इमरान खान से जब पत्रकार ने उइगर मुसलमानों के बारे में पूछा तो बोलती हो गई बंद

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान कहते हैं कि उनको कश्मीर की बहुत फ़िक्र है, कश्मीर के मुसलमानों की बहुत फ़िक्र है. अपने हर भाषण और प्रेस कांफ्रेंस में वो कहते हैं कि कश्मीरियों और मुसलमानों के साथ खड़े हैं और हमेशा खड़े रहेंगे. खून के आखिरी कतरे तक कश्मीर के लिए लड़ेंगे. वो खुद को मुसलमानों का हितैषी और मसीहा साबित करने की कोशिश करते हैं लेकिन उनके इस ढोंग की पोल खुल गई.

कश्मीर- कश्मीर चिल्लाने वाले इमरान खान से जब अल जजीरा ने चीन में उइगर मुसलमानों पर हो रहे अत्याचार के बारे में पूछा तो खान साहब की बोलती बंद हो गई. कुछ बोलते भी कैसे? ये उनके चहेते दोस्त चीन का मसला जो है. अगर इसपर वो चूं भी करते तो चीन उन्हें देने वाला पैसा न रोक देता. ले दे कर एकलौता देश है चीन जो पाकिस्तान के साथ खड़ा है.

हुआ यूँ कि अलजजीरा को इमरान खान इंटरव्यू दे रहे थे. खान साहब ने सोचा अल जजीरा तो उनके कौम का चैनल है, आसान सवाल ही पूछेगा लेकिन चैनल के रिपोर्टर ने पूछ लिया, “पाकिस्तान चीन के साथ घनिष्ठ संबंध रखता है. क्या आपने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ कभी उइगर मुसलमानों के उत्पीड़न के मुद्दे पर चर्चा की है?” इस सवाल को सुनकर इमरान खान की हालत वैसी ही हो गई जैसे बोर्ड एग्जाम में बैठे स्टूडेंट की हालत आउट ऑफ़ सिलेबस क्वेश्चन देख कर होती है. इमरान खान ने जवाब दिया, “नहीं हमने चीन से इस बारे में बात नहीं की. हम अभी अपनी आंतरिक समस्याओं से जूझ रहे हैं, इस मुद्दे के बारे में मुझे सच में ज्यादा जानकारी नहीं है. हम एक साल से सरकार में हैं, हम अर्थव्यवस्था को सुधारने में लगे हैं और अब कश्मीर का मुद्दा है. हम कई समस्याओं से घिरे हुए हैं. लेकिन मैं चीन के लिए एक बात कहूँगा, हमारे लिए चीन सबसे अच्छा दोस्त है.

बेशर्मी और बेहयाई देखिये इमरान खान की. उम्मा और कौम की बातें कर के अरब देशों पर खिसियाते हैं कि वो कश्मीर पर पाकिस्तान का साथ देने की बजाये नरेंद्र मोदी को सम्मानित कर रहे हैं और उसी कौम और उम्मा पर चीन में जुल्म हो रहा है तो इमरान खान को उसके बारे में पता ही नहीं. इमरान से उइगर मुसलमानों के बारे में कोई पूछे तो ऐसे देखते हैं मानों उनसे किडनी मांग ली हो.

कौन है उइगर मुस्लमान और क्या चाहते हैं

उइगर समुदाय के लोग तुर्की मूल के हैं और चीन के सबसे बड़े और पश्चिमी क्षेत्र शिंजियांग प्रांत में रहते हैं. इस प्रान्त की सीमाएं रूस और मंगोलिया सहित कुल 8 देशों से मिलती है. उइगर मुस्लिम ‘ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट’ चला रहे हैं जिसका मकसद चीन से अलग होकर एक स्वतंत्र राष्ट्र तुर्किस्तान बनाना. सांस्कृतिक और जनजातीय रूप से वे खुद को मध्य एशियाई देशों के नज़दीकी मानते हैं. साल 1949 में ईस्ट तुर्किस्तान कुछ समय के लिए एक स्वतंत्र राष्ट्र बना था लेकिन उसी साल ये चीन ने इसपर कब्ज़ा कर लिया.

इस प्रान्त में उइगर मुसलमानों की आबादी 1 करोड़ के करीब है. पहले ये समुदाय इस क्षेत्र में बहुसंख्यक था लेकिन फिर धीरे धीरे हालात बदलने लगे. चीन की सरकार ने यहाँ हान समुदाय को बसाना शुरू कर दिया, जिसका उइगर समुदाय ने विरोध किया. उइगर और हान समुदायों के बीच अक्सर दंगे होते रहते. जिसके बाद चीन ने यहाँ सेना की तैनाती कर दी और फिर उइगर मुसलमानों पर जुल्म होने लगे.

अब यहाँ हान समुदाय बहुसंख्यक हो चूका है. हान को मजबूत करने के लिए चीन सरकार हर संभव मदद दे रही है. इस क्षेत्र की नौकरियों में उन्हें ऊंचे पदों पर बिठाया जाता है और उइगुरों को दोयम दर्जे की नौकरियां दी जाती हैं. बीते दशक में अधिकांश प्रमुख उइगर नेताओं को जेलों में ठूंस दिया जाता रहा. उइगर आरोप लगाते हैं कि जब चाहे तब चीनी फ़ौज उनके घर वालों को उठा कर ले जाते हैं, उन्हें धार्मिक क्रियाकलापों की इजाजत भी नहीं दी जाती. सारी दुनिया उइगर मुसलमानों पर हो रहे अत्याचार से वाकिफ है लेकिन इमरान खान को इसकी जानकारी नहीं. इमरान को पता है कि अगर उन्होंने मुंह खोला तो कर्जों की जो पोटली चीन ने पाकिस्तान की और खोल रखी है वो भी बंद हो जायेगी और फिर गदहें बेच कर मुल्क चलाना पड़ेगा.