भले हो रही राजनैतिक पारी खत्म, लेकिन सुमित्रा ताई का सफ़र रहा है काफी शानदार

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हमारे देश में महिलाओं का एक खास स्थान है…. हर जगह उन्हें तवज्जों दी जाती है… या फिर कह ले  इन्हें फर्स्ट परेफरेंस दी जाती है .. चाहे वो घर में हो या पूजा पाठ में….देवी शक्ति का बहुत महत्व है यहाँ … वैसे शायद कुछ फेमिनिस्ट लोग मेरी बातों से सहमत नही होंगी और कई तर्क देंगी  … खैर यहाँ मैं वाद विवाद तो करने नहीं आई हूँ … वैसे मैं तवज्जो वाली बात इसलिए कह रही थी क्योंकि यह सच है … अब आप ही देख लीजिये पहले पुरुष मुख्यमंत्री बहुत कम लोगों को याद होगा  लेकिन भारत की पहली महिला मुख्यमंत्री सुचेता कृपलानी याद ही रहती , क्योंकि बचपन से टेक्स्ट बुक में पढाया जाता..वैसे ही कल्पना चावला, इंदिरा गांधी और सरोजिनी नायडू के बारे में भी हम नहीं भूले …

वैसे आपको मीरा कुमार तो याद ही होंगी, भारत की पहली महिला लोकसभा स्पीकर… लेकिन आज हम उनकी बात नहीं करेंगे … आज बात होगी दूसरी महिला लोकसभा स्पीकर की… सुमित्रा महाजन की …सुमित्रा महाजन का दूसरा नाम “ताई” भी है … वैसे आप सोच रहे होंगे भला ये कैसा नाम हुआ “ताई”.. तो जनाब आपको बता दें की सुमित्रा महाजन को लोग इंदौर की ताई भी कहते है… अब आप सोच रहे होंगे .क्यों कहते है इंदौर की ताई जी ?

तो बात दरअसल ऐसी है कि सुमित्रा महाजन ने इंदौर को पूरे 8  बार लोकसभा मेंरेप्रेजेंट  कियाहै …

सुमित्रा महाजन एबीजेपी की वरिष्ठ नेता….. इंदौर को एक अच्छी शक्ल देने वाली नेता है …. वो नेता जो पहली बार 1989 में लोकसभा के मैदान में उतरी थीं…. और फिर लगातार 7 बार उतारते रहीं और जीतते रहीं…..सुमित्रा महाजन वो नेता है जिसे कई साल तक इंदौर की जनता ने प्यार दिया, सम्मान दिया, इज्जत दी…..

 हालांकि आपको बता दें इतनी सफल नेता अब इस बार चुनाव नहीं लड़ेगी….. सुमित्रा महाजन ने खुद इस बात का ऐलान कर दिया है….. उन्होंने कहा है कि वो लोकसभा चुनाव नहीं लड़ना चाहतीं…..

 वैसे हम सबके मन में यह सवाल उठ रहा की ऐसा क्यों है? क्यों वह चुनाव नहीं लड़ना चाहती…. दरअसल, बात कुछ ऐसी है कि लोकसभा चुनाव नज़दीक है…. 11 अप्रैल से 19 मई तक ये चुनाव चलने वाला है …. सभी पार्टियां लोकसभा सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर रही हैं……. इंदौर लोकसभा सीट पर 19 मई को चुनाव होंगे…… यहां पिछले 8 बार से बीजेपी सुमित्रा महाजन को ही उतार रही थी, लेकिन इस बार चुनाव के इतने करीब आने के बाद भी बीजेपी ने प्रत्याशी के नाम को उजागर नहीं किया…… जिसके बाद अब सुमित्रा ने खुद ये कह दिया कि वो लोकसभा चुनाव नहीं लड़ना चाहतीं….

