राफेल डील मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- चौकीदार प्योर है

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चौकीदार चोर है नारे को भूले नहीं होंगे आप. ये वो नारा था जिसको केंद्र में रख कर 2019 लोकसभा चुनाव की बिसात बिछाई गई थी. ये वो मुद्दा था जिसके जरिये कांग्रेस ने सत्ता में वापसी के ख्वाब देखे थे. अब इस मुद्दे का हमेशा के लिए अंत हो गया. सुप्रीम कोर्ट ने राफेल डील में गड़बड़ी से सम्बंधित सभी पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज कर दिया. ये पुनर्विचार याचिका प्रशांत भूषण, आम आदमी पार्टी नेता संजय सिंह, पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरुण शौरी और अन्य लोगों द्वारा दायर की गई थी.

कोर्ट में दायर याचिका में डील में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे. साथ ही ‘लीक’ दस्तावेजों के हवाले से आरोप लगाया गया था कि डील में PMO ने रक्षा मंत्रालय को बगैर भरोसे में लिए अपनी ओर से बातचीत की है. कोर्ट में विमान डील की कीमत को लेकर भी याचिका डाली गई थी.

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली बेंच ने इस मामले पर फैसला पढ़ते हुए याचिकाकर्ताओं के द्वारा सौदे की प्रक्रिया में गड़बड़ी की दलीलें खारिज की हैं. बेंच ने सरकार को क्लीनचिट देते हुए कहा कि मामले की अलग से जांच करने की कोई आवश्वयकता नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां की.
– कोर्ट ने कहा हमें नहीं लगता है कि इस मामले में किसी जांच या एफआईआर की जरूरत है.
-प्रक्रिया और दाम पर सवाल खड़े करते हुए जिन दलीलों को दिया गया है उसमें दम नहीं है.
-हम इस बात को नज़रअंदाज नहीं कर सकते हैं कि अभी इस मामले में एक कॉन्ट्रैक्ट चल रहा है.
-केंद्र सरकार के द्वारा हलफनामा दायर करते हुए जो भूल हुई थी, उसके सुधार को स्वीकार कर लिया गया है.

इससे पहले 14 दिसंबर 2018 को राफेल खरीद प्रक्रिया और इंडियन ऑफसेट पार्टनर के चुनाव में सरकार द्वारा अनिल अम्बानी की कंपनी को फेवर किए जाने के आरोपों की जांच की मांग वाली तमाम याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था. जिसके बाद ये रिव्यू पेटीशन डाली गई थी.

जनता ने तो लोकसभा चुनाव में ही राफेल मुद्दे को नकार दिया लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राफेल मुद्दा हमेशा के लिए कांग्रेस के हाथ से निकल गया. तीन तलाक, आर्टिकल 370, राम मंदिर जैसे कई सालों से चले आ रहे मुद्दों के अंत के बाद अब राफेल मुद्दे का भी पटाक्षेप होना कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका है. इसके साथ ये भी बात साफ़ हो गई कि कांग्रेस एक झूठे मुद्दे के सहारे देश को गुमराह करने की कोशिश कर रही थी. अब अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए कांग्रेस को नए मुद्दे तलाशने होंगे..