मध्य प्रदेश का सियासी संग्राम अब सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर पहुँच गया है. फ्लोर के पक्ष और विपक्ष में भाजपा उर कांग्रेस के बीच सुप्रीम कोर्ट में दलीलें जारी है. एमपी कांग्रेस की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में दुष्यंत दवे पक्ष रख रहे हैं. जबकि भाजपा की तरफ से मुकुल रोहतगी वकील हैं. कांग्रेस की तरफ से सरकार बचाने के लिए ऐसी दलील दी गई जिससे सब चौंक गए.

सबको पता है कि अगर फ्लोर टेस्ट हुआ तो कलाम्ल्नाथ सरकार तुरंत गिर जायेगी. क्योंकि उसके 22 विधायक बागी हो चुके हैं. ऐसे में कांग्रेस की तरफ से पक्ष रख रहे वकील दुष्यंत दवे ने कोर्ट में कहा कि दुनिया कोरोना वायरस से तबाह होने के कगार पर खड़ी है. दुनिया मानवता के सबसे बड़े संकट कोरोना से जूझ रही है, ऐसे में क्या इस वक्त बहुमत परीक्षण कराना जरूरी है?

कांग्रेस के वकील दुष्यंत दवे ने सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में गुजरात में हुए राज्यसभा चुनाव का हवाला देते हुए कहा कि मध्य प्रदेश जैसी स्थिति कर्नाटक और गुजरात में देखी जा चुकी है. इसलिए इस मामले को संवैधानिक पीठ के पास भेजना चाहिए. हालाँकि भाजपा के वकील को किसी और मामले की सुनवाई के लिए जाना था इसलिए अदालत ने कहा कि आगे की कारवाई दोपहर बाद फिर शुरू होगी.

एक तरफ ज्जहाँ सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही थी वहीं दूसरी तरफ बेंगलुरु में गज़ब सियासी ड्रामा देखने को मिला. बागी विधायकों से मिलने गए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह को जब पुलिस ने रोका तो वो बेंगलुरु एयरपोर्ट पर ही धरने पर बैठ गए.