काशी में मोदी सरकार ने मंदिर तो तुड़वाए लेकिन इसके पीछे की वजह भी आप जान लीजिये

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काशी की एक खबर को लेकर आपको गुमराह किया जा रहा है. आपकी आस्था को चोट पहुंचाने वाले लोगों ने फायदे के लिए आपके सामने झूठी ख़बरें परोस रहे हैं.

काशी में मोदी ने काशी विश्वनाथ मंदिर के लिए कई परियोजनाओं का उदघाटन किया… पीएम मोदी ने काशी विश्वनाथ मदिर के लिए बन रहे कोरिडोर का शिलान्यास किया और इस सबके बाद भाषण भी दिया..लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के भाषण और काशी विश्वनाथ मदिर के आसपास बन रहे कोरिडोर को लेकर लोगों के बीच गुमराह करने वाली खबरें फैलाई जा रही हैं… कहा जा रहा है मोदी ने अपनी इस योजना से बनारस की मूल पहचान गलियों को नष्ट किया जा रहा है और कोरिडोर बनाने के लिए घरों के अंदर मौजूद मन्दिर को सरकार ने तुडवा दिया है.. कहा तो यह भी जा रहा है कि मोदी सरकार ने काशी में इतने मंदिर तुडवा दी है जितने कभी औरंगजेब ने भी नही तुड़वाया था…

  सोशल मीडिया पर कुछ लोग और अपने टीवी प्रोग्राम के जरिये कुछ बुद्धिजीवी पत्रकार वारणसी में हो रहे बदलाव को लेकर काफी चिंता वयक्त कर रहे हैं…. उनके लेख के हिसाब से वारणसी पहुँचाने वाले श्रद्धालु इन गलियों और घरों में छुपे मंदिरों के दर्शन करने पहुँचते थे..नाकि काशी विश्वनाथ मंडिर के… अगर आप काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन करने एक बार भी गये होंगे तो यह आप जानते ही होंगे कि मंदिर तक पहुँचने के लिए आपको कस तरह की गलियों से होकर गुजरना पड़ता था… गलियों में फैली गंदगी से श्रद्धालुओं को परेशान होना पड़ता था.. अगर कोई आपात जैसी स्थिति हो जाती तो यहाँ मदद कैसे पहुँचती… इस बात का अंदाजा पार लगा सकते हैं अगर आप काशी विश्वनाथ मंदिर गये हैं.


 सोशल मीडिया के जरिय अब तक मोदी सरकार से सवाल किया जा रहा था कि आप काशी को क्वेटा कब बनायेंगे! लेकिन जब मोदी सरकार काशी के सबसे प्रमुख मन्दिर काशी विश्वनाथ को गलियों के जकड़न से बाहर निकालने का प्रयास कर रही है.. वो भी ऐसे में जब कोई भी राजनीतिक दल इसका विरोध नही कर रहा है… स्थानीय लोग ख़ुशी ख़ुशी अपना घर छोड़ने को तैयार हो गये हैं…   तब कुछ लोगों को इन गलियों को तोड़ने पर आपत्ति है.. इन घरों में मिले मंदिरों को हटाने पर आपत्ति है… अफवाह फैला रहे हैं कि मोदी सरकार मन्दिरों को तोड़ रही है… जबकि सच्चाई यह है कि मोदी ने खुद अपने भाषण में कहा कि इन घरों से कई प्राचीन मंदिर मिले हैं.. इन मंदिरों को लोगों ने किचन बना दिया था… मंदिरों को घरों के अंदर छुपा दिया था.. इन मंदिरों को बाहर निकाला जाएगा और पूरा कोरिडोर बनाये जाने के बाद बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने के लिए आने वाले श्रद्धालु भी इन प्रचीन मंदिरों के दर्शन कर पायेंगे! इसके सालों से रह रहे लोगों ने अपने घर को छोड़ दिया, कुछ लोगों ने विरोध किया लेकिन बाद में वे भी मान गये. सरकार की ये बड़ी सफलता है लगभग 300 परिवार को इतने कम समय में स्थानांतरित किया गया हो.

अब आइये हम आपको बताते हैं कि आखिर कैसे बन रहा है काशी विश्वनाथ कोरिडोर?

इसे प्रधानमंत्री मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट कहा जाता है.. मतलब मोदी जी इसे बड़े दिल से बनवाना चाहते हैं. यह कॉरिडोर काशी विश्वनाथ मंदिर, मणिकर्णिका घाट और ललिता घाट के बीच 25,000 स्क्वेयर वर्ग मीटर में बन रहा है. इसके तहत फूड स्ट्रीट, रिवर फ्रंट समेत बनारस की तंग सड़कों के चौड़ीकरण का काम भी चल रहा है. इस प्रोजेक्ट के पूरे होने के बाद आप गंगा किनारे होकर 50 फीट सड़क से बाबा विश्वनाथ मंदिर जा सकेंगे. इसके अलावा यहां आपको बेहतर स्ट्रीट लाइट्स, साफ़-सुथरी सड़कें, पीने के पानी का इंतजाम मिलेगा. इसके अलावा काशी के प्राचीन मंदिरों को संरक्षित किया जाएगा. अभी यहां घनी अाबादी क्षेत्र है और भवनों की खरीदकर आगे का काम तेजी से चल रहा है. काशी एक घनी बस्ती है… मंदिरों की घरों की.. घरों में मंदिर हैं और मंदिरों में भी लोग रहते हैं. गलियां इतनी है कि एक बार घुस जाए तो वापस निकलना मुश्किल…

अब अगर कोई विकास कार्य इस क्षेत्र में किया जाएगा तो कुछ घरों, मंदिरों और भवनों को नुकसान जरूर होगा.. लेकिन जिस तरह से सोशल मीडिया पर यह खबर फैलायी जा रही है कि मोदी ने काशी में मंदिरों की तुडवा दिया… यह खबर बिलकुल गलत हैं. अगर घर में छूपे किसी मंदिर को उचित स्थान पर स्थापित किया जा रहा है तो इसमें गलत क्या है? काशी सुधर रहा है. काशी संवर रहा है. काशी में कई बदलाव आ चुके हैं.. जैसे कि सड़कें चौड़ी हुई.. हाईवे बनाये गये… घाटों को सौंदर्यीकरण किया गया और सफाई पर विशेष ध्यान दिया गया.. काशी क्वेटा बन सकता है लेकिन आपका सहयोग भी चाहिए…काशी विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र के विकास वर्ष 1780, 1853 के बाद 2019 में हो रहा है. प्रधानमंत्री मोदी ने इसका बीड़ा उठाया है तो अब भ्रामक खबरें फैलाई जा रही है. हमें सावधान रहना चाहिए.