मनोहर पर्रिकर के परिवार के बारे ये बातें जानना ज़रूरी है

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भारत कि राजनीति में कुछ ही गिने चुने ऐसे नेता है जिनकी छवि एक दम साफ सुथरी है..और इन्हें साफ़ छवि वाले नेताओं में से एक नेता थे मनोहर पर्रिकर जो अपनी सादगी और ईमानदारी के लिए जाने जाते थे..उनकी तारीफ केवल बीजेपी के नेता ही नहीं करते थे बल्कि विपक्षी पार्टियों के नेता भी सरेआम किया करते थे.. जहाँ राजीनीति में परिवारवाद को बढाया जाता है ..वही उन्होंने सियासत में अपने परिवार के लोगों को आगे नहीं बढ़ाया..कुछ लोग तो ऐसे भी होंगे जिन्हें उनके परिवार के बारे में ज्यादा पता भी नहीं होगा ..चलिए तो हम आपको बताते हैं कि पर्रिकर के बाद उनके परिवार में कौन-कौन है और किस पेशे से जुड़े हुए हैं, उन के परिवार के लोग.. मनोहर पर्रिकर जी के दो बेटे हैं…जिनका नाम है, उत्पल और अभिजीत. उत्पल अमेरिका की मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट हैं.. जबकि, अभिजीत एक बिजनेसमैन हैं. उत्पल की पत्नी का नाम उमा सरदेसाई हैं. इन दोनों की लव मैरिज हुई थी..उमा ने यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया से पढ़ाई की है…

इन दोनों का एक बेटा भी है, जिसका नाम है ध्रुव.. अभी कुछ दिनों पहले की ही बात है जब उत्पल ने कहा था कि राजनीतिक जो पद है वो बड़ी मेहनत से मिलते है..इसे कोई भी पुश्तैनी जागीर समझकर हासिल नहीं कर सकता..वही मनोहर जी के दूसरे बेटे अभिजीत बिजनेसमैन हैं.. उनकी शादी उन ही की एक पुरानी दोस्त साई से 2013 में हुई थी .. पेशे से उनकी पत्नी साई फार्मासिस्ट हैं.. आज बेशक ही गोवा के मुख्यमंत्री और पूर्व रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर जी हमारे बीच नहीं हैं। लेकिन उनका पूरा जीवन जनता की सेवा में और उनकी देख रेख में समर्पित रहा.. ये हम सब जानते है कि उनकी डेथ कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से हुए थी ..पर एक सच्चाई और भी है उनके बारे में यह भी है जो बहुत कम लोग जानते हैं.. कि उनकी पत्नी का निधन भी कैंसर से ही हुआ था.


लेकिन उन्होंने अपने निजी दुखों को कभी भी अपने काम और जनता की सेवा पर हावी नहीं होने दिया। लोग यह तो जानते हैं कि होगा कि पत्नी मेधा को खोने के बाद वो अंदर रूप से टूट गए थे परंतु जनता और पार्टी की सेवा में कभी अपना निजी दुख को आड़े ना आने दिया, न ही कभी कहीं अपने आप सबके सामने व्यक्त किया.. बस एक बार पता नहीं कौन से मनोभाव में उन्होंने ख़ुद को एक लेख के माध्यम से व्यक्त किया था..

उन्होंने अपनी निजी पीड़ा पर एक भावुक लेख लिखा था, उस लेख की कुछ अहम बातें हम आपको सुनते है. मनोहर जी ने लिखा कि जब पहली बार गोवा में भाजपा की सरकार बनने जा रही थी , यह सोचकर सभी का उत्साह मन के बाँध तोड़ने को आतुर था। मेरे निकट के मित्र, गोवा के भिन्न-भिन्न भागों से आए हुए बहुत सारे कार्यकर्ता इस शपथ समारोह के कार्यक्रम में दिखाई दे रहे थे.. इन सभी की वहाँ उपस्थिति का कारण एक ही था, मुझे मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेते हुए देखना। मैंने जिनके साथ राजनीति में प्रवेश किया ऐसे मेरे सहकारी, मेरे हित-चिन्तक, पार्टी के कार्यकर्ताओं की इस भारी भीड़ में मुझे मेरे दोनों बेटे, भाई-बहन सभी लोग दिखाई दे रहे थे। परन्तु फिर भी सामने दिखाई देने वाला चित्र अधूरा सा था..वो चित्र था मेरी पत्नी मेधा, और मेरे माता-पिता का ,इन तीनों में से कोई भी उस भीड़ में नहीं था। मुझे बहुत तेजी से इन तीनों की याद आ रही थी। मैंने जिस बात की कभी कल्पना तक नहीं की थी, वह अब सच होने जा रही थी, अर्थात मैं गोवा का मुख्यमंत्री बनने जा रहा था, परन्तु फिर भी इस आनंद के क्षण में दुखों के पल भी मैंने अपने भीतर समाए हुए थे

मुख्यमंत्री बनने बाद भी पर्रिकर जी अपने मामूली घर में रहना जारी रखा। लग्जरी वाहनों का इस्तेमाल नहीं किया। उन्होंने उसी गाड़ी इनोवा का इस्तेमाल किया जो गाड़ी नेता रहते हुए उन्हें मिली थी। वह भ्रष्टाचार को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करते थे। अपने डेडलाइन के लिए अडिग रहते थे। उन्होंने गोवा में अवैध खनन को रोकने के लिए कई व्यपारियों के लाइसेंस रद्द किये थे ..इसलिए उन्हें गोवा का मिस्टर क्लीन मुख्यमंत्री कहा जाता था. अंतिम समय तक उनका जज्बा देखने लायक था..उन्होंने अंतिम समय तक अपनी ड्यूटी पूरी की.आज वो हमारे बीच नहीं है..लेकिन जो उन्होंने अपने देश और अपने लोगों के लिए किया है ..वो हम कही नहीं भूल पाएंगे..