तो हार का ठीकरा अब जमीनी कार्यकर्ताओं पर फोड़ने की हो रही है तैयारी?

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लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार से कांग्रेस की कमर टूट चुकी हैं. इस्तीफों का दौर खूब चला खुद राहुल गांधी ने हार की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की पेशकश की थी लेकिन उनका इस्तीफा मंजूर नही किया गया.. इसके बाद वे कुछ दिन के लिए शान्ति की तलाश में विदेश चले थे वापस आये जब संसद में नए सांसदों का शपथ ग्रहण हो रहा था. राहुल गाँधी सदन में शपथ लेने शाम को पहुंचे…लेकिन वे यहाँ भी ट्रोल होने नही बच पाए.. क्यों ये हम आपको आगे बातायेंगे लेकिन अभी हम बात करने जा रहे हैं राहुल गांधी की बहन और कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी की.. एक तरफ जहाँ राहुल गाँधी कांग्रेस को मिली करारी हार की जिम्मेदारी लेते हुए अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने पर अड़े हुए हैं. ऐसा हम नही कह रहे हैं बल्कि खबरे ही ऐसी हैं. फिर लगने लगा कि गांधी परिवार की तरफ से हार की जिम्मेदारी ले ली गयी है और किसी गैर गांधी परिवार कांग्रेसी को अध्यक्ष बनाया जा सकता है लेकिन अब दूसरी तरफ उनकी बहन हार का जिम्मेदार अपने कार्यकर्ताओं और अपने सचिव को मान रही हैं.


दरअसल कुछ दिन पहले कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रियंका गाँधी ने अपने कार्यकर्ताओ को कहा था कि आप में से जिसने दिल से काम किया है उसकी जानकारी आपको है और जिसने नही किया है उसकी जानकारी मैं लुंगी. मतलब कांग्रेस महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी अपनी हार को स्वीकार करने के बजाय, शीर्ष नेतृत्व की गलती मानने के बजाय, हर पर मंथन करने के बजाय अपने ही कार्यकर्ताओं को ही हार का जिम्मेदार ठहरा रही हैं. खुद सोनिया गाँधी हार को स्वीकार करने के बजाय evm का बहाना बना रही हैं. लेकिन प्रियंका गाँधी जिस क्षेत्र की प्रभारी बनायी गयी थी वहां भी कांग्रेस की हालत बदतर स्थिति में थी लेकिन प्रियंका गाँधी ने हार का ठीकरा कार्यकर्ताओं पर फोड़ दिया है. इतना ही नही कांग्रेस की हार के बाद प्रियंका गाँधी ने अपने ओएसडी यानी निजी सचिव धीरज श्रीवास्तव को बर्खास्त कर दिया है. जानकारी के मुताबिक प्रियंका के पार्टी महासचिव बनने के कुछ हफ्तों बाद ही धीरज को उनका ओएसडी नियुक्त किया गया था। यूपीए सरकार में धीरज पीएमओ में एक महत्तवपूर्ण पद पर कार्यरत थे। साथ ही यूपीए सरकार के हर फैसले में उनकी एक अहम भूमिका हुआ करती थी। धीरज को जन नीतियों के लिए विशेषज्ञ भी माना जाता था। इतना ही नही धीरज श्रीवास्तव सोनिया गाँधी और अशोक गहलोत के लिए भी काम कर चुके हैं . हालाँकि इस बार इन्हें ही उत्तर प्रदेश में चुनाव जितवाने की जिम्मेदारी दी गयी थी लेकिन कांग्रेस सिर्फ एक सीट जीत सकी. इसके बाद प्रियंका गाँधी ने इन्हें बर्खास्त कर दिया है.


अब सवाल ये हैं कि एक तरह जहाँ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी हार की जिम्मेदारी लेते हुए अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की बात कर चुके हैं..तो उन्हें जबरदस्ती अध्यक्ष बनाकर रखा गया है. उनके इस्तीफे को नामंजूर किया जा रहा है. वहीँ दूसरी तरफ कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गाँधी रायबरेली पहुंचकर कार्यकर्ताओं पर हार का ठीकरा फोड़ रही हैं. अपने अधिकारीयों को हटा रही हैं. सवाल तो यही है कि आखिर हार का जिम्मेदार है कौन? राहुल गाँधी या फिर कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ता..
प्रियंका गाँधी कांग्रेस को मिली हार का ठीकरा अपने नेताओ और अपने अध्यक्ष, अपने महासचिव पर ना फोड़कर अब कार्यकर्ताओं और अधिकारियों को निशाना बना रही है. प्रियंका गाँधी को पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया था लेकिन कांग्रेस की स्थिति पहले से भी बदतर हो गयी.. सिर्फ एक सीट यानी रायबरेली जहाँ से खुद सोनिया गांधी चुनाव लड़ी थी उसके बजाय एक भी सीट कांग्रेस के खाते में नही आई तो क्या प्रियंका गाँधी की कोई जिम्मेदारी नही बनती? क्या प्रियंका गाँधी कांग्रेस को मिली इस हार के लिए थोडा सा भी जिम्मेदार नही है? जिस प्रियंका के आने से आंधी आने की बात कही जा रही हैं उस प्रियंका गांधी के आने से कांग्रेस की सीट बढ़ने के बजाय भाई तक की सीट चली गयी है क्या ये प्रियंका गाँधी इसके लिए जिम्मेदार नही है?


सवाल तो बहुत है लेकिन हार को स्वीकार करने के बजाय आज कांग्रेस में हार का ठीकरा एक दुसरे पर फेंका जा रहा है. अँधेरे में तीर मारा जा रहा है कहीं तो कहीं तीर निशाने पर लग ही जाएगा.
खैर कांग्रेस के कार्यकर्ता प्रियंका गाँधी के इस कदम को किस तरह देखते हैं
अब आपको बताते है कि आखिर राहुल गाँधी जी संसद में जब सदस्यता की शपथ ले रहे थे तब शपथ लेने के बाद वे बिना रजिस्टर पर साइन किये ही जाने लगे.. उन्हें वापस बुलाया गया और फिर साइन करने के लिए कहा गया. इसको लेकर सोशल मीडिया पर उनका मजाक उड़ाया गया.