भारत में हो रहे लोकसभा चुनाव पर इन देशों की है पैनी नजर, जानिये कौन-कौन से देश हैं शामिल?

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लोकसभा चुनाव की हलचल पर पूरे देश की नजर हैं. कौन किस पार्टी में जा रहा है, कौन किस पार्टी में आ रहा है. किसको किस पार्टी से तिक्त मिल रहा है कौन किस सीट से लड़ रहा है इस तरह के तमाम तरह की खबरों पर लोगों की नजर बनी हुई है… लेकिन यहाँ हम आपको यह भी बताना चाहते हैं कि भारत के इस लोकसभा चुनाव पर कई अन्य देशों की नजर बनी हुई है. इसके पीछे भी बड़ी वजह है क्योंकि भारत एक उभरता हुआ बड़ा बाजार है. जिसको अपनी तरफ करने में कोई देश पीछे नहीं रहना चाहता है। बहरहाल, सबसे पहले हम उन देशों की बात कर लेते हैं जिनकी विशेष निगाह भारत के चुनाव पर लगी है और क्‍यों?


सबसे पहले नंबर पर है पाकिस्तान


यूँ तो सभी पडोसी देशों की नजरें भारत के चुनाव पर हैं लेकिन इसमें पाकिस्तान प्रमुख रूप से शामिल है. पुलवामा में आतंकी हमला और फिर पाकिस्तान पर किए गये भारत के एयर स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान और भारत के रिश्ते में बेहद कडवाहट आ गयी है. भारत पाकिस्तान के बीच व्यापार भी होता था. इस दौरान कॉटन, ऑर्गेनिक केमिकल, प्‍लास्टिक की चीजें, डाई, रंगाई के सामाना, तेल, न्‍यूक्लियर रिएक्‍टर, बॉयलर से जुडे सामान, मशीन, फल, दालें, मेडिकल प्‍लांट्स, चीनी, कॉफी, चाय, रबड़ आदि का व्‍यापार हुआ था लेकिन पाकिस्‍तान को भारत ने पुलवामा हमले से पहले तक मोस्‍ट फेवर्ड नेशन का दर्जा दिया हुआ था। इसके तहत उसको कई तरह की रियायतें दी जाती थीं। अब आने वाले समय किसकी सरकार बनेगी और फिर नई नीतियाँ बनाई जायेंगी. पाकिस्‍तान की निगाह इस वजह से भी भारत के चुनाव पर लगी है क्‍योंकि भारत ने बीते पांच वर्षों में पाकिस्‍तान की हर गलती का मुंहतोड़ जवाब दिया है। चाहे उरी हमले के बाद सर्जिकल स्‍ट्राइक हो या फिर बालाकोट में एयर स्‍ट्राइक या फिर पाकिस्‍तान की चौकियों को तबाह करने की बात, हर बार भारत ने पाकिस्‍तान को करारा जवाब दिया है. मोदी सरकार की जवाबी कार्रवाई से पाकिस्तान को तगड़ा प्रभाव पड़ा है इसलिए पाकिस्तान की निगाहें मोदी सरकार के दोबारा सत्ता में वापसी को लेकर टिकी हुई है.


दुसरे नंबर पर चीन
भारत का पडोसी देश चीन, दोनों के साथ कई विवाद जुड़े हुए हैं. भारत और चीन के बीच करीब 4056 किमी की सीमा एक दूसरे से मिलती है. अक्साई चीन पर चीन ने कब्जा किया है. अरुणाचल प्रदेश को चीन अपना हिस्सा बताता आ रहा है. डोकलाम का विवाद मोदी सरकार के दौरान एक बार फिर सामने आया था और उसपर दोनों देश की सेनाएं आमने सामने आ गयी थी. यह विवाद करीब दो माह से भी अधिक समय तक चला था. इसी के साथ चीन इस बात को भी जानता है कि भारत उभरता हुआ एक बड़ा व्यापार है. चीन भारत में अपना व्यापार फैला भी रहा है इस बात को हम अपनी अपनी मार्केट में आसानी से देख सकते हैं. इसी के साथ आपको यह भी जानना जरूरी है कि भारत पकिस्तान और चीन के साथ किसी प्रकार के सैन्य सौदे को लेकर व्यापार नही करता. वहीँ चीन पाकिस्तान को लडाकू विमान समेत पनडुब्बी तक दे चूका है. भारत आतंकवाद के खिलाफ आवाज उठाता है तो चीन अडंगा अटकाता रहा है.. अभी हाल ही में हुए मसूद अजहर के मुद्दे पर भी यह बात सामने आई थी. वर्ल्‍ड बैंक भारत को पहले ही उभरती हुई अर्थव्‍यवस्‍था करार दे चुका है. चीन अपने ही पड़ोस में बढ़ रहे इतने बढे व्यापार से खुद को दूर नही रखना चाहता यही वजह है की चीन की नजर भारत के चुनाव पर लगी हुई है.


अमेरिका
बीते पांच वर्षों की बात करें तो अमेरिका और भारत के बीच काफी नजदीकी आई है. दोनों देशों ने न सिर्फ रणनीतिक क्षेत्र में बल्कि दूसरे क्षेत्रों में भी अपनी साझेदारी बखूबी निभाई है। हाल ही में अमेरिका ने भारत को चार चिनूक हेलीकॉप्‍टर भी सौंपे हैं। इसके अलावा कई दूसरे डिफेंस से जुड़े समझौते जमीनी हकीकत बनने वाले हैं. वहीँ अमेरिका पहले पाकिस्तान का भी करीबी रहा है लेकिन अब ऐसा नही है. चीन के साथ भी अमेरिका का 36 का आंकडा है. कई मुद्दो पर चीन और अमेरिका एक दुसरे के विरोधी हैं लेकिन भारत उसका सबसे नया दोस्त… हालाँकि भारत और अमेरिका के बीच कुछ विवाद भी है लेकिन अमेरिका के लिए भी भारत का बाजार काफी मायने रखता है। अपने सामान को खपाने के लिए इस बाजार की उसको भी उतनी ही जरूरत है जितनी चीन को। यही वजह है कि उसकी निगाहें भारत में होने वाले आम चुनावों पर लगी है.
दरअसल चुनाव के बाद नई सरकार बनेगी, नई सरकार की नीति, दिशा और

दशा कैसी होगी? इन सब बातों को लेकर भारत के इस लोकसभा चुनाव पर तीनों देशों की नजरें टिकी हुई हैं. वैसे पिछले पांच वर्षों के दौरान भारत ने कई देशों के साथ अपने गहरे सम्बन्ध स्थापित किए हैं. यही वजह है कि इस बार के चुनाव पर कई देशों की नजरें टिकी हुई है.