लखनऊ के चौक चौराहों पर दं’गाइ’यों के पोस्टर लगाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कही बड़ी बात और सुनाया ये फैसला

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लखनऊ के चौक चौराहों पर CAA विरोधी दं’गाइ’यों के पोस्टर विवाद पर आज सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई हुई. दरअसल उत्तर प्रदेश सरकार हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गई है जिसने हाईकोर्ट ने कहा था कि पोस्टर लगाना निजता के अधिकार का उल्लंघन है और इसे तुरंत हटाया जाए. सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से सवाल किया कि किस कानून के तहत सरकार ने दं’गा के आरोपियों का बैनर लगाया?

कोर्ट के सवाल पर सरकार के वकील तुषार मेहता ने सरकार का बचाव करते हुए कहा जब प्रदर्शनकारी खुले में सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान कर रहे हैं, मीडिया ने उनके विडियो बनाया, सबने विडियो देखा तो ऐसे में यह दावा नहीं कर सकते कि पोस्टर लगने से उनकी निजता के अधिकार का उल्लंघन हुआ है.

इस पर जस्टिस अनुरुद्ध बोस ने कहा कि सरकार कानून के बाहर जाकर काम नहीं कर सकती. फिलहाल ऐसा कोई कानून नहीं है जो आपकी इस कार्रवाई का समर्थन करता हो. कोर्ट ने सवाल पूछा कि क्या प्रदर्शनकारियों को हर्जाना जमा करने की समय सीमा बीत गई है? इस पर वकील तुषार मेहता ने कहा कि अभी नहीं,  उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दिया है.

इस पर जस्टिस ललित ने कहा कि अगर समय सीमा बीत जाती तो पोस्टर लगाने की बात समझ में भी आती. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर तत्काल रोक लगाने से इनकार करते हुए मामले को बड़ी बेंच में रेफर कर दिया जिसमे इसकी सुनवाई चीफ जस्टिस करेंगे.