मध्यप्रदेश में कांग्रेस पार्टी के बीच चल रही आंतरिक कलह ने आखिरकार कमलनाथ सरकार को संकट में डाल दिया. ज्योतिरादित्य सिंधिया की बगावत ने पूरी कांग्रेस पार्टी में हलचल मचा दी है. सोमवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपना इस्तीफा सोनिया गाँधी को सौंप दिया था और साथ ही उसमें पार्टी छोड़ने की वजह भी बता दी थी. पिछले कई दिनों से कांग्रेस के विधायकों के गायब होने की खबर आ रही थी, जिसके बाद सिंधिया और उनके समर्थक विधायकों ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है.

जानकारी के लिए बता दें मध्यप्रदेश में सिंधिया और कांग्रेस पार्टी के बीच पिछले काफी समय से विवाद चल रहा था लेकिन पार्टी ने सिंधिया की एक शर्त न मानते हुए पूरा गणित बिगड़वा लिया और इस समय पार्टी की स्थिति सूबे में ऐसी है कि वो अपनी सरकार तक नहीं बचा पाएगी. सिंधिया और उनके समर्थक विधायकों के इस कदम के बाद एमपी में कांग्रेस की सरकार जाना लगभग तय ही है. कांग्रेस से 18 साल का रिश्ता तोड़कर सिंधिया ने अब बीजेपी का दामन थाम लिया है.

कांग्रेस आखिरी वक्त में सिंधिया को मध्यप्रदेश से राज्यसभा में भेजने के लिए भी तैयार हो गयी थी. इतना ही नही उन्हें मध्यप्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष बनाने के लिए भी तैयार थी लेकिन सिंधिया की तीसरी शर्त को पार्टी ने नहीं माना जिसका नतीजा ये निकला कि सिंधिया ने अपना रुख बदलते हुए कांग्रेस को बड़ा झटका दे दिया. दरअसल सिंधिया की तीसरी शर्त ये थी कि राज्यसभा के लिए दूसरी सीट पर दिग्विजय की जगह किसी अन्य ओबीसी नेता को भेजा जाए.

गौरतलब है कि सिंधिया की तीसरी शर्त को पार्टी नही माना जिसके चलते सिंधिया की नाराजगी बढ़ती गयी. वहीं सिंधिया ने पिछले साल अपने ट्वीटर हैंडल से कांग्रेस नेता की जगह अपनी पहचान बदलकर पार्टी की मुश्किलें तभी बढ़ा दी थी. अब उन्होंने पार्टी से इस्तीफा देकर पार्टी को बड़ा झटका दे दिया है.