जब प्रचार छोड़कर फसल में लगी आग बुझाने पहुंचीं स्मृति ईरानी

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चुनाव प्रचार में जहाँ नेता ऊट पटांग बयानबाजी कर रहे है,राजनीति शिस्टाचार और अपने पद की गरिमा भूल कर सिर्फ कुर्सी के लालच में अपनी राजनीति का स्तर दिन पर गिराते जा रहें है..पर ऐसे चुनावी माहौल में एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसे देख कर लगता है ,कि कुछ नेताओं में अभी भी मानवता बाकी है,हुआ कुछ यूँ जब स्मृति ईरानी जब अपने प्रचार प्रसार में लगी हुए थी, इसी बीच उनको मुंशीगंज के पश्चिम दुआरा गांव में आग लगने की सूचना मिली जैसे ही उन्हें ये सूचना मिली तो वो अपना काम छोड़ कर सीधे उसी जगह पहुची, खेतों में जलती फसल देख वह भावुक हो गईं और हाथ में बाल्टी लेकर खुद आग बुझाने में लग गईं।

फायर ब्रिगेड पहुचने तक स्मृति ईरानी ने खुद ग़ाव वालों के साथ मिल कर आग बुजाने में मदद की, उन्होंने खुद हैंडपंप चलाकर काफी देर बाल्टियों में पानी भरा लेकिन अपनी फसल को यूँ तबाह होता देख गांव की महिलाएं स्मृति ईरानी से लिपटकर रोने लगीं फिर रो रही महिलाओं को पानी भी पिलाया, और महिलाओं को धैर्य रखने की बात कही कि सरकार हर संभव मदद करेगी आप लोगों की.

फिर उन्हें ऐसा करते देख पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ भाजपा कार्यकर्ता भी आग बुझाने में जुट गए,लेकिन हैरानी करने वाली बात तो ये रही  सूचना देने के बाद भी जब एसडीएम मौके पर नहीं पहुंचे तो उन्होंने तुरंत डीएम को फोन मिलाया। पता चला कि एसडीएम वीआईपी ड्यूटी में हैं तो स्मृति नाराज हो गईं। उन्होंने कहा कि जनता की मदद से लोग वीआईपी बनते हैं। जनता की मदद पहले होनी चाहिए।

वैसे इस आग में किसानो के सैंकड़ों बीघा गेहूँ की फसल खाक हो गयी,आपको यहाँ ये भी बता दें कि स्मृति ईरानी अमेठी से राहुल गाँधी के खिलाफ 2014 में चुनाव हार चुकी यही बाबजूद इसके वो यहाँ के विकास के लिए काम करती ही रहती है उनका आना जाना भी अमेठी में लगा ही रहता है..वैसे आपने chaupal ग्राउंड रिपोर्ट जो अमेठी में हुए थी उस में देखा ही होगा कि किस तरह लोग राहुल गाँधी को ईद का चाँद बता रहे थे , कि हमारे संसद सिर्फ वोट मागने और चुनाव के दौरान ही अमेठी में दिखाई देते है,वैसे  भाजपा और पार्टी से जुड़े कई लोगों का कहना है कि यह स्मृति का प्रभाव ही था कि राहुल गाँधी 2 सीटों से चुनाव लड़ने को मज़बूर हो गए। राहुल गाँधी केरल की वायनाड सीट से भी चुनाव लड़ रहे हैं, जिसे कॉन्ग्रेस के लिए सुरक्षित सीट मणि जा रही है

खैर लोगों ने फसल में आग लगने के बाद स्मृति ईरानी से ये भी कहा कि आग भुजाने के लिए आप यहाँ हो पर जिसे वोट दिया वो कहा है..ये वो सवाल है जो उन किसानो के मन में पीड़ा के साथ उठ रहा होगा.वैसे ये मानवता का काम है वो स्मृति ईरानी ने एक मिसाल बनाई है इस कद्र लोगों की मदद कर के..तभी कहते है कुछ चीजों को राजनीति से उठकर देखना चाहिए.