संविधान से भारत का नाम इंडिया हटाने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने दिया ये फैसला

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भारत को हम कई नामों से पुकारते हैं. कभी भारत कहते हैं तो कभी इंडिया तो कभी हिंदुस्तान. भारत दुनिया का ऐसा एकमात्र देश है जिसके तीन नाम है. लेकिन सिर्फ भारत का नाम ही तीन क्यों? अमेरिका को अमेरिका ही कहते हैं. जापान को पूरी दुनिया जापान ही कहती है, चाइना को पूरी दुनिया चाइना ही कहती है तो फिर भारत को इंडिया क्यों कहा जाता है? और हम भारतीय ही भारत को कभी हिंदुस्तान के नाम से भी संबोधित करते हैं. इसी सवाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है.

इंडिया से बदलकर भारत या फिर हिन्दुस्तान नाम कर दिया जाये. इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस एसए बोबडे की बेंच ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई में कहा कि ‘याचिकाकर्ता ने इस मामले में कोर्ट को क्यों अप्रोच किया है जबकि संविधान में साफ लिखा है कि इंडिया जो कि भारत है.’

उसके बाद याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि इंडिया ग्रीक शब्द इंडिका से आया है और इस नाम को हटाया जाना चाहिए. जब याचिकाकर्ता ने लगातार ये दलील रखी और सुप्रीम कोर्ट का रुख याचिका सुनने के लिए नहीं दिखा तो याचिकाकर्ता ने कहा कि ‘इस याचिका को प्रतिवेदन के तौर पर संबंधित मंत्रालय के सामने भेजने की इजाजत दी जाए. तब सुप्रीम कोर्ट ने इसकी इजाजत दे दी.’

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को लेकर याचिकाकर्ता से कहा कि ‘संविधान में भी भारत नाम लिखा है. लिखा है इंडिया दैट ईज भारत. सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि आप संबंधित मंत्रालय के सामने अपना प्रतिवेदन दें और सरकार को संतुष्ट करें’. सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी थी कि इंडिया का नाम बदलकर भारत कर दिया जाये या फिर हिन्दुस्तान कर दिया जाये. जिसको सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया हैं.