सरोगेसी बिल के बाद अब कौन बन पाएंगी सरोगेट मां?

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सरोगेसी क्या है? ये दरअसल एक ऐसा तरीका है, जिसमें कोई भी शादीशुदा कपल बच्चे पैदा करने के लिए किसी दूसरी महिला की कोख किराए पर ले सकता है. यानी महिला दूसरों की संतान को अपने गर्व में अगले 9 महीने तक पाल कर उसे उसके biological माता पिता को वापस सौप देगी. ये कई वजहों से हो सकता है. जैसे कि अगर दंपत्ति बच्चे पैदा करने में अक्षम है, या फिर महिला कंसीव नहीं कर पा रही हो या फिर कोई और complication के चलते बच्चे ना हो पा रहे हों. ऐसे में कई लोग surrogacy का सहारा लेते हैं, और ऐसी स्थिति में किराए पर कोख देने वाली महिला को सरोगेट मदर कहा जाता है.

पिछले कुछ सालों से कमर्शियल सरोगेसी को लेकर विवाद बढ़ने लगे थे. कमर्शियल सरोगेसी यानि- सरोगेट मां को हॉस्पिटल और पालन पोषण के खर्चे के अलावा एक बड़ी रकम का भुगतान किया जाना. ये प्रथा elite वर्ग के लोगों में दिन ब दिन बढती ही जा रही थी. अपने पैसों के दम पर किसी की कोख को अपनी सहूलियत के लिए किराये पर लेना कितना सही है? आज हम इसी मुद्दे पर बात करने वाले है.

Source: News Today

हाल ही में modi सरकार sarrogacy bill को लेकर आई है जिसमे कमर्शियल सर्रोगासी पर लगाम कासी गई है.अब इसे बन कर दिया गया है

Normal सरोगेसी में औरत अपनी स्वेच्छा से प्रेग्नेंसी के लिए राजी होती है. और इसके लिए कोई फीस डिमांड नहीं करती, लेकिन ये नेक काम धीरे धीरे सरकार और प्रशासन की नाक के नीचे एक बहुत बड़े धंधे में तब्दील हो गया, ये रैकेट देश भर में फ़ैल गया, आर्थिक रूप से कमजोर औरतों को पैसे का लालच दे कर या फिर जबरन ही उन्हें surrogacy के दलदल में धकेल दिया जाने लगा था. बीते सालों में विदेशी दम्पतियों के लिए भारत सरोगेसी का केंद्र बनता जा रहा था.

साथ ही सरोगेट मांओं का शोषण भी बड़ने लगा, सरोगेसी से पैदा हुए बच्चे को छोड़ देने जैसे मामले भी सामने आने लग गए थे और मानव भ्रूणों के अवध व्यापर के मामले भी बढ़ते जा रहे थे. देखते ही देखते देश में कॉमर्शियल सरोगेसी को रोकने की मांग भी बढ़ने लग गई. सरोगेसी को लेकर कोई ठोस कानून ना होने के कारण सरोगेसी क्लिनिकों खुल के इसका दुरूपयोग करते थे. अब सरोगेट माताओं और सरोगेसी के जरिए पैदा हुए बच्चों के अधिकारों के संरक्षण के लिये कानून बेहद ज़रूरी हो गया था.

Source: Baby Steps

sarrogacy bill इस बात को सुनिश्चित करेगा की शादीशुदा जोड़े ही surrogacy के विकल्प को चुन सकते. दोनों की शादी को कम से कम पांच साल हो चुके होने चाहिए. उनमें से कम से कम कोई एक इन्फ़र्टाइल होना चाहिए. उन्हें यह बात सिद्ध करनी होगी कि वे मेडिकली बच्चा पैदा करने में अक्षम हैं.
जोड़े की उम्र औरतों में 23 से 50 साल और मरदों में 26 से 55 साल के बीच होनी चाहिए. जोड़े का भारतीय नागरिक होना जरूरी है.

सरोगेट मां जोड़े की नजदीकी रिश्तेदार ही होनी चाहिए. लेकिन कानून में यह साफ़ नहीं किया गया है कि नजदीकी रिश्तेदारों में कौन-कौन आएंगे. सरोगेट मां का भी विवाहित होना जरूरी है. उसका कम से कम अपना एक बच्चा पहले से होना चाहिए. सरोगेसी से पैदा हुए बच्चे का किसी भी स्थिति में परित्याग नहीं किया जाएगा और उसे सामान्य बच्चों के तरह सभी अधिकार मिलंगे.

Source: Southern Surrogacy

सरोगेट माता को केवल एक ही बार सरोगेट मां बनने के लिए अनुमति दी जाएगी. सरोगेट मां को प्रेग्नेंसी के दौरान अपना ध्यान रखने और मेडिकल जरूरतों के लायक पैसे ही दिए जा सकते हैं ताकि वो अपनी प्रेग्नेंसी का ख्याल रख सकें. इससे ज्यादा पैसे देना अपराध की श्रेड़ी में आएगा. कानून का उल्लंघन करने पर कारावास और जुर्माने का प्रावधान किया गया है.

हालांकि, इस कानून में कई कमियां भी हो सकती हैं हर कानून के अपने नफा नुक्सान होते है लेकिन इस कानून से surrogacy के धंधे को खत्म करने में काफी मदद मिलेगी.