”भैया हम आग के बीच फंसे हैं, बाहर से दरवाजा बंद है, लगता है हम सब मर जायेंगे”

पूरे घर में धुंआ भरा हुआ है, दरवाजा भी नहीं खुल रहा है मुझे ऐसा महसूस हो रहा है कि मेरी सांसें टूट रहीं हैं और धुंए से मेरा दम घुट रहा है, पूरे घर में भयंकर आग लगी हुई है आप जल्दी से आजाओ प्लीज वर्ना हम मारे जायेंगे. भैया हम बाहर निकल जाते मगर किसी ने बाहर से दरवाजे को बंद कर रखा है.  जल्दी से आकर आप ही दरवाजा खोल दो, हम सब अब भी बच सकते हैं, ये वो बातें हैं जो दिल्ली के किराड़ी में रहने वाले उदयकांत ने घर में लगी आग के बीच फ़ोन पर अपने भाई विजय कुमार से कहीं.

एक समाचार चैनल को से हुई बातचीत के दौरान विजय ने बताया कि वह एक कंपनी में नाइट शिफ्ट में काम करते हैं, इसी के चलते रविवार रात को भी वह कंपनी में ही मौजूद थे. इसी बीच उस रात करीब 12:30 बजे उदयकांत ने उन्हें एक कॉल किया, वो परेशान लग रहा था, फिर उसने मुझे घर में आग लगने की जानकारी दी. वो बेहद घबराए हुए नजर आ रहे थे. इसके बाद वो बोले, ‘भैया प्लीज जल्दी से दरवाजे की कुंडी खुलवा दो, वर्ना घर के अंदर ही हम सभी आज मर जाएंगे’

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए विजय बताते हैं. ‘’ जैसे ही कॉल कटी, मैंने फ़ौरन ही मेरे भांजे गोपाल और हमारी पडोसी संगम को कॉल लगाई, मैंने उनसे पूरी घटना बताते हुए जाकर कुण्डी खोलने को कहा मेरी कॉल के बाद लोग वहां जल्दी से भागकर पहुंचे लेकिन तबतक आग बढ़ चुकी थी  ऊपर से बिल्डिंग का मेन गेट भी बंद था,  जिसकी वजह से कोई भी उनकी मदद नहीं कर पाया. अगर मुख्य दरवाजा खुला होता तो शायद वो सभी लोग बच सकते थे.

विजय अचानक लगी इतनी भयानक आग के पीछे किसी षड्यंत्र को देख रहे हैं, उन्होंने कहा कि उदयकांत इस बिल्डिंग के पहले फ्लोर पर करीब 3 सालों से रह रहे थे. इसके आलावा उदयकांत ने बतौर सिक्यॉरिटी मकान मालिक को 2.5 लाख रुपये दे रखे थे. उनके भाई इस सिलसिले में  मकान मालिक से रुपये वापस करने की बात कह चुके थे. मकान मालिक को एक दो दिन में ही पैसे वापस चुकाने थे, विजय में मालिक पर आरोप लगाते हुए ये भी कहा, कि हो सकता है इस पैसे की वजह सही ये साज़िश रची गयी हो.

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