लोकसभा चुनाव से पहले सपा को सुप्रीम कोर्ट से लगा बड़ा झटका

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लोकसभा चुनाव के दौरान समाजवादी पार्टी के सरंक्षक मुलायम सिंह यादव के साथ पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की मुश्किल बढ़ सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने मुलायम और अखिलेश के खिलाफ अर्जी पर सीबीआई को नोटिस जारी कर 2 हफ्ते में जवाब मांगा है..आय से अधिक संपत्ति के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ये नोटिस जारी किया है..सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक कार्यकर्ता विश्वनाथ चतुर्वेदी की अर्जी पर ये नोटिस भेजा है.

दरअसल, कांग्रेस नेता विश्वनाथ चतुर्वेदी ने वर्ष 2005 में यादव परिवार के खिलाफ यह याचिका दायर की थी। याचिका दायर कर सीबीआई को मुलायम, अखिलेश, उनकी पत्नी डिंपल यादव और प्रतीक यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम के तहत केस चलाने का निर्देश देने की मांग की थी.

चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस दीपक गुप्ता की बेंच ने सीबीआई से पूछा “हम जानना चाहते हैं कि इस केस का क्या हुआ? 2007 के बाद से इस केस में अब तक क्या हुआ है? क्या इनके खिलाफ कोई एफआईआर पंजीकृत की गई है?” हालांकि जब चुनावी दौर में इस केस की सुनवाई को लेकर मुलायम सिंह यादव के वकील ने आपत्ति जताई तो चीफ जस्टिस ने कहा कि वक्त से कुछ फर्क नहीं पड़ता, दरअसल इस केस में क्या हुआ हमें जानना है।

गठबंधन के सहारे उत्तर प्रदेश की सत्ता हथियाने का ख्वाब देखने वाले यादव परिवार को सुप्रीम कोर्ट के तरफ से ये करारा झटका माना जा रहा है..आपको बता दें कि  विश्वनाथ चतुर्वेदी की याचिका पर कोर्ट ने वर्ष 2007 में पहली बार संज्ञान लेते हुए अखिलेश यादव, मुलायम यादव, अखिलेश के भाई प्रतिक यादव और डिंपल यादव के खिलाफ जांच करने के लिए सीबीआई को इजाज़त दी थी। इसके बाद इन सभी ने कोर्ट में अपने खिलाफ जारी जांच को रोकने की याचिका दायर की थी लेकिन साल 2012 में इस मामले में मुलायम, अखिलेश और प्रतीक यादव की पुनर्विचार याचिका भी कोर्ट खारिज कर चुका है. हालांकि कोर्ट ने डिंपल यादव की अर्जी को मंजूर कर उनके खिलाफ जांच को बंद कर दिया था.  याचिकाकर्ता ने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट CBI से मामले पर रिपोर्ट तलब करे या निचली अदालत में रिपोर्ट जमा करने का आदेश दे. उनका कहना है कि इस मामले को 11 साल बीत चुके हैं और जांच के बारे में कुछ पता नहीं है. 

अब तक यादव परिवार के खिलाफ कोई एफआईआर तक दर्ज नहीं की गई है लेकिन ठीक चुनाव से पहले कोर्ट द्वारा यादव परिवार के खिलाफ सीबीआई से इस मामले की रिपोर्ट मांगने से सपा-बसपा के गठबंधन को नुकसान पहुंच सकता है।