कोरोना के इलाज में भारत की दवा को बताया था ख’तरना’क, अब इस रिसर्च को लिखने वाले लेखकों ने मांगी माफ़ी

चीन से मिलीभगत के आरोपों के बीच WHO ने कोरोना के इलाज में भारत की गेमचेंजर दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के ट्रायल पर रोक लगा दिया था. WHO ने ये कदम एक पत्रिका द लैंसेट में प्रकाशित एक रिपोर्ट के आधार पर उठाया था, जिसमे दावा किया गया था कि हाइ’ड्रोक्सी’क्लो’रोक्वीन से मरीजों को फायदा होने की बजाये नु’कसा’न हो रहा है. द लैंसेट ऐसी मैगजीन है जो स्वास्थ्य के क्षेत्र में दुनियाभर के रिसर्च प्रकाशित करती है. भारत और चीन के बीच बॉर्डर पर त’नाव के दौरान WHO के इस कदम को लोग WHO और चीन के बीच सांठ-गाँठ के तौर पर देखा जा रहा था. अब इस मामले में नया मोड़ आ गया है. इस तथाकथित रिसर्च आर्टिकल को वापस ले लिया गया है.

द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार इस रिसर्च आर्टिकल को लिखने वाले तीन लेखकों ने कहा है कि वो इस बात की सत्यता को प्रमाणित नहीं कर सकते कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के इस्तेमाल से मरीजों पर बुरा प्रभाव पड़ता है. उन्होंने कहा कि अपनी स्टडी को प्रमाणित करने के लिए हमारे पास कोई डाटा या प्रूफ नहीं है. क्योंकि डाटा देने वाली कंपनी सर्जीफेयर ने इस स्टडी के डाटा की निष्पक्ष समीक्षा करने से इनकार कर दिया है. जब इस रिपोर्ट को लैंसेट मैगजीन ने प्रकाशित किया था तब उसमे कहा गया था कि हाइ’ड्रोक्सी’क्लो’रोक्वीन (HCQ) लेने वाले कोरोना मरीजों के मौ-त की संख्या HCQ नहीं लेने वाले मरीजों की संख्या में ज्यादा है. WHO ने हाइ’ड्रोक्सी’क्लो’रोक्वीन (HCQ) समेत तीन और दवाओं का रैंडमाइज्ड ट्रायल शुरू किया था. उसके बाद WHO ने हाइ’ड्रोक्सी’क्लो’रोक्वीन के ट्रायल पर रोक लगा दी.

जब पूरी दुनिया कोरोना से त्रस्त थी तब भारत ने कई देशों में म’लेरि’या की दवा हाइ’ड्रोक्सी’क्लोरो’क्वीन की सप्लाई की. कई देशों का कहना था कि ये दवा कोरोना के इ’लाज में कारगर सिद्ध हो रही है. भारत ने दुनिया भर में ये दवा भेजी और कई देशों इसके लिए पीएम मोदी और भारत की तारीफों के पुल बाँध दिए. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने तो इसे गेमचेंजर बताया था. अब लैंसेट में इस दवाके खिलाफ आर्टिकल लिखने वाले तीनों लेखकों ने माफ़ी मांगते हुए कहा है, ‘हम संपादकों और पाठकों को हुई किसी भी असुविधा के लिए क्षमा मांगते हैं.’