उन्होंने एक ओपन लेटर लिख कर कहा है कि –

भारतीय जनता पार्टी ने इंदौर में उम्मीदवार घोषित नहीं किया. ये अनिर्णय की स्थिति क्यों? संभव है कि पार्टी निर्णय लेने में संकोच कर रही हो. इसलिए मैं ये घोषणा करती हूं कि अब मुझे लोकसभा चुनाव नहीं लड़ना. इसलिए पार्टी अब मुक्त मन से अपना निर्णय ले. निसंकोच होकर फैसला ले. मैंने पार्टी के वरिष्ठों से इस मामले में पहले ही चर्चा कर ली थी, और निर्णय उन्हीं पर छोड़ दिया था. इंदौर के लोगों ने मुझे बहुत प्यार दिया. अपेक्षा करती हूं कि बीजेपी जल्दी ही अपना निर्णय लेगी. ताकि आने वाले दिनों में सभी को अपना काम करने में सुविधा हो, और असमंजस की स्थिति समाप्त हो.

वैसे आपको बता दें कि सुमित्रा महाजन 75 के पार हो गई हैं. मतलब की उनकी उम्र  76 साल की हो चुकी हैं….. इसलिए ऐसी बातें सामने आ रही थी कि बीजेपी शायद इस बार उन्हें टिकट नहीं देना चाहती… और यही कारण है कि अभी तक इंदौर में किसी उम्मीदवार की घोषणा नहीं की… बीजेपी ने एक रेड लाइन बना रखी है…. वो ये है कि 75 उम्र से ज्यादा के उम्मीदवार को एक्टिव टिकट नहीं देना है…… बीजेपी ने लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी जैसे वरिष्ठ नेताओं को भी इस बार टिकट नहीं दिया है..

सुमित्रा महाजन ने चुनाव न लड़ने का ऐलान करने के बाद मीडिया से बात की और कहा, ‘मैंने सुना था कि 75 से ज्यादा की उम्र वालों को टिकट नहीं देंगे. और मैं 76 की हो गई हूं. और इंदौर में एक ही नाम है ‘ताई’. लेकिन फिर भी अभी तक उम्मीदवार के नाम की घोषणा नहीं हुई. तो मुझे लगा कि पार्टी के लोग असमंजस में होंगे, कि ताई तो 76 की हो गई हैं, उन्हें टिकट दिया जाए कि नहीं. इसलिए मैंने सोचा कि मैं खुद ही ये मुश्किल आसान कर दूं. इसलिए मैंने कह दिया कि चुनाव नहीं लड़ूंगी. मैं बीजेपी में हूं. अब एक कार्यकर्ता हूं. आप चाहें तो मुझे वरिष्ठ कार्यकर्ता बोल सकते हैं.’

भले ही इंदौर की ताई का राजनैतिक सफ़र

 खत्म होने की कगार पर है .. लेकिन इनका करियर देखने लायक है …

– महाराष्ट्र के चिपलुन में सुमित्रा महाजन का जन्म 12 अप्रैल 1943 में हुआ. 1965 में इंदौर के जयंत महाजन से शादी हो गई…. फिर सुमित्रा भी इंदौर में बस गईं…. शादी के बाद इंदौर यूनिवर्सिटी, जो अब देवी अहिल्या विश्वविद्यालय है, वहां से MA और LLB किया…… राजनीति में रुचि बढ़ी तो 1982 में नगर निगम चुनाव में हिस्सा लिया…. पार्षद पद की उम्मीदवार बनीं…. यहीं से राजनीतिक सफर की शुरुआत भी की.

– सुमित्रा 1984-85 में इंदौर नगर निगम की उप महापौर रहीं….. उसके बाद उन्होनें  1989 में पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा…. जीत गईं. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश चंद्र सेठी को हराया था……सुमित्रा महाजन ने  इंदौर की तस्वीर पलट कर रख दी…. कई सारे अहम प्रोजेक्ट्स लेकर आईं….जिसकी वजह से वर्तमान में इंदौर की जो तस्वीर है, उसमें उनका का बहुत बड़ा योगदान है….

– सुमित्रा ने बीजेपी के लिए बहुत काम किया… पार्टी  में कई अहम पदों की जिम्मेदारी संभाली…… अपना काम पूरी मेहनत, लगन और ईमानदारी से करती रहीं है ….. इंदौर की जनता से उन्हें बहुत प्यार और सम्मान मिला …… लोग उन्हें अपनी ‘ताई’, यानी बड़ी बहन के रूप में देखते है ….

– जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने, तब सुमित्रा को केंद्रीय मंत्री भी बनाया गया था…. उन्हें मानव संसाधन विकास मंत्री बनाया गया था…. कम्यूनिकेशन एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मिनिस्ट्री भी सुमित्रा को ही सौंपी गई….

– सुमित्रा की छवि एक साफ-सुथरी, ईमानदार और सिंपल नेता की है… उन्होंने हमेशा ही स्पेशल इंटरेस्ट ग्रुप्स से दूरी बनाए रखी……. सुमित्रा ने 2014 में 16वीं लोकसभा का चुनाव लड़ा……और वह . जीत गईं….. ये उनकी सांसद के तौर पर 8वीं जीत थी…. 6 जून 2014 के दिन सुमित्रा को लोकसभा का स्पीकर बनाया गया….. ये जिम्मेदारी भी इंदौर की ‘ताई’ ने बखूबी निभाई…. संसद में अनुशासनहीनता करने की वजह से सुमित्रा ने साल 2015 के अगस्त महीने में कांग्रेस के 25 सांसदों को सस्पेंड किया था….. सुमित्रा ने इसी तरह समय-समय पर कड़े फैसले लेकर खुद को साबित किया….. सुमित्रा वर्तमान में सबसे लंबे समय तक सांसद रहने वाली महिला हैं…..

– करीब 30 साल तक इंदौर की जनता के लिए सुमित्रा महाजन काम करते रहीं… वो भी बिना रुके …. लेकिन  अब चुनाव नहीं लड़ेंगी. बेशक ये एक बहुत बड़ा फैसला है और इसको लेना आसान नहीं होगा उनके लिए.. क्योंकि इंदौर उनका का परिवार बन गया था….. और राजनीतिक रूप से अगर देखा जाए, तो यह  बहुत ही बड़ा बदलाव है. लेकिन इस बात से भी इनकार नहीं कर सकते हम की इंदौर की जनता हमेशा से सुमित्रा महाजन को उनके काम के लिए याद करेगी ….

हमारे देश में महिलाओं का एक खास स्थान है…. हर जगह उन्हें तवज्जों दी जाती है… या फिर कह ले  इन्हें फर्स्ट परेफरेंस दी जाती है .. चाहे वो घर में हो या पूजा पाठ में….देवी शक्ति का बहुत महत्व है यहाँ … वैसे शायद कुछ फेमिनिस्ट लोग मेरी बातों से सहमत नही होंगी और कई तर्क देंगी  … खैर यहाँ मैं वाद विवाद तो करने नहीं आई हूँ … वैसे मैं तवज्जो वाली बात इसलिए कह रही थी क्योंकि यह सच है … अब आप ही देख लीजिये पहले पुरुष मुख्यमंत्री बहुत कम लोगों को याद होगा  लेकिन भारत की पहली महिला मुख्यमंत्री सुचेता कृपलानी याद ही रहती , क्योंकि बचपन से टेक्स्ट बुक में पढाया जाता..वैसे ही कल्पना चावला, इंदिरा गांधी और सरोजिनी नायडू के बारे में भी हम नहीं भूले …

वैसे आपको मीरा कुमार तो याद ही होंगी, भारत की पहली महिला लोकसभा स्पीकर… लेकिन आज हम उनकी बात नहीं करेंगे … आज बात होगी दूसरी महिला लोकसभा स्पीकर की… सुमित्रा महाजन की …सुमित्रा महाजन का दूसरा नाम “ताई” भी है … वैसे आप सोच रहे होंगे भला ये कैसा नाम हुआ “ताई”.. तो जनाब आपको बता दें की सुमित्रा महाजन को लोग इंदौर की ताई भी कहते है… अब आप सोच रहे होंगे .क्यों कहते है इंदौर की ताई जी ?

