कैसे रातों रात बेघर हो गई हजारों बार गर्ल्स ?

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मुंबई… यानी सपनों का शहर, ग्लैमर की दुनिया.. फैशन.. सिनेमा.. सेंसेक्स.. रंगीनियाँ.. सब कुछ है इस शहर में..  हर साल यहाँ लाखों की भीड़ आती है दिल में जूनून और आँखों में सपने लेकर.. कहा जाता है यह शहर कभी नहीं सोता. यहाँ अँधेरा जैसे जैसे गहरा होता जाता है, शहर की चकाचोंध उतनी बढती जाती है.. और उसी चकाचोंध में निकलती हैं यह लड़कियां.. जो काम करती हैं.. मुंबई के डांस बार्स में.

आज बहुत दिनों बाद ये नाचेंगी.. ख़ुशी मे

आज इनके कदम मजबूर नहीं हैं..
आज इनके मन में डर नहीं है… कि कोई पुलिस वाला आएगा और इन्हें फिर से बिना पैसे लिए घर जाना पड़ेगा.. फिर से परिवार को भूखा सोना पड़ेगा

आज ये फिर से आजाद हैं.. खुश हैं..

लेकिन 13 साल पहले का वो दिन इन्हें आज भी याद है.. जब रातों रात यह बेघर हो गई थी.. बेरोजगार हो गई थी..

एक फैसला सुनाया गया.. और इनकी जिंदगी पलट गई

वो दिन था.. अगस्त 2005 का.. जब मुंबई के सभी गैर कानूनी बार्स को बंद करने का आर्डर आ गया था.. उस वक़्त मुंबई में कुल 700 डांस बार्स थे.. जिस में सिर्फ 307 बार ही रजिस्टर्ड थे.. और यह आर्डर आने के बाद लगभग 1.5 लाख लोग जिनमें 75000 वो लड़कियां थी जो यहाँ डांस करती थी.. रातों रात बेरोजगार हो गई थी..

डांस बार बंद होने के पीछे कारण था डांस बार के जरिये ह्यूमन ट्रैफिकिंग, देह व्यापार और वेश्यावृति होना. यह डांस बार बंद होने के बाद हजारो बार गर्ल्स बेरोजगार हो गई थी. उस वक़्त सरकार ने उन सभी बार गर्ल्स को नौकरी देने का वादा किया था.. पर ऐसा हुआ नहीं.

क्यूंकि बार में नाचने वाली यह लड़कियां ना तो पढ़ी लिखी ही थी.. और इसके अलवा कोई और काम इन्हें आता भी नहीं था.. गरीब होने के कारण यह घर भी नहीं जा सकती थी… बेशक यह लड़कियां जब इस प्रोफेशन में आई थी तब मजबूर थी.. लेकिन यहाँ काम करने की वजह से इन्हें भूखा नहीं रहना पड़ता था.. इनके बच्चे स्कूल जा रहे थे.. माँ की दवाई आ रही थी..

काम ना होने की वजह से इनमे से अधिकतर लड़कियां फिर दुबई और मध्य पूर्वी देशों में चली गई.. वहीँ कुछ न्यू देल्ही, चेन्नई और हैदराबाद आ गई.

इस मामले पर पिछले 14 साल से महाराष्ट्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट की लड़ाई चलती रही है.. सुप्रीम कोर्ट यह प्रतिबन्ध हटाता रहा और राज्य सरकार स्टे लगवाती रही.. क्यूंकि महाराष्ट्र की सरकार का यह मानना है कि डांस बार्स इम्मोरल यानि अनैतिक हैं.. लेकिन सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि समय के साथ सोशल और मोरल वैल्यूज बदलते रहते हैं.. जिसके चलते डांस बार्स पर प्रतिबन्ध नहीं लगाया जा सकता.. तो फाइनली सुप्रीम कोर्ट ने कल डांस बार्स को चलाये रखने की मंज़ूरी दे दी.. जिससे यह बार्स और इसमें काम करने वाली लड़कियां अब बहुत खुश हैं कि अब वो इज्ज़त के साथ और निडर होकर अपना काम कर सकती हैं..

लेकिन सोचने वाली बात यह है कि महाराष्ट्र सरकार को बार बार इनपर प्रतिबन्ध लगाने की ज़रूरत क्यूँ पड़ती है.. जाहिर है यहाँ जाने वाले अधिकतर लोग जो बार और बार में काम करने वाली लड़कियों के लिए दिक्कतें खडी करते हैं.. भावनाओं में बहकर.. इसीलिए

अब देश के संविधान और क़ानून ने तो हमें आज़ादी दे दी है.. यह सोचकर कि हम जिम्मेदार और समझदार हैं.. पर क्या वाकई में हैं..??

क्यूंकि अगर हम जिम्मेदार होते तो शायद ये क़ानून होते ही नहीं..

हम समझदार होते तो शायद अदालतों में यूँ लड़ते नहीं..