कश्मीर में आतंकियों ने किया 10 साल के बच्चे का क़त्ल

323

जम्मू-कश्मीर में पिछले 36 घंटे के दौरान चार अलग-अलग मुठभेड़ों में आठ आतंकियों को मार गिराया इसमें बांदीपुरा के हाजिन में दो, शोपियां में दो, कलांतर में दो व सोपोर में दो आतंकी शामिल हैं. बांदीपोरा के हाजीन क्षेत्र में हुए एनकाउंटर के दौरान आतंकियों ने 10 साल के एक बच्चे को अपने कब्जे में ले लिया था, जिसे बाद में उन लोगों ने मार डाला

इस बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें 10 साल के आतिफ मीर के परिजन और स्थानीय लोग आतंकियों से उसे छोड़ने की गुहार लगा रहे हैं. लेकिन गुहार का आतंकियों पर कोई असर नहीं पड़ा और आतंकियों ने उस बच्चे का बेरहमी से कत्ल कर दिया. 24 घंटे तक एनकाउंटर के बाद आज सुरक्षा बलों की ओर से घटनास्थल पर की गई तलाशी के बाद 2 आतंकियों के साथ इस बच्चे का शव भी मिला.

लश्कर के ये दो आतंकी अली भाई और हुजैफ पिछले 5-6 सालों से घाटी में आतंकी गतिविधियों में सक्रिय थे. अली भाई के बारे में कहा जा रहा है कि वह पाकिस्तान से आया था. हैरानी करने वाली बात तो ये है कि इन आतंकियों ने इसी परिवार में शरण ले रखी थी. कल शाम को यहां पर एनकाउंटर शुरू हुआ जिसमें 2 लोग फंस गए थे, लेकिन रात में एक बुजुर्ग को वहां से निकाल लिया गया. हालांकि 10 साल का बच्चा नहीं निकल सका और आतंकियों की गिरफ्त में आ गया. इसके बाद बच्चे के दादा-दादी के अलावा माता-पिता और अन्य परिजनों की ओर से लगातार गुहार लगाते रहे, लेकिन आतंकियों ने बच्चे को मार दिया.

मासूम आतिफ मीर के पिता ने आतंकियों से गुहार लगाते हुए कहा, ‘यह कोई जिहाद नहीं है यह जहलत है. अगर तुम मेहरबानी करके इन को छोड़ दोगे फिर तुम जिहाद करो वो दूसरी बात है. मगर इनको नबी के सदके छोड़ दो यह ठीक नहीं है. तुम हम को भी मुसीबत में डाल रहे हो और खुद को भी. मेहरबानी करके नबी के सदके इनको छोड़ दो. इसी तरह आतिफ मीर कि माँ ने भी इन आतंकियों से गुहार लगाई लेकिन इसका भी कोई फायदा नहीं हुआ. अल्लाह का हवाला देने के बाद भी आतंकियों ने बच्चे को नहीं छोड़ा.

सबसे पहले इन आतंकियों ने इस घर कि बच्ची के साथ भी बदसलूकी की थी लेकिन किसी तरह से वो उनके शिकंजे से बच निकली.

इस बर्बरता के बाद ट्विटर पर भी काफी प्रतिक्रिया सामने आ रही हैं. इब्न सिना नाम कि यूजर ने लिखा कि इस घटना के बाद भी सब शांत क्यों हैं? सड़कों पर विरोध क्यों नहीं हो रहा? वहीं मेजर गौरव आर्या लिखते हैं कि इस घटना से पाकिस्तान के जिहाद का पता चलता है. आगे वे लिखते हैं कि उन्हें इंतज़ार रहेगा कि कब हुर्रियत बंद का ऐलान करते हैं.

इन ट्वीट से ये बात समझी जा सकती है कि हुर्रियत अलगावादी नेता अपने ऊपर हुई कार्रवाई या सुरक्षा बालों द्वारा किसी आतंकवादी को मार गिराने के बाद बंद का ऐलान कर देते हैं. लेकिन इस बार उन्होंने ऐसा क्यों नहीं किया एक तरफ तो वो कश्मीर के लोगों कि दुहाई देते हैं तो जब आज कश्मीर के लोगों के साथ ऐसा किया जा रहा है तब वे क्यों बंद का ऐलान नहीं कर रहे.

साथ ही सवाल उन पत्रकारों से भी किए जा रहे हैं जो आतंकवादियों को भटके हुए नौजवान बता के उनको indirectly सपोर्ट करते हैं. कुछ पत्रकार पूरे समाज को जिम्मेदार ठहरा देते हैं अगर कोई कश्मीरी आतंकवादी संगठन ज्वाइन कर ले तो. आतंकवाद आतंकवाद होता है. इसे हम किसी भी हाल में सही नहीं ठहरा सकते. कश्मीर में ऐसे भी युवा हैं जो भारत को अपना देश समझ कर भारत के विकास में योगदान देते हैं. लेकिन ऐसे नौजवानों को ये आतंकवादी अपना निशाना बना लेते हैं. लेफ्टिनेंट उमर फ़याज़ भी एक ऐसा ही नौजवान था जिसकी हत्या उसके बचपन के दोस्तों ने जो कि आतंकी बन गए थे, उन्होंने कर दी थी.

आपको बताते चले कि ये कश्मीर में आतंकवाद पाकिस्तान के समर्थन से ही पनप रहा है. और ये आतंकवादी कश्मीर के लिए सिर्फ एक धब्बा हैं. इस घटना के बाद घाटी के कश्मीरियों की आँखे खुल जानी चाहिए और ऐसे आतंकवादियों को उन्हें शरण देना भी बंद कर देना चाहिए.

वीडियो