तो बात दरअसल ऐसी है कि सुमित्रा महाजन ने इंदौर को पूरे 8  बार लोकसभा मेंरेप्रेजेंट  कियाहै …

सुमित्रा महाजन एबीजेपी की वरिष्ठ नेता….. इंदौर को एक अच्छी शक्ल देने वाली नेता है …. वो नेता जो पहली बार 1989 में लोकसभा के मैदान में उतरी थीं…. और फिर लगातार 7 बार उतारते रहीं और जीतते रहीं…..सुमित्रा महाजन वो नेता है जिसे कई साल तक इंदौर की जनता ने प्यार दिया, सम्मान दिया, इज्जत दी…..

 हालांकि आपको बता दें इतनी सफल नेता अब इस बार चुनाव नहीं लड़ेगी….. सुमित्रा महाजन ने खुद इस बात का ऐलान कर दिया है….. उन्होंने कहा है कि वो लोकसभा चुनाव नहीं लड़ना चाहतीं…..

 वैसे हम सबके मन में यह सवाल उठ रहा की ऐसा क्यों है? क्यों वह चुनाव नहीं लड़ना चाहती…. दरअसल, बात कुछ ऐसी है कि लोकसभा चुनाव नज़दीक है…. 11 अप्रैल से 19 मई तक ये चुनाव चलने वाला है …. सभी पार्टियां लोकसभा सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर रही हैं……. इंदौर लोकसभा सीट पर 19 मई को चुनाव होंगे…… यहां पिछले 8 बार से बीजेपी सुमित्रा महाजन को ही उतार रही थी, लेकिन इस बार चुनाव के इतने करीब आने के बाद भी बीजेपी ने प्रत्याशी के नाम को उजागर नहीं किया…… जिसके बाद अब सुमित्रा ने खुद ये कह दिया कि वो लोकसभा चुनाव नहीं लड़ना चाहतीं….

उन्होंने एक ओपन लेटर लिख कर कहा है कि –

भारतीय जनता पार्टी ने इंदौर में उम्मीदवार घोषित नहीं किया. ये अनिर्णय की स्थिति क्यों? संभव है कि पार्टी निर्णय लेने में संकोच कर रही हो. इसलिए मैं ये घोषणा करती हूं कि अब मुझे लोकसभा चुनाव नहीं लड़ना. इसलिए पार्टी अब मुक्त मन से अपना निर्णय ले. निसंकोच होकर फैसला ले. मैंने पार्टी के वरिष्ठों से इस मामले में पहले ही चर्चा कर ली थी, और निर्णय उन्हीं पर छोड़ दिया था. इंदौर के लोगों ने मुझे बहुत प्यार दिया. अपेक्षा करती हूं कि बीजेपी जल्दी ही अपना निर्णय लेगी. ताकि आने वाले दिनों में सभी को अपना काम करने में सुविधा हो, और असमंजस की स्थिति समाप्त हो.

वैसे आपको बता दें कि सुमित्रा महाजन 75 के पार हो गई हैं. मतलब की उनकी उम्र  76 साल की हो चुकी हैं….. इसलिए ऐसी बातें सामने आ रही थी कि बीजेपी शायद इस बार उन्हें टिकट नहीं देना चाहती… और यही कारण है कि अभी तक इंदौर में किसी उम्मीदवार की घोषणा नहीं की… बीजेपी ने एक रेड लाइन बना रखी है…. वो ये है कि 75 उम्र से ज्यादा के उम्मीदवार को एक्टिव टिकट नहीं देना है…… बीजेपी ने लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी जैसे वरिष्ठ नेताओं को भी इस बार टिकट नहीं दिया है..

सुमित्रा महाजन ने चुनाव न लड़ने का ऐलान करने के बाद मीडिया से बात की और कहा, ‘मैंने सुना था कि 75 से ज्यादा की उम्र वालों को टिकट नहीं देंगे. और मैं 76 की हो गई हूं. और इंदौर में एक ही नाम है ‘ताई’. लेकिन फिर भी अभी तक उम्मीदवार के नाम की घोषणा नहीं हुई. तो मुझे लगा कि पार्टी के लोग असमंजस में होंगे, कि ताई तो 76 की हो गई हैं, उन्हें टिकट दिया जाए कि नहीं. इसलिए मैंने सोचा कि मैं खुद ही ये मुश्किल आसान कर दूं. इसलिए मैंने कह दिया कि चुनाव नहीं लड़ूंगी. मैं बीजेपी में हूं. अब एक कार्यकर्ता हूं. आप चाहें तो मुझे वरिष्ठ कार्यकर्ता बोल सकते हैं.’

