आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का अंत अब नजदीक

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CRPF का काफिला जा रहा है.. 2500 से भी ज्यादा सुरक्षाबल एक साथ हैं.. सब बहुत खुश हैं कि घर से आये हैं… अगली छुट्टी तक के लिए ढेर सारी यादें समेटकर.. और आँखें नम भी हैं कि अब पता नहीं कितने दिन बाद मिलना होगा.. सब अपनी अपनी इतने दिनों की यादों को बांटते हुए चले जा रहे हैं… कोई गा रहा है.. कोई तस्वीरों में खोया है.. एक दुसरे के आंसुओं के पोंछते और फिर उन्हें गुदगुदाते ये सारे जवान निकल रहे हैं अगली तैनाती के लिए… और तभी एकाएक एक धमाका होता है.. और पल भर में यह जवान मांस के चीथड़ों में बदल जाते हैं.. दोनों तरफ से फायरिंग शुरू हो जाती है

इस धमाके में देश के 40 जवान शहीद हो जाते हैं..

पूरा देश सन्न रह जाता है… और फिर एक वीडियो आती है.. जिसमें आतंकी संगठन जैश – ऐ- मोहम्मद इस हमले की ज़िम्मेदारी लेता है..

जैश ए मोहम्मद दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकी संगठनों में से एक है जिसका एकमात्र उद्देश्य है कश्मीर को भारत से अलग करना..

इस आतंकी संगठन का सरगना हैं मसूद अजहर

मसूद अजहर पहले आतंकी संगठन लश्कर – ए- तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन के साथ काम करता था लेकिन रिहाई के बाद इसने अपना संगठन बनाया जैश ए मोहम्मद.. इसी संगठन में एक आतंकी था हिजबुल कमांडर बुरहान वानी जो कश्मीर घाटी का पोस्टर बॉय बन चुका था.. 8 जुलाई 2016 को सुरक्षाबलों ने बुरहान वानी को मार गिराया था.. बुरहान 15 साल का था जब वो आतंकी दुनिया में आया था और 22 साल की उम्र में वो एनकाउंटर में मारा गया.. जैश ए मोहम्मद का मकसद है घाटी में हज़ारों बुरहान वानी तैयार करना.

सन 1994 में मसूद अजहर दो आतंकी संगठनों हरकत उल जिहाद इस्लामी और हरकत उल मुजाहिदीन के बीच सुलह करवाने आया था तब श्री नगर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था, उसके बाद साल 1995 में जम्मू कश्मीर से 6 tourists को आतंकियों द्वारा किडनैप कर लिया गया जिनकी रिहाई के बदले में मसूद अजहर की रिहाई मांगी गई.. हालाँकि मसूद की रिहाई हुई नहीं क्यूंकि उन 6 tourists में से एक भागने में कामयाब रहा.. एक को मारा हुआ पाया गया और बाकि चारों का कुछ पता नहीं चला

चार साल बाद दिसम्बर 1999 में नेपाल से नई दिल्ली आ रहे इंडियन एयरलाइन्स के प्लेन को आतंकवादियों द्वारा हाईजैक कर लिया गया और प्लेन को अफगानिस्तान में लैंड कराया गया… और फिर से वही हुआ.. प्लेन यात्रियों की रिहाई के बदले तीन आतंकियों की रिहाई की मांग की गई.. जिसमें से एक था मसूद अजहर.. और प्लेन को हाईजैक करने वाले थे मसूद के भाई.. उस वक़्त इंडियन गवर्नमेंट ने मसूद की रिहाई कर दी थी और यात्रियों को सकुशल छुड़ा लिया.. इसके बाद मसूद और उसके भाई जिन्होंने प्लेन हाईजैकिंग की थी पाकिस्तान चले गए.. हालाँकि उस वक़्त पाकिस्तान ने कहा कि हम इन आतंकियों को गिरफ्तार कर लेंगे पर आदत से मजबूर पाकिस्तान हमेशा से ही पाकिस्तानियों को संरक्षण देता आया है.. और इस बार भी यही हुआ.. पाकिस्तान ने यह बोलकर के मसूद ने हमारे यहाँ कुछ कोई घटना नहीं कि इसलिए हम इन्हें गिरफ्तार नहीं करेंगे.. पाकिस्तान से वैसे भी आप किसी तरह के समर्थन की उम्मीद नहीं कर सकते.

रिहाई के बाद मसूद ने कराची में 10000 लोगों को संबोधित करते हुए कहा था कि “मैं इसलिए वापस आया हूँ ताकि आपको यह समझा सकूं कि मुस्लिमों को तब तक शांत नहीं बैठना चाहिए जब तक हम हिन्दुस्तान को बर्बाद ना कर दें और कश्मीर को उनसे अलग ना करा दें”

और इसी के बाद स्थापना हुई आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद की.. जिसके बाद दिसम्बर 2001 में भारतीय संसद में मसूद अजहर ने आत्मघाती हमला कराया.

नवम्बर 2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमले में भी मसूद अजहर का नाम सामने आया था

फरवरी 2002 में मसूद ने एक अमेरिकी पत्रकार डेनियल पर्ल को गर्दन काटकर मार दिया

2016 में पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन पर हुए आतंकी हमला भी मसूद अजहर ने करवाया था जिसमें 5 आतंकियों के साथ 7 जवानों की भी मौत हो गई थी

कश्मीर घाटी में 4000 से भी ज्यादा आतंकी थे.. लेकिन पिछले कुछ सालों में सेना के लगातार हुए हमलों में घाटी के ज्यादातर आतंकी ख़त्म हो गये हैं बस कुछ 200-250 के आस पास आतंकवादी हैं.. इन्ही हमलों में मसूद अजहर के अधिकतर रिश्तेदार मारे गए हैं और यह भी एक बड़ी वजह है जिससे मसूद बौखलाया हुआ है.

आज पूरा देश पुलवामा में हुए आतंकी हमले में शहीद सैनिकों का बदला चाहता है जिसका मोर्चा खुद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने अपने हाथों में ले लिया है.. मिशन मसूद अजहर को पूरा करने के लिए अब भारत अमेरिका, रूस, इजराइल, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस समेत सभी ताकतवर देशों के साथ मिलकर पाकिस्तान पर मसूद के खिलाफ कार्यवाही के लिए दबाव बनाने की योजना बना रहा है.. और अजीत डोभाल जी के बारे में कहा जाता है कि उनके हाथों में आने वाला कोई भी काम पूरा होकर ही रहता है.. उम्मीद है जल्द ही पुलवामा हमले में शहीद हुए सैनिकों का बदला हम आतंकवादियों की मौत से लेंगे.