शहीदों के परिवार वालों की मदद के लिए भिखारी महिला से मिले लाखो रूपये! हैरान कर देने वाली कहानी

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कोई जवान सीमा पर गोलीबारी या आतंकी हमले में शहीद हो जाता है तो परिवार को गर्व होता है, देश को नाज होता है, लोगों में सम्मान होता है.. लेकिन जब कोई आतंकवादी हमारे सैनिकों पर धोखे से हमला करता है तो देश उबल उठता है, पूरे देश से आवाज उठती हैं.. दुशमन को खत्म करो, आतंकियों को बर्बाद करो…
हाल ही में हुए पुलवामा हमले के बाद देश का लगभग यही हाल था… लोगों की आंखे नम थी, दिल भरा हुआ था लेकिन उतना ही आक्रोश था, उतना ही गुस्सा था… दुश्मनों के खात्मे की आवाज पूरे देश से उठी..
वहीँ देशवासियों ने शहीद के परिजनों तक अपनी मदद पहुँचाने के लिए अपनी तिजोरी खोल दी है. लोगो ने अलग अलग एप्प के जरिये सेना के घर तक अपनी मदद पहुंचाई है लेकिन इन दिनों चर्चा में एक बूढी अम्मा हैं जिनकी मृत्यु हो गयी है. उनकी पूरी सम्पत्ति सेना में शहीद जवानों को सौंप दी गयी है. आइये हम आपको पूरा मामला समझाते हैं.
दरअसल अजमेर में मंदिर के बाहर बैठकर भीख मांगने वाली देवकी शर्मा ने शायद ही कभी सोचा हो कि उनकी लाखो की सम्पत्ति शहीदों के परिजनों के काम आयेंगी.. मगर यह पुण्य उसके भाग्य में लिखा था और हाल ही में उसकी मौत के बाद उसके द्वारा जोड़ी गई यह राशि शहीद फंड में पहुंच गई…


बजरंगगढ़ चौराहे के मंदिर के बाहर भीख मागने वाली देवकी शर्मा के सामने समस्या आ गयी कि वे अपने बचे हुए पैसों को कहाँ जमा करें.. एक बार कुछ लोगों ने उनके इकट्ठे किये हुए पैसों को छीन लिए उसके बाद रोती हुई ये महिला मंदिर का संचालन करने वाली जय अंबे नव युवक सेवा समिति के सचिव संदीप गौड़ के पास पहुंची… जहाँ इस समिति के लोगों ने देवकी का खाता खुलवा दिया… ये खाता संदीप के नाम से ही खोला गया क्योंकि भीख मांगने वाली महिला देवकी शर्मा के पास कोई पहचान पत्र नही था..


कुछ दिन पहले ही देवकी शर्मा का निधन हो गया… अब समिति के सामने समस्या थी कि देवकी शर्मा द्वारा पांच लाख रुपए और देवकी के बिस्तर से मिले लाखों रूपये का क्या किया जाए. देवकी की इच्छा थी की इस राशि का उपयोग अच्छे कार्य के लिए किया जाए… इसी बीच पुलवामा में आतंकी हमला हुआ जिसमें कई जवान शहीद हो गये.. इसके बाद सभी ने इस राशि को शहीद परिवार को दिए जाने पर सहमति जताई। बुधवार को बैंक से 6 लाख 61 हजार 605 रुपए का ड्राफ्ट बनाकर जिला कलेक्टर को शहीद परिवार के लिए सौंप दिया गया.


जहां एक तरफ लोग शहीदों के खिलाफ बोल कर लोगों को भड़का रहे हैं.. शहीदों के परिवार तक मदद पहुंचाने की खिलाफत कर रहे हैं… उनके मुंह पर एक करारा तमाचा है. जहाँ एक भीख मांगने वाली महिला की पूरी सम्पत्ति को समिति ने दान देने का फैसला किया वहीँ देश के कुछ जाने माने और अमीर लोग शहीदों को कह रहे हैं कि वे तो शहीद होने के लिए ही थे..


शहीद होने वाले जवान के परिजन अपने घर का लाडले के शहीद होने पर गौरव महसूस करते हैं..वे किसी ने मदद की भीख नही मांगते लेकिन ये हमारा कर्तव्य हैं कि अगर कोई जवान शहीद होता है तो हम अपनी क्षमता के अनुसार उनतक मदद पहुंचाए… इसके लिए सरकार और कुछ समाजसेवी द्वारा कई एप्प बनायें गये हैं जिसका इस्तेमला कर इस बार लाखों लोगों ने शहीदों तक अपनी मदद पहुंचाई हैं.