वोट डालते टाइम नाखूनों पर लगाई जाने वाली स्याही में इस्तेमाल होता है सुअर का खून ?

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आजकल सोशल मीडिया पर एक मैसेज बड़ा वायरल है। जिसमे कहा जा रहा है कि आम चुनावों में वोट डालने के बाद नाख़ून पर लगाएं जाने वाली स्याही सूवर के खून से बनी होती हैं। फ़ेसबुक और व्हाट्सप्प पर दौड़ रहें इस मैसेज को मुस्लिम धर्म के लोग जमकर शेयर कर रहें हैं।

चूंकि, चुनाव एकदम सिर पर है और ये वायरल मैसेज चुनाव को प्रभावित कर सकता था इसलिए the chaupal ने ये जिम्मेदारी उठाई कि इस दावे की सच्चाई से आपको रूबरू कराया जाए.हमने इंटरनेट की मदद से जानकारी जुटानी शुरू और उसमें क्या कुछ निकला आइए आपको बताते हैं।

जब हम इंटरनेट पर स्याही की जानकारी जुटा रहें थे तो हमे पता लगा की ये स्याही पूरे भारत में सिर्फ दो कंपनियां बनाती है और वो दो कंपनियां है हैदराबाद की रायडू लैब्स और मैसूर की मैसूर पेंट्स एंड वार्निश लिमिटेड। हमारे देश की यही दोनों कंपनियाँ पूरे देश  और विदेश में वोटिंग के लिए इंक सप्लाई करने का काम करती हैं। आगे बढ़े उससे पहले आप ये जान लीजिए कि आम चुनाव के दौरान मतदान करके जब मतदाता बाहर आता है तो उसकी उंगली पर एक खास तरह की स्याही लगाई जाती है। दरअसल इस स्याही का इस्तेमाल इसलिए किया जाता है ताकि कोई मतदाता दो बार वोट ना डाल सके।

इंटरनेट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक जब इन स्याही को बनाया जाता है तो इन कंपनियों के परिसर में स्टाफ और अधिकारियों को छोड़कर किसी को भी जाने की परमिशन नहीं होती है। 

वोटिंग में इस्तेमाल होने वाली इंक में सूवर का खून नही बल्कि सिल्वर नाइट्रेट होता है जो अल्ट्रावॉइलट लाइट पड़ने पर स्किन पर ऐसा निशान छोड़ता है, जो मिटता नहीं है। । इसलिए इसे उंगली से आसानी से साफ नहीं किया जा सकता। इसको बनाने वाली दोनो कंपनियाँ 25 से 30 हज़ार बोतलें हर दिन बनाती हैं और इन्हें 10 बोतलों के पैक में रखा जाता है। दिलचस्प बात ये होती है कि इनकी एक्सपायरी 90 डेट दिन के बाद की होती है। यानी साफ है की चुनाव के टाइम यूज होने वाली इंक में सूवर का खून नही है और ये सिर्फ एक झूठी अफवाह है।

असल में चुनाव एकदम नजदीक है और ऐसे में कुछ लोग नही चाहते कि सभी चीज़े शांति से निपट जाए इसलिए मुस्लिम लोगो को भावनाओ को भड़काने के लिए इस तरह के झूठ का सहारा लिया जा रहा है। आने वाले दिनों में ये घटनाएं बढ़ेगी इसलिए आपको थोड़ा सचेत रहने की ज़रूरत है।