प्रवासी मजदूरों के सम्बन्ध में सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया आदेश

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कोरोना संकट और लॉकडाउन के बीच प्रवासी मजदूरों को राजनीति तेज़ होती नजर आ रही थी. विपक्षी पार्टियों का कहना था कि सरकार दिहाड़ी मजदूरों पर ध्यान नहीं दे रही हैं. इसी को लेकर मजदूरों के आवाजाही का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गया हैं. सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को मामले की जांच करने और दो राज्यों के बीच मजदूरों की आवाजही के मामले में कार्रवाई करने का आदेश दिया है.

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि कैसे जानकारी को सत्यापित किया जाएगा कि प्रवासी मजदूरों की आवाजाही नहीं बंद हुई है. इस पर याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि कुछ राज्य सरकारों का कहना है कि वे लोगों को उनके मूल गांवों में वापस भेज देंगे, लेकिन गृह मंत्रालय की ओर से किसी भी आवाजाही की अनुमति नहीं है.

मजदूरों के आवाजाही के मामले में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि गृह मंत्रालय ने मजदूरों को लेकर दिशानिर्देश जारी किए हैं. गौरतलब है कि बीते दिनों गृह मंत्रालय ने मजदूरों की आवाजाही के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग सिस्टम जारी किया था. इसमें कहा गया था कि मजदूरों को किसी भी प्रकार के अंतर-राज्य आवाजाही की अनुमति नहीं होगी.

गृह सचिव अजय भल्ला ने कहा था कि लॉकडाउन के कारण देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे हुए मजदूरों को कुछ शर्तों के साथ राज्य के भीतर उनके काम के स्थानों पर जाने की अनुमति दी जाएगी. हालांकि, तीन मई तक बढ़ाए गए लॉकडाउन के दौरान मजदूरों को किसी भी प्रकार के अंतर-राज्य आवाजाही की अनुमति नहीं होगी.