स्मारकों और मूर्तियों का पैसा लौटाए मायावती- सुप्रीम कोर्ट

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उतर प्रदेश की मुख्यमंत्री रही मयावती अपने मूर्तियों और स्मारकों के लिए जानी जाती है…मयावती पहली ऐसी इंसान है जिन्होंने जिते-जित अपना ही स्टैचू बनवा दिया….उतर प्रदेश के लोग मयावती को उनके काम के लिए नहीं ब्लकि उनके अपने बनवाए गए मूर्तियों के लिए याद करते हैं…लखनऊ से लेकर नोएडा तक आपको ऐसे कई विशास स्मारक और मुर्तियां दिख जाएंगे…वो भी किसी और राजनेता के नहीं ब्लकि खुद बहन मायावती जी के..और इसमें दिलचस्प बात तो ये है कि ये मुर्तियां खुद मायावती जी ने बनवाएं है..अपने मुख्यमंत्री रहने के दौरान..

लेकिन ये हम आपको इसलिए बता रहे है क्योंकि मायावती को मूर्तियों और स्मारक निर्माण मामले में सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है. कोर्ट ने उनके मुख्यमंत्री रहने के दौरान बनाई गई स्मारकों और मूर्तियों का पैसा लौटाने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि यह अस्थायी आदेश है कि मायावती को लखनऊ और नोएडा में अपनी और पार्टी के चुनाव चिह्न हाथी की मूर्तियां बनाने के लिए इस्तेमाल किए गए जनता के पैसों को सरकारी खजाने में लौटाना होगा।

बता दें की मूर्तियों पर जनता के पैसे खर्च होने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में 2009 में जनहित याचिका दी गई थी। लगभग 10 साल पुरानी इस याचिका पर सुनवाई करते सुप्रीम कोर्ट ने ये आदेश दिया हैं..

यह आदेश अदालत ने एक वकील की उस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया जिसमें कहा गया था कि जनता के पैसों का इस्तेमाल अपनी मूर्तियां या राजनीतिक पार्टी के प्रचार के लिए नहीं किया जा सकता है।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में साल 2009 में ये याचिका दायर की गई थी। जिसपर सुनवाई चल रही थी। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मायावती को मूर्तियों पर खर्च सभी पैसे को सरकारी खजाने में वापस करने होंगे। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने मायावती के वकील से कहा कि अपने मुवक्किल से कह दीजिए कि वह मूर्तियों पर खर्च हुए पैसों को सरकारी खजाने में जमा करवा दें। मामले में अगली सुनवाई 2 अप्रैल को तय की गई। मायावती के वकील ने मामले की सुनवाई मई के बाद करने की अपील की, लेकिन कोर्ट ने यह अनुरोध स्वीकार नहीं किया।

पीठ ने कहा कि इस याचिका पर विस्तार से सुनवाई में वक्त लगेगा, इसलिए इसे अप्रैल को अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाता है। इससे पहले, शीर्ष अदालत ने पर्यावरण को लेकर व्यक्त की गई चिंता को देखते हुए इस मामले में अनेक अंतरिम आदेश और निर्देश दिए थे। निर्वाचन आयोग को भी निर्देश दिए गए थे कि चुनाव के दौरान इन हाथियों को ढंका जाये। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि मायावती, जो उस समय प्रदेश की मुख्यमंत्री थीं का महिमामंडन करने के इरादे से इन मूर्तियों के निर्माण पर 2008-09 के दौरान सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं

सीएम रहते हुए मायावती ने लगवाई थी प्रतिमाएं

आपको बता दें कि मायावती के द्वारा उत्तर प्रदेश में बसपा शासनकाल में कई पार्कों का निर्माण करवाया गया. इन पार्कों में बसपा संस्थापक कांशीराम, मायावती और हाथियों की मूर्तियां लगवाई गई थीं. ये मुद्दा इससे पहले भी चुनावों में उठता रहता है और विपक्षी इस मुद्दे पर निशाना साधते हैं. बसपा शासनकाल में ये पार्क लखनऊ, नोएडा समेत अन्य शहरों में बनवाए गए थे. तब मायावती के प्रतिमाएं लगवाने के फैसले का समाजवादी पार्टी समेत कई दलों ने विरोध जताया था। लेकिन अब जा कर मूर्तियों पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बारे में अखिलेश यादव से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इस बारे में जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा, ‘मैं समझता हूं कि बीसपी नेता के वकील अपना पक्ष रखेंगे। यह कोई शुरुआती टिप्पणी हो सकती है मेरी जानकारी में अभी नहीं है।’

बहरहाल यही तो राजनिती हैबदलते दौर में अब एसपी-बीएसपी की तल्खियां दूर हो गई हैं और दोनों पार्टियां गठबंधन में 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ने जा रही हैं। गौरतलब है कि 2012 विधानसभा चुनाव के दौरान समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया था. तब अखिलेश ने मायावती पर 40 हजार करोड़ के मूर्ति घोटाले का आरोप लगाया था.

खर्च हुए थे लगभग 6 हजार करोड!

उत्तर प्रदेश में अखिलेश सरकार के दौरान लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा तैयार रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने लखनऊ, नोएडा और ग्रेटर नोएडा में स्थित पार्क और मूर्तियों पर कुल 5,919 करोड़ रुपये खर्च किए थे। नोएडा स्थित दलित प्रेरणा स्थल पर हाथी की पत्थर की 30 मूर्तियां जबकि कांसे की 22 प्रतिमाएं लगवाई गईं थी। जिसका खर्च 685 करोड़ रुपये आया था। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि इन पार्कों और मूर्तियों के रखरखाव के लिए 5,634 कर्मचारियों की बहाली की गई थी।