ब्रिटिश प्रशासित आयरलैंड की कहानी जिसे ब्रिटेन का कश्मीर कहा जाता है

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बीबीसी, यानी कि ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कम्पनी लिमिटड ब्रिटेन की न्यूज एजेंसी है . बीबीसी अक्सर कश्मीर को भारत प्रशासित कश्मीर (Indian Administrated Kashmir) बताता है, यानी कि वो कश्मीर जहाँ पर भारतीय प्रशासन चलता है. कुछ यूजर्स में भ्रम है कि भारत प्रशासित कश्मीर और भारत अधिकृत कश्मीर एक ही है लेकिन ऐसा है नहीं . अधिकृत का मतलब होता है जिस पर जबरदस्ती कब्ज़ा किया जाए . कश्मीर हमेशा से भारत का अभिन्न हिस्सा रहा है लेकिन इसके बावजूद बीबीसी का भारत प्रशासित कश्मीर कह कर नकारात्मक रिपोर्टिंग करना लोगों को खल गया .

लोग कश्मीर पर बीबीसी की रिपोर्टिंग की आलोचना करते हुए उसे याद दिलाने लगे कि कश्मीर छोड़ कर बीबीसी को आयरलैंड पर ध्यान देना चाहिए . सोशल मीडिया पर अचानक से आयरलैंड ट्रेंड होने लगा . लोगों ने सवाल उठाये कि बीबीसी नॉदर्न आयरलैंड को ब्रिटेन प्रशासित आयरलैंड क्यों नहीं कहता?  दरअसल आयरलैंड ट्रेंड होने के पीछे एक ख़ास वजह थी. उत्तरी आयरलैंड जिसे नॉदर्न आयरलैंड भी कहते हैं, वो ब्रिटेन के लिए एक नासूर बन चूका है. नॉदर्न आयरलैंड लम्बे समय से ब्रिटेन से आज़ादी के लिए हिंसा की आग में झुलसता रहा . नॉदर्न आयरलैंड वो इलाका है जो दशकों से ब्रिटेन के कब्जे में है. आज हम आपको बताते हैं ब्रिटेन अधिकृत आयरलैंड के बारे में. क्यों ये हिस्सा सुलग रहा है.

क्या है आयरलैंड समस्या

ग्रेट ब्रिटेन जिसने दशकों तक दुनिया भर पर राज किया दरअसल चार साम्राज्यों का एक समूह है और इसलिए यूनाइटेड किंगडम कहलाता है . ये चार साम्राज्य हैं –  इंग्लैंड, नॉदर्न आयरलैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स… नॉदर्न आयरलैंड ब्रिटेन के पश्चिम में एक छोटा सा द्वीपनुमा हिस्सा है। वैसे तो अगर आप नक़्शे में देखें तो आयरलैंड खुद में एक द्वीप है और एक स्वतंत्र राष्ट्र है लेकिन आयरलैंड के उत्त्तरी हिस्से जिसे नॉदर्न आयरलैंड कहते हैं वो ब्रिटेन के अधीन है. आयरलैंड 19 वीं सदी में ब्रिटेन का गुलाम रहा और 1920 में इसे आज़ादी मिली . आयरलैंड आज़ाद तो हुआ लेकिन भारत और पाकिस्तान की तरह दो हिस्सों में बंट गया . उत्तरी आयरलैंड जो नॉदर्न आयरलैंड कहलाया और दक्षिणी आयरलैंड जो रिपब्लिक ऑफ आयरलैंड के नाम से अस्तित्व में आया . नॉदर्न आयरलैंड एक स्वतंत्र राज्य बना लेकिन ब्रिटेन के अधीन रहा .

आयरलैंड के बंटवारे की वजह

ईसाई धर्म दो धड़ों में बंटा हुआ था . एक धड़ा कैथोलिक था और दूसरा धड़ा था प्रोटेस्टेंट. 17वीं शताब्दी में इंग्लैंड के एक प्रोटेस्टेंट राजा ने आयरलैंड के कैथलिक राजा को हरा कर पूरे आयरलैंड पर कब्ज़ा कर लिया. उत्तरी आयरलैंड में बड़ी आबादी किंग विलियम के द्वारा बसाये गए प्रोटेस्टेंट धड़े के लोगों की थी और वो कैथलिक लोगों के साथ नहीं रहना चाहते थे लिहाजा जब आयरलैंड को आज़ादी मिली तो वो दो हिस्सों में बंट गया .