भले ही इंदौर की ताई का राजनैतिक सफ़र

 खत्म होने की कगार पर है .. लेकिन इनका करियर देखने लायक है …

– महाराष्ट्र के चिपलुन में सुमित्रा महाजन का जन्म 12 अप्रैल 1943 में हुआ. 1965 में इंदौर के जयंत महाजन से शादी हो गई…. फिर सुमित्रा भी इंदौर में बस गईं…. शादी के बाद इंदौर यूनिवर्सिटी, जो अब देवी अहिल्या विश्वविद्यालय है, वहां से MA और LLB किया…… राजनीति में रुचि बढ़ी तो 1982 में नगर निगम चुनाव में हिस्सा लिया…. पार्षद पद की उम्मीदवार बनीं…. यहीं से राजनीतिक सफर की शुरुआत भी की.

– सुमित्रा 1984-85 में इंदौर नगर निगम की उप महापौर रहीं….. उसके बाद उन्होनें  1989 में पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा…. जीत गईं. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश चंद्र सेठी को हराया था……सुमित्रा महाजन ने  इंदौर की तस्वीर पलट कर रख दी…. कई सारे अहम प्रोजेक्ट्स लेकर आईं….जिसकी वजह से वर्तमान में इंदौर की जो तस्वीर है, उसमें उनका का बहुत बड़ा योगदान है….

– सुमित्रा ने बीजेपी के लिए बहुत काम किया… पार्टी  में कई अहम पदों की जिम्मेदारी संभाली…… अपना काम पूरी मेहनत, लगन और ईमानदारी से करती रहीं है ….. इंदौर की जनता से उन्हें बहुत प्यार और सम्मान मिला …… लोग उन्हें अपनी ‘ताई’, यानी बड़ी बहन के रूप में देखते है ….

– जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने, तब सुमित्रा को केंद्रीय मंत्री भी बनाया गया था…. उन्हें मानव संसाधन विकास मंत्री बनाया गया था…. कम्यूनिकेशन एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मिनिस्ट्री भी सुमित्रा को ही सौंपी गई….

– सुमित्रा की छवि एक साफ-सुथरी, ईमानदार और सिंपल नेता की है… उन्होंने हमेशा ही स्पेशल इंटरेस्ट ग्रुप्स से दूरी बनाए रखी……. सुमित्रा ने 2014 में 16वीं लोकसभा का चुनाव लड़ा……और वह . जीत गईं….. ये उनकी सांसद के तौर पर 8वीं जीत थी…. 6 जून 2014 के दिन सुमित्रा को लोकसभा का स्पीकर बनाया गया….. ये जिम्मेदारी भी इंदौर की ‘ताई’ ने बखूबी निभाई…. संसद में अनुशासनहीनता करने की वजह से सुमित्रा ने साल 2015 के अगस्त महीने में कांग्रेस के 25 सांसदों को सस्पेंड किया था….. सुमित्रा ने इसी तरह समय-समय पर कड़े फैसले लेकर खुद को साबित किया….. सुमित्रा वर्तमान में सबसे लंबे समय तक सांसद रहने वाली महिला हैं…..

– करीब 30 साल तक इंदौर की जनता के लिए सुमित्रा महाजन काम करते रहीं… वो भी बिना रुके …. लेकिन  अब चुनाव नहीं लड़ेंगी. बेशक ये एक बहुत बड़ा फैसला है और इसको लेना आसान नहीं होगा उनके लिए.. क्योंकि इंदौर उनका का परिवार बन गया था….. और राजनीतिक रूप से अगर देखा जाए, तो यह  बहुत ही बड़ा बदलाव है. लेकिन इस बात से भी इनकार नहीं कर सकते हम की इंदौर की जनता हमेशा से सुमित्रा महाजन को उनके काम के लिए याद करेगी ….