कांग्रेस के साथ जाते ही उसी की भाषा बोलने लगी शिवसेना, आ’तंकि’यों की गिरफ़्तारी पर उठाये सवाल

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शिवसेना जब तक भाजपा के साथ ही एक राष्ट्रवादी और हिंदूवादी पार्टी हुआ करती थी. राष्ट्रवाद और हिंदुत्व के मुद्दे पर गरजा करती थी. लेकिन कांग्रेस के साथ हाथ मिलाते ही उसी की भाषा में बोलने लगी. अब शिवसेना को आ’तंकि’यों की गिरफ्तारी से भी दिक्कत हो गई है. अब शिवसेना राष्ट्रवाद और हिंदुत्व के मुद्दे से समझौता कर कांग्रेस को खुश करने में लग गई है. आखिर कुर्सी भी तो बचानी है.

बीते दिनों खबर आई कि जम्मू –कश्मीर से कुछ आ’तंकि’यों को गिरफ्तार किया गया है जो गणतंत्र दिवस पर कुछ बड़ा करने का प्लान कर रहे थे. जम्मू कश्मीर पुलिस का एक डीएसपी देवेंदर सिंह भी शिकंजे में आया जो आ’तंकि’यों की लम्बे समय से मदद कर रहा था. शिवसेना ने आ’तंकि’यों पर कारवाई और गिरफ्तारी को लेकर तंज कसा है. शिवसेना के मुखपत्र सामना में सवाल उठाया गया है कि ये आ’तंकवादी स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के अवसर पर ही क्यों पकड़े जाते हैं?

सामना के संपादकीय में लिखा गया है कि मानो ये खबर गणतंत्र दिवस की सूचना लेकर ही आती है. इस बार भी ऐसी खबर सरकारी विभाग से आई है. कश्मीर पुलिस ने गणतंत्र दिवस पर हमले की साजिश को नाकाम कर दिया है. अब एक खबर और बहुत जल्द दिल्ली की ओर बढ़ेगी, जिसमें दिल्ली में स्वतंत्रता दिवस पर हमला करने की फिराक में घुसे चार-पांच सशस्त्र आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है.

सामना में तंज कसते हुए लिखा गया है कि स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस आते ही आतंकी बम-बंदूकें लेकर अपनी बिल से बाहर निकलते हैं. ऐसा लगता है मानों वो कैलेंडर लेकर ही वे बिल में पड़े रहते हैं और राष्ट्रीय समारोह की तारीखों को देखते ही बाहर निकल आते हैं. फिर उनके बाहर आने के बाद साजिश को कैसे नाकाम किया गया, ऐसी खबरें प्रकाशित होती हैं.

गरजने वाली शिवसेना कैसे मिमियाने लगी है उसका ये पहला उदहारण नहीं है. शिवसेना के विचारधारा के नायक वीर सावरकर पर राहुल गाँधी समेत पूरी कांग्रेस हमले करती है और शिवसेना बस निंदा करके रह जाती है. इंदिरा गाँधी और करीं लाला की मुलाक़ात की बात सार्वजानिक करने बाद कांग्रेस ने ऐसा हड़काया कि शिवसेना नेता संजय राउत को माफ़ी मांगनी पड़ी. कुल मिला कर ये कि गरजने वाली शिवसेना के दिन ख़त्म, अब कांग्रेस के इशारे पर मिमियाने वाली शिवसेना के दर्शन कीजिये.