आयरलैंड में खुनी संघर्ष का कारण

उत्तरी आयरलैंड में दो पार्टियाँ हैं – यूनियननिस्ट पार्टी और  रिपब्लिकन पार्टी . यूनियनिस्ट पार्टी चाहती है कि नॉदर्न आयरलैंड का इंग्लैण्ड में विलय हो जाए जबकि रिपब्लिकन पार्टी का मामना है कि दोनों आयरलैंड को एक हो जाना चाहिए .इसलिए रिपब्लिकन पार्टी को राष्ट्रवादी कहा जाता है . 1920-21 में आयरलैंड का बंटवारा हुआ. तब ब्रिटेन ने आयरलैंड की 32 में से केवल 26 काउंटी को ही आजाद किया जबकि बाकी छह काउंटी पर आज भी कब्जा कर रखा है.

उत्तरी आयरलैंड में अल्प्संख्यक कैथलिक समुदाय बहुत ही बुरी स्थिति में रह रहे थे . कैथलिक और प्रोटेस्टेंट लोगों के रहने के लिए कॉलोनियां अलग अलग बसाई गई, बच्चों के स्कूल अलग बनाए गए, यहां तक कि उनके चर्च भी अलग हैं. 1969 में उत्तरी आयरलैंड में नागरिक अधिकारों के लिए अभियान शुरु हुए. आयरिश रिपब्लिकन आर्मी का गठन हुआ .. अपने अधिकारों के लिए उन्होंने ब्रिटेन के खिलाफ विद्रोह कर दिया . उनका टकराव ब्रिटिश सेना और पुलिस से होने लगा। नॉदर्न आयरलैंड की गली गली एक युद्धक्षेत्र में तब्दील हो गयी.

दक्षिणी आयरलैंड यानी कैथलिक बहुल आयरलैंड, नॉदर्न आयरलैंड को अपने साथ मिलाना चाहता था, लिहाजा उसने आयरिश रिपब्लिकन आर्मी को मदद देनी शुरू कर दी . चप्पे-चप्पे पर सेना के चेकपॉइंट, निगरानी रखने के लिए वॉच टावर बनाए गए। विद्रोहियों के खिलाफ दमन चक्र चलाये गए. इस संघर्ष में ब्रिटिश सेना की तरफ से नागरिक अधिकारों का भी खूब उल्लंघन किया गया. आयरलैंड में दमनचक्र के दौरान रिपोर्टिंग पर रोक लगा दी गई ताकि खबरें बाहर न आ सकें.

आयरिश रिपब्लिकन आर्मी अपनी आवाज दुनिया तक पहुँचाना चाहती थी लिहाजा उसने ब्रिटेन में बम धमाके करने शुरू किये . इसी तरह के एक धमाके में लार्ड माउंटबेटन की मौत हो गई . वही लार्ड माउंटबेटन जो भारत के आखिरी वायसराय और आज़ाद भारत के पहले गवर्नर जनरल थे .

1998 में संघर्ष विराम हुआ और एक समझौता किया गया. ये समझौता गुड फ्राईडे या बेलफ़ास्ट समझौता के नाम से मशहूर हुआ . संघर्ष विराम तो हुआ लेकिन दिलों की खाई कम नहीं हुई. आज भी कैथलिक और प्रोटेस्टेंट लोगों के रहने के लिए कॉलोनियां, बच्चों के स्कूल और चर्च अलग अलग ही हैं. आज भी नॉदर्न आयरलैंड की आज़ादी की मांग उठती रहती है और प्रदर्शन होते रहते हैं. यूनाइटेड किंगडम यूरोपियन यूनियन से अलग हो रहा है. अगर ऐसा होता है तो नॉदर्न आयरलैंड के लोगों के सीने में आज़ादी की दबी चिंगारियां फिर सुलग सकती है. सोशल मीडिया पर लोगों ने बीबीसी के कश्मीर पर निगेटिव रिपोर्टिंग का जवाब ट्विटर पर आयरलैंड को ट्रेंड करा कर दिया .