा चुका हो. जल्लाद की कमी से जूझ रहे प्रशासन ने और भी जेलों से जल्लाद मुहैया कराये जाने की अपील की है..लेकिन प्रशासन की चिंता इसलिए बढ़ रही है क्यूंकि आजकल किसी को फंदे पर लटकाने के इस काम के लिए कोई जल्दी से तैयार नहीं होना चाहता है..