जौनपुर में ज’ला डा’ली द’लितों की बस्ती, आ’रोपियों के नाम सुन सेक्युलर और लिबरल गैं’ग की जुबान को मा’र गया ल’कवा

722

बीते 9 जून को उत्तर प्रदेश के जौनपुर में दलितों की बस्ती को भीड़ ने ज’ला दिया. भीड़ 500 की संख्या में थी और इस मामले में जो मुख्य आ’रोपी है उसका नाम है जावेद सिद्धिकी. ये घटना भाजपा शासित राज्य में हुई लेकिन इसके बावजूद सेक्युलर और लिबरल गैं’ग में खामोशी है. अगर भाजपा शासित राज्य में इस तरह की घटना होती है तो सेक्युलर और लिबरल गैं’ग सोशल मीडिया पर तू’फान खड़े कर देती है. लेकिन इस घटना पर लिबरल और सेक्युलर गैं’ग की जुबान को ल’कवा मा’र गया है और इसकी वजह है आरोपियों के नाम और उसका मुस्लिम और पिछड़ों की राजनीति करने वाली समाजवादी पार्टी से जुड़े होना.

इस घटना के मुख्य आरोपी जावेद सिद्धिकी की समाजवादी पार्टी में कितनी पहुँच है, इसका अंदाजा आप इस बात से लगाइए कि अखिलेश यादव उसे जौनपुर से चुनाव लड़वाना चाहते थे. लेकिन तब समाजवादी पार्टी और बसपा में गठबंधन था तो अखिलेश यादव ने जौनपुर सीट बसपा के लिए छोड़ दी और इस तरह से जावेद सिद्धिकी उम्मीदवार बनते बनते रह गए. इस पूरे घटना पर अब तक प्रियंका गाँधी ने भी कोई बयान नहीं दिया. क्योंकि आ’रोपी मुस्लिम है इसलिए. प्रियंका गाँधी की बात छोड़िये अब तक ओवेसी, खुद अखिलेश यादव, दलितों के नए मसीहा बन कर उभरे भीम आर्मी के चंद्रशेखर आजाद, सोशल मीडिया पर दलितों के हितैषी दिलीप मंडल और उदित राज तक ने चुप्पी साध ली. लेकिन जरा सोचिये कि इस घटना से कोई हिंदूवा’दी संगठन या हिंदूवादी नेता जुड़ा होता तो अब तक हिन्दू आ’तंकवा’द की थ्योरी फिर गढ़ दी गई होती.

CAA विरोधी प्रदर्शन के दौरान बहुत उछल कूद करने वाले भीम आर्मी चीफ चन्द्रशेखर ने अब तक्क इस घटना के खिलाफ दलितों के समर्थन में धरना देना तो छोडिये एक बयान तक नहीं दिया. इस पूरे मामले में 58 नामजद और 100 अज्ञात आ’रोपि’यों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आ’रोपि’यों पर NSA और गैं’गस्ट’र एक्ट लगाने का आदेश दिया था जिसके बाद समाजवादी पार्टी के नेता जावेद सिद्दीकी सहित 35 आ’रोपि’यों को गि’रफ्ता’र कर जेल भेज दिया.