चुनावी डर से दिल्ली की कुछ जगह नही जाते केजरीवाल, जानिये कौन सी है वो जगह

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दिल्ली विधानसभा 2020 का चुनाव प्रचार का आज आखिरी दिन है जो की शाम 5 बजे से थम जायेगा. दिल्ली चुनाव भी बाकी चुनाव की तरह ही अपने आखरी पड़ाव पर आते-आते धर्म की राजनीति पर आकर खड़ा हो गया है. जामिया मिलियां, शहीन बाग ये सारे मु’द्दे सबसे ज्यादा दिल्ली चुनाव में गरम रहे. बीजेपी ने तो इस शाहीन बाग को पूरी तरह से चुनाव का मु’द्दा बनाया है,ऐसा केजरीवाल का कहना है. लेकिन बीजेपी का शाहीन बाग को लेकर  स्टैंड साफ़ है. बीजेपी के कुछ मंत्रीयों के बयान भी आये और उनके ऊपर चुनाव आयोग का हटंर चला, जिसकी वजह से उनके प्रचार पर कुछ दिन का विराम लगा दिया गया. कल बीजेपी के एक नेता ने कहा था कि अगर बीजेपी की सरकार दिल्ली मे बनती है तो, शाहीन बाग पर हम कार्यावाई करेंगे.

बीजेपी ने शाहीन बाग को लेकर सीएम अरविंद केजरीवाल पर कई सवाल उठाए. भगवा दल ने उनके शाहीन बाग और जामिया नहीं जाने को लेकर भी सवाल पूछे. क्योकि केजरीवाल अपने इंटरव्यू में कहते नजर आये है की ‘दिल्ली के हर आदमी के साथ मैं खड़ा हूँ.’ लेकिन जब बात शाहीन बाग और जामिया मिलियां की आती तो केजरीवाल अपनी ही कही बातों से पलटते हुए नजर आते हैं और उल्टा बीजेपी के ऊपर ये आ’रोप लगाने लगते है कि बीजेपी अगर CAA नही लाती तो आज लोग शाहीन बाग पर ध’रना नही देते.

केजरीवाल शाहीन बाग को लेकर अपना पल्ला झाड़ते हुए नजर आते हैं. अभी गो’ली का’ण्ड में जिस शख्स का नाम सामने आया है. उसके तारे AAP से जुड़ते नजर आ रहे हैं. इस पर AAP पार्टी कोई भी जवाब नही दे रही है और अपने को बचाने की कोशिश कर रही है. केजरीवाल कहते है की शाहीन बाग में ‘मेरी कोई भूमिका नही है और मेरी कुछ सीमाएं हैं.’ मैंने दिल्ली का चीफ मिनिस्टर हूँ. तो मैं याद दिला दूँ केजरीवाल को की वो खुद अपने पुराने बयान को देखें जिसमे उन्होंने कहा था कि “ मैंने दिल्ली के हर आदमी के साथ खड़ा हूँ”.

केजरीवाल ने आगे कहा कि मैंने शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और पानी के लिए सिर्फ जिम्मेदार हूं. मैं उस मामले में टांग नहीं अड़ाना चाहता हूं. यह CAA और NRC को लेकर कानून-व्यवस्था से जुड़ा मसला है और मेरी उसमें कोई भूमिका नहीं है.

दरअसल, केजरीवाल ने ये भी कहा कि कॉलेजों में हिं’सा और राजनीति करना अच्छी बात नहीं है. हम सभी अपने बच्चों को वहां अपना भविष्य बनाने के लिए भेजते हैं. न की वहां पर हिं’सा या आ’गजनि करने के लिए नही भेजते है. इस तरह की हिं’सा लोगों और उनके बच्चों में असुरक्षा की भावना पैदा करती है. पूरे देश में लोग असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. केजरीवाल का ये स्टैंड समझ नही आ रहा है. आज वो कह रहे है की ये जो कॉलेज में बच्चे हिं’सा या तो’ड़फो’ड़ कर रहें है वो सही नही है. तो क्या ये चुनावी दांव-पेंच चलने की कोशिश कर रहे है. क्योकि ये वही केजरीवाल है जो कुछ ऐसे लोग जो हिंसा या देश के टुकड़े करने की बात कर रहे थे तब उनके साथ भी खड़े थे लेकिन आज चुनाव को देखते हुए अपना पल्ला झाड लिया है.