बिहार में महागठबंधन नेताओं के बयान से तेजस्वी को लगा बड़ा झटका

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दिल्ली विधानसभा चुनाव ख’त्म हुए अभी एक हफ्ता भी नही बीता है. वहीं दूसरी तरफ अभी से बिहार को लेकर राजनीति गरमाने लगी है. जबकी बिहार चुनाव में अभी काफि वक्त बचा है या कह सकते है कि 8 महीने से ज्यादा का समय बचा है. लेकिन बिहार में अभी से ही विधानसभा चुनाव की तैयारियां सभी विपक्षी पार्टियों ने शुरू कर दी है. शुक्रवार को चुनावी तैयारियों को लेकर पटना में महागठबंधन के सभी नेताओं ने बैठक की. महागठबंधन के नेताओं ने एक साथ मिलकर चुनाव पर चर्चा के लिए एक जगह बैठक बुलाई. वहां पर राजद नेता तेजस्वी यादव भी मौजूद रहें.

इस बैठक में तेजस्वी यादव को विप’क्षी पार्टीयों ने अपना नेता मानने से मना कर दिया है. इनका कहना था कि शरद यादव को मुख्यामंत्री उम्मीदवार बनाने की मांग की है. शुक्रवार को जो बैठक हुई, उसमें महागठबंधन के तीन दलों के नेता जीतन राम मांझी (HAM), उपेंद्र कुशवाहा (RLSP) और मुकेश साहनी  (VIP) ने पटना में लोकतांत्रिक जनता दल प्रमुख और पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव को सीएम पद का उम्मीदवार बनाने की मांग उठाई है. इस बैठक में देखने वाली बात ये रही कि कांग्रेस या आरजेडी के किसी भी नेता को बैठक के लिए न्योता नहीं दिया गया था. बता दें कि मुकेश साहनी की पार्टी ने उप-चुनाव में अच्छी खासी पकड़ बनाली है. सुनने में ये भी आ रहा था कि मुकेश साहनी की पार्टी को भाजपा अपने एनडीए के घटकदल में या बिहार के गठबंधन में शामिल कर सकते है.

दरअसल, सूत्रों के मुताबिक, उपेंद्र कुशवाहा और मुकेश साहनी ने आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के महागठबंधन के नेता होने पर सवाल खड़े कर दिए हैं. लेकिन यहां पर अभी तक मुकेश साहनी बिहार के महागठबंधन के साथ खड़ा दिख रहा है. लेकिन महागठबंधन के कई नेता इस बात को लेकर नाराज हैं कि आरजेडी ने एकतरफा फैसला करते हुए तेजस्वी को महागठबंधन का नेता और मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित कर रखा है. उनका कहना है कि तेजस्वी को मुख्यमंत्री का चेहरा बनाने को लेकर महागठबंधन के किसी भी दल से कोई विचार-विमर्श नहीं किया गया है.

इस बैठक के बाद आरजेडी प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि ‘शरद यादव वरिष्ठ नेता हैं और वह तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बनने का आशीर्वाद जरूर देंगे.’ मृत्युंजय तिवारी बोले कि महागठबंधन में मुख्यमंत्री का चेहरा तेजस्वी यादव ही हैं और इसको लेकर किसी भी दल को कोई कंफ्यूजन नहीं होना चाहिए.  इस बैठक के बाद तो ऐसा लग रहा है की महागठबंधन में अभी से फूट पड़ने लगी है. बाकी, बिहार के चुनाव की तारीख घोषित होने के बाद असलियत क्या है वो तब ही पता चलेगा.