इंदौर में हुआ बच्चों पर पथराव

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इंदौर से एक मानवता को शर्मसार कर देने वाला किस्सा सामने आया है. नर्सरी से आठवीं कक्षा के स्कूली बच्चों पर पथराव कर उन्हें ज़बरदस्त तरीके से घायल कर देने के अपराध से पूरे मध्य प्रदेश में सनसनी फ़ैल गयी है. हुआ यूँ कि सोनी इंटरनेशनल स्कूल कि बस नेमावर रोड से बच्चों को लेकर जा रही थी जिसमें करीब 50 बच्चे थे. बस के अचानक ब्रेक फैल हो गए. इसके बाद बस के आगे एक बकरी का बच्चा आ गया. ड्राईवर मुकेश कुशवा ने हैण्ड ब्रेक का इस्तेमाल किया लेकिन बकरी का बच्चा नहीं बच सका और बस खेत में चली गयी.

बकरी के बच्चे कि मौत के बाद ग्रामीण आक्रोशित हो गए. और उन्होंने बस को घर लिया. सबसे पहले एक महिला जिसका नाम रिजवाना था वो बस में चढ़ गयी और उसने ड्राईवर कि पिटाई कर दी. ड्राईवर को पीटने के बाद रिजवाना के बेटे मोहम्मद अल्पेश ने आवाज लगा कर सभी ग्रामीणों को बुला लिया. इसके बाद ग्रामीणों ने बस पर पथराव करना शुरू कर दिया. मासूम बच्चे चीखने और चिल्लाने लगे. लेकिन पथराव कम नहीं हुआ. पथराव के कारण पूरी बस के शीशे के टुकड़ों से बच्चों को काफी चोट भी आई. बस में टीचर पल्लवी पांधे के साथ बस ड्राईवर और कंडक्टर ने भीड़ के आगे हाथ पाँव जोड़े कि वे पथराव न करें लेकिन फिर भी भीड़ को रोते हुए मासूम बच्चों पर दया नहीं आई और भीड़ पथराव करती रही. भगवान का शुक्र है कि पास में ही 12 कक्षा कि परीक्षा चल रही थी जहाँ पुलिस का एक जवान तैनात था. बच्चों कि चीख सुनकर जवान ने भीड़ को शांत किया.

सब इंस्पेक्टर सुंदर लाल पटेल के मुताबिक रफीक, शकील, रसीद, आरिफ, साबिर, हकीम, नईम, नासिर, जावेद, नौशाद, मो.अल्पेश, रिजवाना बाई के खिलाफ केस दर्ज कर आठ को गिरफ्तार कर लिया गया है. वही आयुष चौधरी (आठवीं), मयंक पटेल (छठी), निहारिका (केजी सेकंड), सुजल चौधरी (सातवीं), नवीन डांगी (पांचवीं), राघव डांगी (चौथी), आर्यन राणा (आठवीं), अनुराग चौधरी (छठी), निधि राणा (केजी सेकंड) को कांच फूटने से चोट आई है. सभी को उपचार के लिए एम वाय अस्पताल लाया गया. सुनने में बहुत अजीब लगता है कि एक हादसे में बकरी के बच्चे का मर जाना और फिर भीड़ द्वारा बच्चों पर जानलेवा हमला कर देना.

दोस्तों आपने कुछ शब्द जैसे असहिष्णुता, संविधान बचाना, अभिव्यक्ति कि आजादी, अवार्ड वापसी और न जाने क्या क्या सुने होंगे. लेकिन जब मध्य प्रदेश, वेस्ट बंगाल और राजस्थान जैसे राज्यों में ऐसी घटनाएँ होती है तो असहिष्णुता, संविधान बचाना और अभिव्यक्ति कि आजादी जैसे सवालों को क्यों नहीं उठाया जाता. क्या आज नसीरुद्दीन शाह जैसे लोगों को डर नहीं लग रहा? क्या ये असहिष्णुता नहीं है जहाँ एक हादसे के बाद एक विशेष समुदाय बच्चों को निशाना बना लेता है.

दरअसल मध्य प्रदेश में हाल ही में ऐसी घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है. बीते रिपब्लिक डे सेलिब्रेशन में तो स्कूली बच्चों पर तलवारों से ही हमला कर दिया गया था जिसमें कई बच्चे घायल हो गये थे. और साहब तुष्टिकरण कि राजनीति का कुछ ऐसा बोल बाला है कि ऐसे मामलों को या तो रिपोर्ट नहीं किया जाता या फिर इन अपराधों पर उतनी कड़ी कार्यवाही नहीं होती. इस मामले को भी किसी बड़े अखबार या चेनल ने कवर नहीं किया. लेकिन आजकल तो सोशल मीडिया का ज़माना है. और सोशल मीडिया से कुछ छिप नहीं सकता. इस खबर को ट्विटर और फेसबुक पर खूब वाईरल किया गया. एक वेबसाइट इ पोस्ट मोर्टेम डॉट org ने इस मामले को उजागर किया और फिर एक ट्विटर यूजर रवि भधोरिया ने इस खबर को शेयर किया. वे लिखते हैं, ”बकरी का बच्चा कुचले जाने पर समुदाय विशेष का स्कूल बस पर हमला, 9 बच्चे घायल”.

जब हम ऐसे मामलों को देखते हैं तो ये समझ नहीं आता है कि मीडिया का एक धड़ा ऐसे संवेदनशील मुद्दे को क्यों नहीं उठाया जाता. ऐसे ही जब गाय से जुड़े मामलों पर केशुअल्टी होती है तो यही लोग बहस करते हैं कि गाय कि जान प्यारी है या इंसान की. इस बात पर बहस होनी चाहिए. ठीक वैसे ही यहाँ भी ये बहस होनी चाहिए थी कि बच्चों कि जान प्यारी है या बकरी की. लेकिन अफ़सोस ऐसा कुछ नहीं हुआ. खैर ये हमारी जिम्मेदारी है कि आप इन मुद्दों को देखे और समझे कि हमारे समाज ऐसे विकृत मानसिकता के लोग रहते हैं.

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