जानिए क्या हासिल किया पीएम मोदी ने अमेरिकी दौरे से ?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक हफ्ते तक अमेरिका के दौरे पर थे. United Nations General Assembly में अपने भाषण में उन्होंने ना सिर्फ आतंकवाद के खिलाफ एकजुटत होने की बात की बल्कि क्लाइमेट चेंज जैसे जरूरी मुद्दे को उठाया.

PM मोदी ने ‘हाउडी मोदी’ इवेंट से न सिर्फ दुनिया को भारत की ताकत से रूबरू करवाया बल्कि कश्मीर पर पाकिस्तान जो हाए तौबा मचा रहा था उस नौटंकी को भी बेनकाब किया, उन्होंने अपने भाषण में सीधे तौर पर पाकिस्तान को आतंकवाद का गढ़ बताया, उनका साथ देते हुए डोनाल्ड ट्रम्प ने भी आतंकवाद और बॉर्डर सुरक्षा जैसे मुद्दों पर PM मोदी का पूरा साथ दिया.

आइए देखते हैं Diplomatic तौर पर कितना सफल रहा है…PM का ये दौरा. आतंकवाद पर पाकिस्तान को कर दिया ज़लील. PM मोदी जहाँ world peace और development की बात करते हैं वही इमरान खान ने अपने भाषण में 12 बार मोदी जी का नाम लिया 25 बार कश्मीर का नाम लिया 11 बार RSS का नाम लिया, जहाँ एक के भाषण में दुनिया के सबसे ताकतवर लोगों की शैली नज़र आती है तो दुसरे के में सिर्फ ‘डर’ नज़र आता है. डरना भी ज़रूरी है खास तौर से उस देश के लिए जिस देश ने आतंकवाद का पनाहगाह है.

प्रधानमंत्री मोदी ने HOUSTON में कहा में कहा था की हमे ये नहीं भूलना चाहिए कि 26/11 और 9/11 हमले को अंजाम देने वाले कहां से आए थे? अमेरिका ने तो पाकिस्तान को साफ़ साफ़ किया कि अगर नई दिल्ली से बात चीत चाहते हैं तो आतंक को खत्म करना होगा और हाफिज सईद जैसे आतंकियों पर एक्शन लेना होगा.

पाकिस्तान ने कश्मीर मुद्दे को COMMUNAL तड़का देते हुए, मुस्लिम कार्ड खेलने की कोशिश की, दुनिया भर के मुसलमानों से अपील की कि भारत के खिलाफ उनका साथ दे. लेकिन इनके सरे हत्कंडे बेअसर रह गए, बौखलाया इमरान बिचारे UN में अपने हाथ मलते रह गए. भारत ने अपनी Diplomatic Strategy पाकिस्तान को ऐसा घेरा की इनका ‘मुस्लिम वर्ल्ड’ वाला Masterstroke भी बेअसर रहा. अमेरिका ने भी पाकिस्तान से पुचा की चाइना में मुसलमानों पर हो रहे जुल्मों पर कुछ क्यूँ नहीं बोलते?

इतना ही नहीं PM मोदी ने दुनिया के सबसे सभा में जा कर घर में उठे मसले को भी सुलझाने की कोशिश की, यहाँ भाषा के नाम पर छिड़े विवाद पर इशारों इशारों में UNGA में 3000 साल पुराने तमिल कवि कनियन पुंगुदरनार के शब्दों का ज़िक्र किया ‘याधुम ऊरे यावरुम केलिर.’ यानी की हम सभी जगहों के लिए अपनापन रखते हैं.

देश से दूर यहाँ पर अपनत्व के भाव को जिंदा रखना ही अपनत्व का भाव है. ‘हाउडी मोदी’ इवेंट में पीएम ने अपने भाषण की शुरुआत में करीब 10 भाषाओं में यह बताया कि ‘भारत में सब अच्छा है’. वह भी भाषा विवाद को खत्म करने की ही एक कोशिश थी.गृह मंत्री अमित शाह के एक बयान के बाद उठे भाषायी विवाद को खत्म करते हुए उन्होंने अपना रुख साफ़ कर दिया की उनके लिए सभी भारतीय भाषाओँ का एक बराबर महत्त्व है. जो भी दक्षिण भारत की पार्टियों हिंदी को थोपने की कोशिश का आरोप लगा रहीं थीं उन्होंने UN में दिए  मोदी जी के भाषण को सुनना चाहिए.