सबको रुला के अनंत यात्रा पर चली गई सुष-माँ

मुस्कुराता चेहरा, ओजस्वी वाणी, ममतामयी आँखें, जिसे बारे में सोच कर हमारे मन में सुषमा स्वराज की छवि बनती है, वो सुषमा हमें छोड़ कर चली गईं .भारत की राजनीति में सुषमा स्वराज होने का मतलब समझिये. कांग्रेस नेता गुलाम नबी आज़ाद उन्हें बहन कहते थे तो भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन और मुख्तार अब्बास नकवी उनसे राखी बंधवाते थे, लाल कृष्ण आडवाणी के लिए वो बेटी थी, तो उन हज़ारों लोगों के लिए माँ थी जो अपने देश से दूर कभी किसी मुसीबत में होते तो उनके एक ट्वीट पर रात के एक बजे भी सुषमा उनकी परेशानियों को हल कर देती थीं . राजनीति में रह कर भी वो किसी के लिए भी नेता नहीं थीं बल्कि उनकी रिश्तेदार थीं .वो जब बोलने के लिए खड़ी होतीं तो वक़्त मानों उन्हें सुनने के लिए ठहर सा जाता था .चाहे देश हो या विदेश .

सुषमा स्वराज अब हमारे बीच नहीं है और सबकी आँखे नम हैं . उनका वो मुस्कुराता चेहरा और आँखों से छलकता प्यार किसी की आँखों से हट नहीं रहा . उनकी शख्सियत ने दलों के पार दिलों को छुआ… तभी तो जब उनके अस्पताल में भर्ती होने की खबर आई तो गुलाम नबी आज़ाद तुरंत अस्पताल पहुंचे . उनकी शख्सियत ने सरहदों के पार दिलों को छुआ, उनके जाने कि खबर सुनकर अफगानिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, इजरायल, नेपाल से उन्हें याद किया जा रहा है.

2014 से 2019 के दरमियाँ विदेश मंत्री रहते हुए वो भारतीयों के लिए सिर्फ सुषमा नहीं थी बल्कि सुष-माँ थी. किसी को वीजा नहीं मिल रहा होता तो वो रात के दो बजे सुषमा को ट्वीट करता, कोई युद्धग्रस्त यमन, सूडान और लीबिया में फंसा तो उसने सुषमा से मदद मांगी, किसी को हनीमून के लिए वीजा नहीं मिलता तो वो सुषमा को याद करता, भारतियों को छोडिये , पाकिस्तान में भी किसी को इलाज में दिक्कत होती तो वो सुषमा से मदद मांगता ताकि भारत आ कर इलाज करा सके . इसलिए आम लोगों के लिए सुषमा सिर्फ सुषमा नहीं थी बल्कि सुष –माँ थी. ट्विटर पर मज़ाक मज़ाक में किसी ने मंगल ग्रह पर होने की बात कह कर मदद मांगी तो सुषमा कहती अगर आप मंगल ग्रह पर भी फंसे हैं तब भी भारतीय दूतावास आपकी मदद करेगा .

तीन दशकों से बीजेपी के मुख्य महिला चेहरे के रूप में पहचानी जाती रहीं सुषमा 14 फ़रवरी 1952 को हरियाणा के अम्बाला कैंट में पैदा हुईं . 1970 में ABVP से उनका सियासी कैरियर शुरू हुआ, उनके पिता RSS के स्वयंसेवक थे तो सुषमा का झुकाव भी उस तरफ था हालाँकि वो कभी संघ की सदस्य नहीं रही . 1973 में उन्होने सुप्रीम कोर्ट में बतौर वकील अपनी प्रैक्टिस शुरू की . जब आपातकाल लगा और जॉर्ज फर्नांडिस को गिरफ्तार किया गया तो सुषमा उनके लीगल टीम की सदस्य थीं . इसी टीम में थे स्वराज कौशल . दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ी और प्यार हो गया . 1975 में दोनों ने शादी कर ली, उस वक़्त सुषमा की उम्र 23 साल थी . ये वो दौर था जब माना जाता था कि शादी के बाद औरत घर गृहस्थी में उलझ जाती है लेकिन सुषमा का जीवन तो शादी के बाद ही सितारा बन कर राजनीति के फलक पर चमका

साल 1977, जनता पार्टी की सरकार में जब सुषमा स्वराज कैबिनेट मंत्री बनी तो उस वक़्त उनकी उम्र मात्र 25 साला थी और वो सबसे युवा मंत्री थीं .. जब वो जनता पार्टी के हरियाणा इकाई की अध्यक्ष बनी तो उनकी उम्र मात्र 27 साल थी. वह किसी राजनीतिक पार्टी की पहली महिला प्रवक्ता भी बनीं.  सुषमा 7 बार लोकसभा पहुंची और 3 बार विधानसभा की सदस्य रहीं . दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनने का गौरव भी सुषमा को ही मिला .

संसद में उनके भाषणों की धमक को कौन नहीं जानता . 1996 को लोकसभा में दिया गया उनका भाषण आज भी लोगों की कानों में गूजता है . संयुक्त राष्ट्र संघ में जब वो गरजती तो पाकिस्तान को पानी पानी कर देती थी . हालाँकि राजनीति से उन्होंने खुद को एक साल पहले ही अलग कर लिया था लेकिन तब एक उम्मीद थी कि कभी किसी मुद्दे पर उनकी आवाज सुनने को तो मिल जायेगी लेकिन अब वो उम्मीद ख़त्म हो गई . अब वो मुस्कुराता चेहरा, वो दमदार आवाज बस यादों में सिमट कर रह जायेगी.

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