आखिर क्यों रद्द हुआ तेज बहादुर यादव का नामांकन, ये रही वजह

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तेज बहादुर यादव.. नाम तो सुना होगा बीएसएफ के जवान थे.. अनुशासन हीनता के चलते निलंबित कर दिए गये.. अब ये चुनाव लड़ने की तैयारी में थे.. मामला ठीक ठाक चल रहा था.. नामांकन दाखिल हो चूका था.. लेकिन अहम् मौके पर सपा ने उन्हें अपना सिम्बल दे दिया जबकि सपा की तरफ से शालिनी यादव पहले ही अपना नामांकन दाखिल कर चुकी थी… इसके बावजूद सपा ने तेज बहादुर को भी अपना उम्मीदवार बना दिया… लेकिन शालिनी यादव जो सपा की पहले से ही उम्मीद्वार थी उन्होंने अपना नामंकन वापस नहीं लिया.. इसके बाद सपा में ही बवाल मच सकता है ऐसी उम्मीदें लगाई जा रही थी .. लेकिन ऐसा हुआ नहीं… हुआ ये हैं कि तेज बहादुर यादव का ही नामांकन रद्द कर दिया गया. निर्वाचन अधिकारी द्वारा जारी किए गए नोटिसों का जवाब देने के लिए बुधवार दोपहर 11 बजे तेज बहादुर यादव अपने वकील के साथ अधिकारों से मिलने पहुंचे। इसके कुछ देर बाद निर्वाचन अधिकारी ने तेज बहादुर के नामांकन पत्र को खारिज कर दिया.. निर्वाचन अधिकारी ने दो अलग अलग हलफनामें में अलग अलग जानकारी के बारे में तेज बहादुर को नोटिस भेजा था. प्रेक्षक प्रवीण कुमार की मौजूदगी में नामांकन पत्रों की जांच शुरू हुई।

जांच के दौरान जिला निर्वाचन अधिकारी सुरेंद्र सिंह द्वारा तेज बहादुर यादव को बीएसएफ से बर्खास्तगी के संबंध में दो नामांकन पत्रों में अलग-अलग जानकारी देने पर नोटिस दिया और 24 घंटे में बीएसएफ से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेकर आने के लिए कहा था। तेज बहादुर को कहा गया था कि वो BSF से प्रमाणपत्र लेकर आएँ, जिसमें यह स्पष्ट हो कि उन्हें नौकरी से किस वजह से बर्खास्त किया गया. इसके बारे में तेज बहादुर से स्पष्टीकरण माँगा गया था लेकिन समय रहते वे अधिकारी को उपलब्ध नहीं करवा पाए. नामांकन रद्द होने के बाद तेज बहादुर के वकील ने कहा कि “दिल्ली चुनाव आयोग से लगातार ये लोग बात कर रहें हैं. मोदी जी को डर लग रहा है, इसलिए इस तरह से किया जा रहा है. भाजपा द्वारा एक ऑबजेक्शन दायर करवाई गई. उनकी यह मंशा है कि तेज बहादुर चुनाव ना लड़े. डीएम चाहते है कि हम फार्म भरें पर आंध्र प्रदेश से आए पर्यवेक्षक फार्म भरने नहीं दे रहे हैं.

तर्ज बहादुर का नामांकन रद्द होने के बाद उनके समर्थकों ने चुनाव अधिकारी ऑफिस पर जमकर प्रदर्शन किया और खबर के मुताबिक़ पुलिस और तेज बहादुर के समर्थकों में बहस भी हुई.

 हालाँकि अब तेज बहादुर यादव चुनाव नहीं लड़ पायेंगे.. सपा में शामिल होने के बाद से ही तेज बाहदुर यादव पर चर्चा तेज हो गयी थी. तेज बहादुर को तब उम्मीदवार बनाया जाना जब सपा से ही शालिनी यादव ने पर्चा दाखिल कर चुकी थी ये दर्शाता है कि अखिलेश यादव ने जातिगत समीकरण के साथ साथ वाराणसी में अपनी जगह खोजने की कोशिश की थी जोकि अब नाकाम हो होती दिखाई दे रही है . सपा के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ने का लालच तेज बहादुर यादव का सपना फिलहाल के लिए तो सपना ही बना दिया है..

इन सबके बावजूद अब सपा की प्रत्याशी शालिनी यादव ही रहेंगी जो पहले से ही नामांकन कर चुकी थी. अब देखना ये बेहद दिलचस्प होगा कि शालिनी यादव समाजवादी पार्टी की तरफ से प्रधानमंत्री मोदी के लिए कितनी चुनौती बन पाती है.