आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने की बड़ी टिप्पणी, कुछ राजनीतिक दलों ने सुप्रीम कोर्ट में डाली थी याचिका

भारत में आरक्षण एक बेहद संवेदनशील मुद्दा रहा है. इसके पक्ष और विपक्ष में हमेशा आवाजें उठती रही है लेकिन ये आवाज सिर्फ जनता की तरफ से उठती है. वोटबैंक की राजनीति के कारण कोई भी राजनीतिक दल आरक्षण के खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत नहीं करता. लेकिन अब आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी टिपण्णी की है. इस टिपण्णी के बाद ये तो निश्चित है कि आरक्षण को लेकर एक बार फिर बड़ी बहस शुरू होने वाली है.

तमिलनाडु में NEET पोस्ट ग्रेजुएशन रिजर्वेशन मामले में अदालत ने बड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि आरक्षण कोई बुनियादी अधिकार नहीं है. ये टिप्पणी करने के बाद अदालत ने तमिलनाडु के कई राजनीतिक दलों द्वारा दाखिल की गई एक याचिका को स्वीकार करने से इनकार कर दिया. दरअसल तमिलनाडू की प्रमुख पार्टियों DMK, AIADMK और CPI की तरफ से NEET के तहत तमिलनाडु में 50 फीसदी OBC आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी. इसी याचिका को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने ये टिप्पणी की और इस याचिका को स्वीकार करने से मना कर दिया.

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि इस मामले में किसका मौलिक अधिकार छीना गया है? आपकी दलीलों से लगता है कि आप सिर्फ तमिलनाडु के कुछ लोगों की भलाई बात कर रहे हैं. कोर्ट ने ये भी कहा कि आरक्षण कोई मौलिक अधिकार नहीं है. जस्तिव राव ने याचिका दायर करने वाले राजनितिक दलों से अपील की कि इस याचिका को सुप्रीम कोर्ट से वापस लिया जाए और इसे हाईकोर्ट में दायर किया जाए. सुप्रीम कोर्ट के जज ने ये भी कहा कि हम आपनी याचिका को नहीं सुनेंगे लेकिन हम इसे खारिज भी नहीं कर रहे. इसे आप हाईकोर्ट में ले कर जाएँ.

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