ये नहीं सुधरने वाले, वन्दे भारत एक्सप्रेस पर पत्थर फेंकने वाले क्या चाहतें हैं?

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कभी कभी कुछ खबरें देख सुन कर ऐसा लगता है.. कि हमारे देश का कुछ हो ही नहीं सकता.. जहाँ हैं वहीँ रह जायेंगे यहाँ की स्थिति नहीं सुधर सकती.. और इसका जिम्मेदार आप सरकार और प्रशासन को तब तक नहीं ठहरा सकते जब तक आप खुद नहीं सुधर जायें.. अब हाल ही की बात ले लीजिये हमारे देश में सबसे तेज़ गति से चलने वाली ट्रेन बनाई गई वन्दे भारत एक्सप्रेस.. जिसे वाराणसी से दिल्ली के बीच चलाया गया.. मगर ट्रेन को क्या पता था कि जाहिलों की फौज उसके स्वागत में पत्थर लेकर खड़ी हुई है.. ट्रेन कानपुर जिले के सरसौल स्टेशन पर पहुँची और कुछ जाहिलों ने उस पर पत्थर फेंकने शुरू कर दिए.. जिसमें ट्रेन के 9 शीशे टूट गए और 2 यात्रियों को चोटें भी आई…

हालाँकि इसके बाद उन अज्ञात पत्थरबाज़ों के खिलाफ वाराणसी के पुलिस स्टेशन में मुकदमा दर्ज हो चुका है और उम्मीद है जल्द ही यह शिकंजे में आ जायेंगे.. लेकिन आपको बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है इससे पहले जनवरी में ट्रेन के ट्रायल रन के दौरान भी ऐसे ही कुछ गंवारों ने ट्रेन पर पत्थर फेंके थे..

उसके बाद फरवरी में जब ट्रेन में pessengers थे तब भी यह हुआ और वन्दे भारत पर पत्थर फेंकने की यह हरकत चौथी बार हुई है, पता नही इन्हें क्या मजा आता है यह सब देखकर हम यही कह सकते हैं कि यह नही सुधरने वाले.. आप विकास विकास चिल्लाते रहिये.. जनता का सहयोग मांगते रहिये और जनता ऐसे आपको जवाब देती है.. चलती ट्रेन पर हमला करती है, पत्थर मारती है.. कभी ट्रेन्स में से मग्गे गायब हो जाते हैं.. कभी सीट्स फटी हुई मिलती हैं.. कभी उसके कम्बल तकिये गायब मिलते हैं..  

आप स्वच्छता स्वच्छता का पाठ सिखाते रहिये.. टॉयलेट्स बनवाते रहिये इनको मगर फिर भी खुले में ही जाना है..

इनको इसमें कबाड़ भरना होता है.. 2 रूपये खर्च करके पब्लिक टॉयलेट का इस्तेमाल ना करके इनको खुले में ही पेशाब करना होता है…

सरकारी आंकण के मुताबिक पिछले 4 साल में स्वच्छ भारत अभियान के तहत लगभग 9.5 करोड़ टॉयलेट्स का निर्माण हुआ लेकिन जब उनका सेकंड राउंड वेरिफिकेशन हुआ तो पता चला कि सिर्फ 15% टॉयलेट्स का सही इस्तेमाल हो रहा है.. कहीं टॉयलेट्स में भुस भरा हुआ मिला, कहीं गोबर, कहीं कबाड़.. यह तो इन टॉयलेट्स के हालात हैं और जब उनसे यह पूछा गया कि आप इन टॉयलेट्स का इस्तेमाल क्यूँ नही कर रहे तो कुछ ऐसे जवाब मिले

source : BBC

भारत में अधिकतर रेप केसेस खुले में शौच में जाने वाले औरतों के साथ होते हैं.. इसलिए स्वच्छता के साथ साथ औरतों की सुरक्षा भी इन टॉयलेट्स के बनवाने के पीछे एक बड़ी वजह थी मगर यह महिलाएं भी खुद इनका इस्तेमाल ना करने की बजाए वहां उनके कपडे टांगते हुए दिखी..

कहीं कोई दंगा भड़का तो पब्लिक प्रॉपर्टीज जलनी शुरू हो जाती हैं.. पब्लिक ट्रांसपोर्ट्स, पब्लिक बिल्डिंग्स में आग लगाई जाती है और यह सब करने वाले लोग यही भूल जाते हैं कि यह सब कुछ पब्लिक का ही है.. उन्ही के टैक्स से आये पैसे से ही यह सारी सुविधायें, schemes लाई जाती हैं डेवलपमेंट किया जाता है.. इनका नुकसान करके आप अपना नुकसान करते हैं.. फिर आप ही को मिलने वाली चीज़ें महंगी होती हैं.. आप ही से एक्स्ट्रा टैक्सेज वसूले जाते हैं.. और फिर  देश के अन्दर ही रह रहे इन देश द्रोहियों की हरकतों की सजा सबको भुगतनी पड़ती है और इसीलिए अब अगर यह कहा जाये कि हम विकास deserve ही नहीं करते गलत नही होगा.. क्यूंकि कमी सरकार या प्रशासन में नहीं इनकी सोच में है.. जिस से निकल पाना इनके लिए बहुत मुश्किल है… इसीलिए हर 5 साल में नेता आते हैं.. अपनी जेबें भरते हैं और 5 साल बाद निकल जाते हैं क्यूंकि अपने हालातों को सुधारने में आपको खुद ही दिलचस्पी नहीं है.. और इसीलिए आप कि स्थिति ज्यों कि त्यों रह जाती है.

और अफ़सोस कि तब तक हम सरकार और प्रशासन से कोई जवाब नही मांग सकते जब तक हमारी सोच का ही विकास नहीं होता.