वाराणसी में सपा में मचा सकता है घमासान, शालिनी यादव की जगह तेज बहादुर को बनाया गया प्रत्याशी

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वाराणसी से चुनाव लड़ने वाला सभी नेता सुर्ख़ियों है. खुद प्रधानमंत्री यहाँ चुनाव लड़ रहे हैं इससे जो भी नेता उनके खिलाफ खड़ा हो रहा है वो सुर्ख़ियों में है. लेकिन सबसे अधिक चर्चा में हैं अभी बीएसएफ के पूर्व जवान तेज बहादुर.. जो पहले ही प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने की बात कह चुके थे लेकिन किसी पार्टी ने भाव नहीं दिया तो वे निर्दलीय ही चुनाव लड़ने में लग गये.. पर्चा दाखिल कर दिया.. इसी बीच प्रियंका गांधी के चुनाव लड़ने की चर्चा चरम पर थी वे खुद यहाँ से चुनाव लड़ने की बात कह चुकी थी लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के वारणसी रोड शो से अहम् पहले अजय राय को टिकट दे दिया गया.. अब सपा ने भी शालिनी यादव को टिकट दे दिया जो कांग्रेस छोड़कर आई थी. अब अपना समीकरण फिट करने के लिए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तेज बहादुर को अपना सिम्बल दे दिया है. मतलब अब तेजबहादुर सपा के प्रत्याशी है लेकिन अब शालिनी का क्या होगा… खबर थी कि अगर इस सीट से प्रियंका चुनाव लडती है तो विपक्ष की साजा उम्मीदवार हो सकती है लेकिन ऐसा हुआ नहीं.. तो सपा ने शालिनी यादव को कांग्रेस से सपा में बुलाया.. और शालिनी बाय बाय बोलकर बीजेपी में आ गयी. शालिनी के पिता कांग्रेस पार्टी में रह चुके हैं. लखनऊ में प्रेस कनफ़्रेंस कर अखिलेश ने उन्हें पार्टी में शामिल कराने का एलान किया. इसके तुरंत बाद शालिनी को वाराणसी से टिकट भी मिल गया.

जब प्रियंका गांधी को वाराणसी से टिकट नहीं मिला या उन्होंने लड़ने से इनकार कर दिया तब कांग्रेस के इस फैसले के बाद से ही अखिलेश यादव के कैंप में प्रत्याशी बदलने की चर्चा तेज हो गई. 29 अप्रैल के नामांकन करने ती आख़िरी तारीख थी. लखनऊ से वाराणसी ये संदेश भेजा गया कि शालिनी आख़िरी दिन पर्चा भरेंगी. जिले में बीएसपी नेताओं को भी ये बता दिया गया. नामांकन की तैयारी होने लगी. इसी दौरान अखिलेश यादव को फ़ीडबैक मिलने लगा था कि शालिनी कमजोर है.. ठीक से नहीं लड़ पायेंगी. फिर अखिलेश यादव का माथा ठनका.. और इधर शालिनी यादव का स्वागत ढोल नगाड़े से हो रहा था. कार्यकर्ताओं में जय जय कार हो रही थी.. मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए तैयार कर रही थी लेकिन अहम् मौके पर नया फरमान सामने आ गया कि शालिनी यादव अब सपा की उम्मीदवार नहीं होगी.. सपा की तरफ से बीएसएफ के पूर्व जवान तेज बहादुर यादव चुनाव प्रत्याशी होंगे… जो मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे.. और अखिलेश यादव के जातीय और लगभग हर समीकरण में तेज बहादुर यादव फिट बैठते हैं.

सपा द्वारा पहले ही घोषित प्रत्याशी शालिनी यादव का टिकट काट दिये जाने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इस बारे में पार्टी से ही पूछें तो बेहतर है. हालाँकि जब तेज बहादुर को सपा ने टिकट दे दिया है इसके बावजूद भी शालिनी ने पर्चा भर दिया है. अब इसके क्या मायने निकाले जाएँ. एक ही सीट से एक ही पार्टी के दो उम्मीदवारों ने पर्चा भरा है. शालिनी यादव कांग्रेस के पूर्व सांसद और राज्यसभा के पूर्व उपसभापति श्यामलाल यादव की पुत्रवधू हैं. यहाँ आपको यह भी बताना जरूरी है कि साल 2014 लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी के सामने अरविन्द केजरीवाल ने चुनाव लड़ा था. इस मुकाबले में कुल 42 प्रत्याशी मैदान में थे. जिसमें से 20 उम्मीदवार निर्दलीय थे. नरेंद्र मोदी ने आसान मुकाबले में केजरीवाल को 3,71,784 मतों के अंतर से हराया था. मोदी को कुल पड़े वोटों में 581,022 यानी 56.4% वोट हासिल हुए जबकि आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी अरविंद केजरीवाल के खाते में 2,09,238 (20.3%) वोट पड़े.

वहीँ तीसरे नंबर पर थे कांग्रेस के अजय राय जिन्हें मात्र 76614 वोट मिले थे. हालाँकि इस बार भी अजय राय ही कांग्रेस के प्रत्याशी है और सपा बसपा की तरफ से अब तेज बहादुर यादव प्रत्याशी है. तेज बहादुर यादव को बीएसएफ से अनुशासन हीनता का दोषी मानते हुआ निष्काषित कर दिया दिया था. अब देखने वाली बात हैं कि इतनी उलटफेर करने के बाद आखिर कार मोदी की राह रोकने में विपक्ष को कितनी सफलता मिलती है.